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डल्लू देवता हादसा : साहब! मेरे बच्चे को बचा लो...
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मुजफ्फरनगर : जिला चिकित्सालय में पुलिसकर्मी के पैरों मे सिर रखकर कार्रवाई की गुहार लगाता मृतक यु?
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
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मुजफ्फरनगर। डल्लू देवता पर हुए भयावह हादसे में घायल गुब्बारा विक्रेता आशु के पिता पप्पू और अन्य परिजनों को जैसे ही घटना की जानकारी मिली, उनके होश उड़ गए। पिता पप्पू और चाचा अजय तत्काल अन्य परिजनों के साथ जिला अस्पताल पहुंचे, जहां बेटे की हालत देख उनके आंसू छलक उठे। आशु को तड़पता देख पप्पू डॉक्टरों और पुलिसकर्मियों के पैर पकड़कर रोता रहा। कहता रहा कि किसी भी तरह उसके बच्चे को बचा लिया जाए।
बेबस पिता की करुण चीत्कार देख वहां मौजूद सभी लोगों की आंखें नम हो गईं। डॉक्टर और पुलिसकर्मी लगातार जार-जार रो रहे पिता व चाचा को दिलासा देते रहे, लेकिन बेबस होकर आशु को पल-पल मौत के मुंह में जाने से बचाने के लिए कुछ नहीं कर सके। उसे मेरठ रेफर किया गया, लेकिन कुछ दूर जाने पर ही उसकी हालत बिगड़ी तो उम्मीदों के साथ बेबस परिजन उसे फिर जिला अस्पताल लौटा लाए, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। बेटे की मौत के बाद बेबस पिता व चाचा काफी देर तक वहीं फर्श पर बैठकर रोते रहे, जिन्हें वहां मौजूद लोग दिलासा देते रहे।
पुलिस में भर्ती होना चाहता था आशु
जिला अस्पताल में मौजूद आशु के चाचा ने बताया कि वह पुलिस विभाग में भर्ती होने का सपना संजोए हुए था। हाईस्कूल उत्तीर्ण कर चुका आशु पढ़ाई करने के साथ ही लगातार दौड़ लगाने सहित अन्य तैयारियां भी करता था। गरीब पिता पर बोझ न पड़े, इसके लिए पढ़ाई के साथ-साथ आशु अतिरिक्त आय के लिए गुब्बारे बेचने का काम करता था।
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बेबस पिता की करुण चीत्कार देख वहां मौजूद सभी लोगों की आंखें नम हो गईं। डॉक्टर और पुलिसकर्मी लगातार जार-जार रो रहे पिता व चाचा को दिलासा देते रहे, लेकिन बेबस होकर आशु को पल-पल मौत के मुंह में जाने से बचाने के लिए कुछ नहीं कर सके। उसे मेरठ रेफर किया गया, लेकिन कुछ दूर जाने पर ही उसकी हालत बिगड़ी तो उम्मीदों के साथ बेबस परिजन उसे फिर जिला अस्पताल लौटा लाए, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। बेटे की मौत के बाद बेबस पिता व चाचा काफी देर तक वहीं फर्श पर बैठकर रोते रहे, जिन्हें वहां मौजूद लोग दिलासा देते रहे।
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पुलिस में भर्ती होना चाहता था आशु
जिला अस्पताल में मौजूद आशु के चाचा ने बताया कि वह पुलिस विभाग में भर्ती होने का सपना संजोए हुए था। हाईस्कूल उत्तीर्ण कर चुका आशु पढ़ाई करने के साथ ही लगातार दौड़ लगाने सहित अन्य तैयारियां भी करता था। गरीब पिता पर बोझ न पड़े, इसके लिए पढ़ाई के साथ-साथ आशु अतिरिक्त आय के लिए गुब्बारे बेचने का काम करता था।
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