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दीप्ति हटीं, उमा और आंचल आमने-सामने
ब्यूरो / अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
Updated Tue, 05 Jan 2016 12:07 AM IST
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मुजफ्फरनगर। जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए निर्दलीय प्रत्याशी दीप्ति पाल ने अपना नामांकन वापस लेकर मैदान छोड़ दिया है।
चुनाव अब सपा प्रत्याशी एवं पूर्व मंत्री उमा किरण और भाजपा प्रत्याशी आंचल तोमर के बीच होगा। सपा हाईकमान द्वारा चुनाव प्रभारी बनाकर मुजफ्फरनगर भेजे गए एमएलसी आशु मलिक जीत के लिए पार्टी के बड़े नेताओं के साथ व्यूह रचना में जुट गए हैं।
एससी महिला के लिए आरक्षित जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव में हार-जीत की जंग अब सपा और भाजपा के बीच होगी। सोमवार को नामांकन प्रक्रिया में नाम वापसी की तिथि निर्धारित थी। निर्दलीय प्रत्याशी एवं वार्ड नंबर सात से विजेता दीप्ति पाल ने अपनी दावेदारी वापस ले ली है।
वार्ड चार से जीती पूर्व मंत्री उमा किरण और वार्ड 41 से विजयी आंचल अब आमने-सामने हैं। पंचायत की लालबत्ती हासिल करने के लिए भाजपा ने भी ताकत झोंक रखी है। 22 का आंकड़ा छूने के लिए कशमकश है। भाजपा के चुनाव प्रभारी एवं केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री डॉ संजीव बालियान ने वोटों की जबरदस्त घेराबंदी की है।
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यही वजह है कि भाजपा प्रत्याशी के लिए जुटाए गए वोट जिले से दूर रखे गए थे। बालियान ने अध्यक्ष पद के लिए ताकत लगा रखी है।
भाजपा का दावा है कि उनकी प्रत्याशी ही जीतेगी। रालोद और भाकियू का आंचल को समर्थन है। भाजपा, रालोद और भाकियू के नेतृत्व में जीतकर आए निर्वाचित जिला पंचायत सदस्य ही आंचल की जीत में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
सपा हाईकमान द्वारा चुनाव प्रभारी बनाए गए एमएलसी आशु मलिक ने जिले में डेरा डाल लिया है। पार्टी के बड़े नेताओं से मंत्रणा के बाद जीत के लिए वोट जुटाने की रणनीति शुरू कर दी गई है।
पूर्व सांसद अमीर आलम और विधायक नवाजिश आलम से जुड़ी वोटों के अलावा जो भी मुस्लिम सदस्य जीते हैं, उन्हें सपा हर हालत में अपने हक में रखना चाहती है।
रेशम विकास निगम के चेयरमैन मुकेश चौधरी और उप चुनाव में सपा प्रत्याशी गौरव स्वरूप अपने तरीके से सपा की जीत की राह बना रहे हैं।
सपा हाईकमान ने अध्यक्ष पद पर जीत के लिए लखनऊ से जो इशारा किया है, पार्टी उसी तरीके से फूंक-फूंक कर कदम रख रही है। शहरी सीट पर उपचुनाव के मद्देनजर भी सपा कोई चूक नहीं करना चाहती। गुरुवार को चुनाव होना है, ऐसे में हर घड़ी-हर पल वोट पाने की सियासी गुणा-भाग मची है।
आंचल पर दबाव नहीं होगा बर्दाश्त
मुजफ्फरनगर। भाजपा प्रत्याशी आंचल तोमर के समर्थन में सदर ब्लाक के गांव मखियाली में सोमवार को हुई पंचायत में किसी भी दबाव को बर्दाश्त नहीं करने का ऐलान किया गया।
ओमसिंह के घेर में कई गांव के लोग जुटे। वक्ताओं ने कहा कि आंचल के परिजनों पर चुनाव से हटने के लिए दबाव डाला जा रहा है।
हिम्मत और हौसले के साथ भाजपा प्रत्याशी आंचल का साथ दिया जाएगा। इस दौरान इलम सिंह, प्रहलाद, ओमसिंह, धर्मसिंह, अरविंद, वीरपाल, सोहनवीर सिंह, डॉ रणवीर सिंह, फूलसिंह, ब्रहम सिंह, भोपाल सिंह आदि मौजूद रहे। अध्यक्षता सत्यपाल सिंह ने की।
वोट की कीमतों में आया उछाल
मुजफ्फरनगर। चुनाव की अंतिम चरण में पहुंच चुकी लड़ाई के लिए एक-एक वोट की कीमत ने उछाल ले लिया है। सपा और भाजपा ने संगठन के बड़े पदाधिकारियों को वोट बटोरने में झोंक रखा है।
कद्दावर नेता वोटरों से किए जा रहे वायदों को पूरा कराने का भरोसा देने से पीछे नहीं हैं। वोटों का मोल-भाव सिरदर्द बना हुआ है। धार्मिक और जातीय आधार पर चुनाव में जीत का आंकड़ा जुटाने की जंग छिड़ी है।
दीप्ति गुट के वोटों पर निगाहें
मुजफ्फरनगर। अध्यक्ष पद की दावेदार दीप्ति पाल ने सोमवार को अपना नाम वापस ले लिया। शुरुआत में चुनाव की प्रबल दावेदार मानी जा रही दीप्ति ऐन वक्त पर मात खा गईं।
भाजपा से बात बिगड़ने के बाद दीप्ति ने सपा से टिकट लेने की जुगत लगाई, लेकिन अंतत: सारे प्रयास विफल साबित हुए। एक-एक कर उनके समर्थक साथ छोड़ते गए।
अब दीप्ति की वोट को लेकर रस्साकशी चल रही है। हालांकि रविवार रात शहर के अंबा विहार में एमएलसी आशु मलिक की मौजूदगी में हुई बैठक में दीप्ति ने हिस्सेदारी की। मगर, अभी भी सपा भाजपा प्रत्याशियों की निगाहें दीप्ति पर टिकी हैं। दीप्ति के प्रस्तावक तहसीन बानो और अनुमोदक सचिन कुमार किस पाले में जाएंगे, यह भी तय होना है।
उपचुनाव का सेमीफाइनल है पंचायत का रण
मुजफ्फरनगर। जिला पंचायत अध्यक्ष पद का चुनाव सपा और भाजपा के लिए उपचुनाव का सेमीफाइनल माना जा रहा है।
शहरी विधानसभा सीट पर सपा का कब्जा है। भाजपा पुन: कमल खिलाने को आतुर है, इसलिए जिला पंचायत की लालबत्ती सियासी दबदबे का सवाल बन गई है। दोनों ही पार्टियों के हाईकमान ने बड़े नेताओं को चुनाव की रणनीति में लगा दिया है।
भले ही एससी महिला सात जनवरी को जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर चुनी जाएगी, लेकिन असली जंग राजनीति में भविष्य के वर्चस्व को लेकर छिड़ी है।
सात सितंबर 2013 के दंगे के बाद जाट और मुस्लिम समीकरण टूट गया था। धर्म के आधार पर हुए ध्रुवीकरण से सियासी गणित धराशायी हो गई। मोदी लहर में संसदीय चुनाव में भाजपा ने जीत हासिल की थी।
डॉ. संजीव बालियान को केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री बनने का मौका मिला। वही पंचायत चुनाव में भाजपा की जीत के लिए मोर्चा लिए हैं। पार्टी ने भी वरिष्ठ नेताओं को दरकिनार कर उन्हीं को जिम्मा दिया है।
भाजपा भी जिला पंचायत को उप चुनाव से पहले सेमीफाइनल मानकर चल रही है। भाजपा ने अभी तक उपचुनाव प्रत्याशी घोषित नहीं किया है, जबकि सपा पूर्व मंत्री स्वर्गीय चितरंजन स्वरूप के बेटे गौरव स्वरूप को उम्मीदवार बना चुकी है।
बीते विधानसभा चुनाव में चितरंजन स्वरूप ने भाजपा के अशोक कंसल को शिकस्त दी थी। शहरी सीट पर भाजपा अपना वर्चस्व दोबारा पाना चाहती है, मगर सपा किसी भी कीमत पर सीट गंवाना नहीं चाहती। वैसे भी जिले में केवल बुढाना और शहरी सीट पर ही सपा को जीत मिली थी।
वेस्ट यूपी में सत्तारुढ दल के लिए पूर्वांचल जैसा प्रदर्शन चुनौती बना हुआ है। गाजियाबाद में सपा का निर्विरोध पंचायत अध्यक्ष बनवा चुके एमएलसी आशु मलिक को यहां की जिम्मेदारी दिए जाने की एक वजह यह भी है कि मलिक मूल रूप से यहीं के वाशिंदे हैं। सपा हर फार्मूला अपनाकर जीत के अभियान को बढ़ाना चाहती है।
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चुनाव अब सपा प्रत्याशी एवं पूर्व मंत्री उमा किरण और भाजपा प्रत्याशी आंचल तोमर के बीच होगा। सपा हाईकमान द्वारा चुनाव प्रभारी बनाकर मुजफ्फरनगर भेजे गए एमएलसी आशु मलिक जीत के लिए पार्टी के बड़े नेताओं के साथ व्यूह रचना में जुट गए हैं।
एससी महिला के लिए आरक्षित जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव में हार-जीत की जंग अब सपा और भाजपा के बीच होगी। सोमवार को नामांकन प्रक्रिया में नाम वापसी की तिथि निर्धारित थी। निर्दलीय प्रत्याशी एवं वार्ड नंबर सात से विजेता दीप्ति पाल ने अपनी दावेदारी वापस ले ली है।
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वार्ड चार से जीती पूर्व मंत्री उमा किरण और वार्ड 41 से विजयी आंचल अब आमने-सामने हैं। पंचायत की लालबत्ती हासिल करने के लिए भाजपा ने भी ताकत झोंक रखी है। 22 का आंकड़ा छूने के लिए कशमकश है। भाजपा के चुनाव प्रभारी एवं केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री डॉ संजीव बालियान ने वोटों की जबरदस्त घेराबंदी की है।
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यही वजह है कि भाजपा प्रत्याशी के लिए जुटाए गए वोट जिले से दूर रखे गए थे। बालियान ने अध्यक्ष पद के लिए ताकत लगा रखी है।
भाजपा का दावा है कि उनकी प्रत्याशी ही जीतेगी। रालोद और भाकियू का आंचल को समर्थन है। भाजपा, रालोद और भाकियू के नेतृत्व में जीतकर आए निर्वाचित जिला पंचायत सदस्य ही आंचल की जीत में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
सपा हाईकमान द्वारा चुनाव प्रभारी बनाए गए एमएलसी आशु मलिक ने जिले में डेरा डाल लिया है। पार्टी के बड़े नेताओं से मंत्रणा के बाद जीत के लिए वोट जुटाने की रणनीति शुरू कर दी गई है।
पूर्व सांसद अमीर आलम और विधायक नवाजिश आलम से जुड़ी वोटों के अलावा जो भी मुस्लिम सदस्य जीते हैं, उन्हें सपा हर हालत में अपने हक में रखना चाहती है।
रेशम विकास निगम के चेयरमैन मुकेश चौधरी और उप चुनाव में सपा प्रत्याशी गौरव स्वरूप अपने तरीके से सपा की जीत की राह बना रहे हैं।
सपा हाईकमान ने अध्यक्ष पद पर जीत के लिए लखनऊ से जो इशारा किया है, पार्टी उसी तरीके से फूंक-फूंक कर कदम रख रही है। शहरी सीट पर उपचुनाव के मद्देनजर भी सपा कोई चूक नहीं करना चाहती। गुरुवार को चुनाव होना है, ऐसे में हर घड़ी-हर पल वोट पाने की सियासी गुणा-भाग मची है।
आंचल पर दबाव नहीं होगा बर्दाश्त
मुजफ्फरनगर। भाजपा प्रत्याशी आंचल तोमर के समर्थन में सदर ब्लाक के गांव मखियाली में सोमवार को हुई पंचायत में किसी भी दबाव को बर्दाश्त नहीं करने का ऐलान किया गया।
ओमसिंह के घेर में कई गांव के लोग जुटे। वक्ताओं ने कहा कि आंचल के परिजनों पर चुनाव से हटने के लिए दबाव डाला जा रहा है।
हिम्मत और हौसले के साथ भाजपा प्रत्याशी आंचल का साथ दिया जाएगा। इस दौरान इलम सिंह, प्रहलाद, ओमसिंह, धर्मसिंह, अरविंद, वीरपाल, सोहनवीर सिंह, डॉ रणवीर सिंह, फूलसिंह, ब्रहम सिंह, भोपाल सिंह आदि मौजूद रहे। अध्यक्षता सत्यपाल सिंह ने की।
वोट की कीमतों में आया उछाल
मुजफ्फरनगर। चुनाव की अंतिम चरण में पहुंच चुकी लड़ाई के लिए एक-एक वोट की कीमत ने उछाल ले लिया है। सपा और भाजपा ने संगठन के बड़े पदाधिकारियों को वोट बटोरने में झोंक रखा है।
कद्दावर नेता वोटरों से किए जा रहे वायदों को पूरा कराने का भरोसा देने से पीछे नहीं हैं। वोटों का मोल-भाव सिरदर्द बना हुआ है। धार्मिक और जातीय आधार पर चुनाव में जीत का आंकड़ा जुटाने की जंग छिड़ी है।
दीप्ति गुट के वोटों पर निगाहें
मुजफ्फरनगर। अध्यक्ष पद की दावेदार दीप्ति पाल ने सोमवार को अपना नाम वापस ले लिया। शुरुआत में चुनाव की प्रबल दावेदार मानी जा रही दीप्ति ऐन वक्त पर मात खा गईं।
भाजपा से बात बिगड़ने के बाद दीप्ति ने सपा से टिकट लेने की जुगत लगाई, लेकिन अंतत: सारे प्रयास विफल साबित हुए। एक-एक कर उनके समर्थक साथ छोड़ते गए।
अब दीप्ति की वोट को लेकर रस्साकशी चल रही है। हालांकि रविवार रात शहर के अंबा विहार में एमएलसी आशु मलिक की मौजूदगी में हुई बैठक में दीप्ति ने हिस्सेदारी की। मगर, अभी भी सपा भाजपा प्रत्याशियों की निगाहें दीप्ति पर टिकी हैं। दीप्ति के प्रस्तावक तहसीन बानो और अनुमोदक सचिन कुमार किस पाले में जाएंगे, यह भी तय होना है।
उपचुनाव का सेमीफाइनल है पंचायत का रण
मुजफ्फरनगर। जिला पंचायत अध्यक्ष पद का चुनाव सपा और भाजपा के लिए उपचुनाव का सेमीफाइनल माना जा रहा है।
शहरी विधानसभा सीट पर सपा का कब्जा है। भाजपा पुन: कमल खिलाने को आतुर है, इसलिए जिला पंचायत की लालबत्ती सियासी दबदबे का सवाल बन गई है। दोनों ही पार्टियों के हाईकमान ने बड़े नेताओं को चुनाव की रणनीति में लगा दिया है।
भले ही एससी महिला सात जनवरी को जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर चुनी जाएगी, लेकिन असली जंग राजनीति में भविष्य के वर्चस्व को लेकर छिड़ी है।
सात सितंबर 2013 के दंगे के बाद जाट और मुस्लिम समीकरण टूट गया था। धर्म के आधार पर हुए ध्रुवीकरण से सियासी गणित धराशायी हो गई। मोदी लहर में संसदीय चुनाव में भाजपा ने जीत हासिल की थी।
डॉ. संजीव बालियान को केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री बनने का मौका मिला। वही पंचायत चुनाव में भाजपा की जीत के लिए मोर्चा लिए हैं। पार्टी ने भी वरिष्ठ नेताओं को दरकिनार कर उन्हीं को जिम्मा दिया है।
भाजपा भी जिला पंचायत को उप चुनाव से पहले सेमीफाइनल मानकर चल रही है। भाजपा ने अभी तक उपचुनाव प्रत्याशी घोषित नहीं किया है, जबकि सपा पूर्व मंत्री स्वर्गीय चितरंजन स्वरूप के बेटे गौरव स्वरूप को उम्मीदवार बना चुकी है।
बीते विधानसभा चुनाव में चितरंजन स्वरूप ने भाजपा के अशोक कंसल को शिकस्त दी थी। शहरी सीट पर भाजपा अपना वर्चस्व दोबारा पाना चाहती है, मगर सपा किसी भी कीमत पर सीट गंवाना नहीं चाहती। वैसे भी जिले में केवल बुढाना और शहरी सीट पर ही सपा को जीत मिली थी।
वेस्ट यूपी में सत्तारुढ दल के लिए पूर्वांचल जैसा प्रदर्शन चुनौती बना हुआ है। गाजियाबाद में सपा का निर्विरोध पंचायत अध्यक्ष बनवा चुके एमएलसी आशु मलिक को यहां की जिम्मेदारी दिए जाने की एक वजह यह भी है कि मलिक मूल रूप से यहीं के वाशिंदे हैं। सपा हर फार्मूला अपनाकर जीत के अभियान को बढ़ाना चाहती है।