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चिकित्सालयों में गूंजी बेटियों की किलकारियां
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डॉटर्स डे: चिकित्सालयों में गूंजी बेटियों की किलकारियां
मुजफ्फरनगर/चरथावल। बदलते दौर में बेटी-बेटा एक समान पर अमल करने का चलन बढ़ा है। समाज में अधिकांश लोगों की रूढ़िवादिता के प्रति सोच बदल रही है। डॉटर्स डे पर सरकारी अस्पतालों और घरों में बेटियों की किलकारियां गूंजी तो खुशियां बरस गई। घर में नन्हीं परी के आगमन से परिजन खुशी से झूम उठे।
27 सितंबर को डाटर्स डे पर जिला महिला चिकित्सालय में एक दंपती के यहां बेटी का जन्म हुआ। चरथावल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर तितावी थाना क्षेत्र के गांव सैदपुर खुर्द निवासी पिंकी-फूलकुमार दंपती के यहां सुबह 6.18 पर नए मेहमान के रूप में मासूम बच्ची की किलकारियां गूंजी, तो अस्पताल में खुशियां फैल गई। दंपती के परिजनों ने बेटे की तरह खुशियों को सेलिब्रेट किया। स्टाफ नर्स लता बताती हैं कि महिला पिंकी को नार्मल डिलीवरी होने के कारण चार घंटे बाद घर के लिए रिलीव कर दिया गया। उनका मानना है ड्यूटी के दौरान अब अधिकांश कपल की चाहत होती है कि उनके यहां बेटी हो या बेटा..सब भगवान की कृपा है। बेटियों के जन्म से दुखी होने वाली रवायत अब पुरानी पड़ गई है। महिला चिकित्साधिकारी डा. सुधा गुप्ता का मानना है बेटी हो या बेटा, क्या फर्क पड़ता है? समाज में बेटी के जन्म पर लोगों की संकुचित विचारधारा बदली है। वह हमेशा दोनों को एक समान मानती हैं। सीएचसी प्रभारी डा. सतीश कुमार का मानना है सरकार ने बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान को सार्थक बनाने के लिए बालिकाओं की सुरक्षा और समृद्धि के लिए अनेक महत्वाकांक्षी योजनाएं चलाई हुई है। अब बेटियां हुनर और प्रतिभा के दम पर आसमान छू रही है। जिला महिला अस्पताल की सीएमएस डा. अमृता रानी भांभे ने बताया रविवार शाम तक सात बेटे और एक बेटी ने महिला चिकित्सालय में जन्म लिया है।
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मुजफ्फरनगर/चरथावल। बदलते दौर में बेटी-बेटा एक समान पर अमल करने का चलन बढ़ा है। समाज में अधिकांश लोगों की रूढ़िवादिता के प्रति सोच बदल रही है। डॉटर्स डे पर सरकारी अस्पतालों और घरों में बेटियों की किलकारियां गूंजी तो खुशियां बरस गई। घर में नन्हीं परी के आगमन से परिजन खुशी से झूम उठे।
27 सितंबर को डाटर्स डे पर जिला महिला चिकित्सालय में एक दंपती के यहां बेटी का जन्म हुआ। चरथावल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर तितावी थाना क्षेत्र के गांव सैदपुर खुर्द निवासी पिंकी-फूलकुमार दंपती के यहां सुबह 6.18 पर नए मेहमान के रूप में मासूम बच्ची की किलकारियां गूंजी, तो अस्पताल में खुशियां फैल गई। दंपती के परिजनों ने बेटे की तरह खुशियों को सेलिब्रेट किया। स्टाफ नर्स लता बताती हैं कि महिला पिंकी को नार्मल डिलीवरी होने के कारण चार घंटे बाद घर के लिए रिलीव कर दिया गया। उनका मानना है ड्यूटी के दौरान अब अधिकांश कपल की चाहत होती है कि उनके यहां बेटी हो या बेटा..सब भगवान की कृपा है। बेटियों के जन्म से दुखी होने वाली रवायत अब पुरानी पड़ गई है। महिला चिकित्साधिकारी डा. सुधा गुप्ता का मानना है बेटी हो या बेटा, क्या फर्क पड़ता है? समाज में बेटी के जन्म पर लोगों की संकुचित विचारधारा बदली है। वह हमेशा दोनों को एक समान मानती हैं। सीएचसी प्रभारी डा. सतीश कुमार का मानना है सरकार ने बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान को सार्थक बनाने के लिए बालिकाओं की सुरक्षा और समृद्धि के लिए अनेक महत्वाकांक्षी योजनाएं चलाई हुई है। अब बेटियां हुनर और प्रतिभा के दम पर आसमान छू रही है। जिला महिला अस्पताल की सीएमएस डा. अमृता रानी भांभे ने बताया रविवार शाम तक सात बेटे और एक बेटी ने महिला चिकित्सालय में जन्म लिया है।
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