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वॉलीबाल खेलने के झगड़े ने करा दी फांसी की सजा

Wed, 21 Nov 2018 12:34 AM IST
अमर उजाला/ब्यूरो, मुजफ्फरनगर
अमर उजाला/ब्यूरो, मुजफ्फरनगर Updated Wed, 21 Nov 2018 12:34 AM IST
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Volleyball fights have been awarded for hanging
हत्यारों को जेल लेकर जाती पुलिस। - फोटो : अमर उजाला
छोटी सी बात को लेकर बढ़े झगड़े कई बार परिवारों को बर्बाद कर देते हैं। शाहपुर के गांव हरसौली में नौ साल पहले ऐसी ही एक वारदात हुई थी। वॉलीबाल खेलने के दौरान हुई कहासुनी ने इतना तूल पकड़ा कि हमले और फायरिंग में नसीम की मौत हो गई। जबकि चार लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। पुलिस ने दोनों पक्षों का मुकदमा दर्ज कर न्यायालय में चार्जशीट दाखिल की। मुकदमे में अदालत फैसला सुना चुकी है। एक पक्ष के सात लोगों को फांसी की सजा मिली, जबकि दूसरे पक्ष के तीन लोगों को दस-दस वर्ष का सश्रम कारावास दिया गया है।  
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शाहपुर थाना क्षेत्र के गांव हरसौली में वॉलीबाल के मैदान में रोजमर्रा की तरह नसीम अपने भाई खलील के साथ मैच खेल रहा था। गांव के ही सादिक से खेलते वक्त उनका झगड़ा हो गया। ग्रामीणों ने समझा बुझाकर उन्हें घर भेज दिया, मगर सादिक का गुस्सा शांत नहीं हुआ। घटना के सात दिन बाद 25 फरवरी 2010 को सादिक ने अपने भाई शाहिद के अलावा सरफराज, अरशद, राशिद, फारूख, मुमताज को साथ लेकर नसीम के घर पर हमला कर दिया।
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फायरिंग में नसीम की गोली लगने से मौत गई और उसके भाई खलील, रैय्यान और शाकिर गंभीर रूप से घायल हो गए। वारदात ने ऐसा तूल पकड़ा कि दोनों पक्षों ने गंभीर धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कराई। नसीम के भाई इरफान की ओर से दर्ज मुकदमे में उक्त सात आरोपी बनाए गए थे, जिन्हें कोर्ट ने मंगलवार को फांसी की सजा सुनाई है। जिस पक्ष को फांसी जैसी कड़ी सजा मिली, उनकी ओर से भी हमले की घटना को लेकर क्रास मुकदमा दर्ज कराया गया था।
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सरफराज के पिता शौकत अली की ओर से मृतक नसीम के अलावा खलील, रैय्यान और शाकिर के खिलाफ यह रिपोर्ट लिखी गई थी। पुलिस ने तफतीश के बाद दोनों मामलों में चार्जशीट दाखिल की। आठ साल से ज्यादा वक्त तक मामले की सुनवाई चली। गवाह कोर्ट में पेश हुए और सजा मुकर्रर हो गई। 14 नवंबर को एडीजे-11 राजेश भारद्वाज की कोर्ट ने दोनों पक्षों को दोषी करार दिया गया। उसी दिन मृतक नसीम के भाईयों खलील, रैय्यान और भतीजे शारिक को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।

सोमवार को अदालत ने तीनों को दस-दस साल की सजा सुनाई। मंगलवार को नसीम हत्याकांड में न्यायालय ने दोषी ठहराए गए हरसौली गांव के सात लोगों को फांसी की सजा सुनाई है। वॉलीबाल खेलने के झगड़े में समझाने बुझाने के बाद भी गुस्से की ज्वाला में एक दूसरे की जान का दुश्मन बनने पर नसीम की जान चली गई, जबकि दस लोगों को सजा मिली है।  

मृत्युदंड पाने वालों में दो सगे भाई
शाहपुर। फरवरी 2010 से ही नसीम हत्याकांड के सात दोषी जेल में बंद हैं। अदालत से फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद उनके हरसौली स्थित घर में मातम पसरा है। नाते-रिश्तेदारों की भीड़ लगी है। कोई कुछ भी कहने की स्थिति में नहीं है। सात लोगों में दो सगे भाई हैं, जिनमें इकबाल के बेटे शाहिद और सादिक हैं। वॉलीबाल खेलने की उम्र में अपराध की वारदात से इनकी जिंदगी की नौ साल सलाखों के पीछे ही बीत गए। जमानत का हर प्रयास नाकाम रहा।  

नसीम के भाई बोले, कुदरत ने किया इंसाफ
शाहपुर। अदालत का फैसला आने के बाद नसीम पुत्र समसुद्दीन के घर परिवार के लोग जमा हो गए। इस मुकदमे के वादी इरफान ने कहा कि कुदरत ने इंसाफ किया है। खेलते हुए आपस में कहासुनी कोई बड़ी बात नहीं थी, मगर हमला कर मेरे भाई नसीम को मार दिया गया। उधर, नसीम की मां वकीला भावुक हो गई। वकीला ने कहा, सच की जीत हुई और हमें न्याय मिला। बेटे नसीम को खोने का गम ताउम्र रहेगा।


सात भाइयों में नसीम खेती-बाड़ी करता था। उसके भाइयों मोहम्मद इकबाल, इमरान और सलीम ने कहा कि नसीम की हत्यारों की सजा बरकरार रखने को हाई कोर्ट तक पैरवी करेंगे। वहीं, नसीम हत्याकांड में सजा सुनाए जाने को लेकर एडीजे कोर्ट-11 के बाहर हरसौली के ग्रामीणों की भीड़ रही। फांसी की सजा आने के बाद सन्नाटा पसर गया। नसीम के हत्यारों के चेहरे पीले पड़ गए। कड़ी सुरक्षा में उन्हें कारागार पहुंचाया गया।
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