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टीम ने खंगाली घपले की जड़ें

Sat, 20 Feb 2016 12:28 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
ब्यूरो / अमर उजाला, मुजफ्फरनगर Updated Sat, 20 Feb 2016 12:28 AM IST
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The team reconstructed the roots of scandal
मुजफ्फरनगर। जिला स्तर पर गठित तीन कमेटियों को जांच में सहयोग नहीं करने के बाद शांति देवी जैन ग्रुप के चार कॉलेजों में गए 90 लाख रुपये की छात्रवृत्ति वितरण में घपले के मामले में लखनऊ से आई जांच टीम ने जांच-पड़ताल की। सीडीओ की संस्तुति के बाद लखनऊ से यहां पहुंची टीम ने सारा रिकार्ड खंगाला है।
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शांतिदेवी जैन ग्रुप की जिले में चार शिक्षण संस्थाएं हैं। इनमें शांतिदेवी जैन डिग्री कॉलेज, शांतिदेवी बीएड कॉलेज, शांतिदेवी जैन टेक्नोलाजी और मुजफ्फरनगर इंस्टीट्यूट शामिल हैं।
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कुछ माह पूर्व विद्यालय के छात्रों ने डीएम ऑफिस पर प्रदर्शन कर आरोप लगाया था कि उनके फर्जी खाते खोलकर प्रतिपूर्ति शुल्क का पैसा हड़प लिया गया। चारों कॉलेजों को समाज कल्याण विभाग ने छात्रवृत्ति और प्रतिपूर्ति शुल्क के रूप में लगभग 90 लाख रुपये जारी किया था।
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डीएम ने जिलेभर के समस्त स्कूलों को जारी प्रतिपूर्ति शुल्क की जांच के लिए एक कमेटी गठित की। इस कमेटी में अधिशासी अभियंता ड्रेनेज खंड अशोक राणा और अधिशासी अभियंता गंगनहर मनोज साहू को शामिल किया गया।
सभी कॉलेजों की जांच हुई, लेकिन शांतिदेवी जैन ग्रुप के किसी भी कॉलेज ने रिकार्ड नहीं दिखाया गया।

विभिन्न कॉलेजों में जो बच्चे पढ़ाई पूरे किए बिना कॉलेज छोड़ गए, ऐसे बच्चों का लगभग 32 लाख रुपया कॉलेजों ने वापस कर दिया। तत्कालीन जिला समाज कल्याण अधिकारी गुप्ता और वर्तमान समाज कल्याण अधिकारी पीपी पांडेय को भी रिकार्ड नहीं दिखाया गया।

डीएम ने इसके बाद जिला परियोजना अधिकारी वीपी श्रीवास्तव की अध्यक्षता में जांच कमेटी बनाई। इस जांच कमेटी को जब रिकार्ड नहीं दिखाया तो कमेटी ने इस प्रकरण की मजिस्ट्रेटी जांच और प्रबंधतंत्र के खिलाफ एफआईआर की संस्तुति की। इसी बीच सीडीओ के निर्देश पर मामला शासन को भी भेज दिया गया। शासन स्तर से तीन अधिकारियों की एक कमेटी गठित की गई।

वरिष्ठ संपरीक्षा अधिकारी अबुल फजल, गजेंद्र द्विवेदी और लेखा परीक्षक नीरज मजीठिया शामिल किए गए। टीम ने समाज कल्याण विभाग से समस्त रिकार्ड लेने के बाद कॉलेज का रिकार्ड चेक किया। रिपोर्ट शासन को दी जाएगी। पीडी वीपी श्रीवास्तव का कहना है कि कॉलेज की ओर से उन्हें कोई रिकार्ड नहीं दिखाया गया। रिपोर्ट डीएम को भेज दी गई थी।

पीडी को दोबारा जांच दी गई : डीएम
डीएम निखिलचंद्र शुक्ला का कहना है कि पीडी ने उन्हें मजिस्ट्रेट जांच कराने और प्रबंधतंत्र के खिलाफ एफआईआर कराने की संस्तुति की थी। इस मामले में पीडी को दोबारा जांच देकर जांच पूरी करने के लिए कहा गया है। मजिस्ट्रेट जांच की आवश्यकता नहीं समझी गई है।


हमने कोई घोटाला नहीं किया : सुभाष
मुजफ्फरनगर। शांतिदेवी जैन प्रबंधतंत्र के सुभाष जैन का कहना है कि लखनऊ से आई जांच टीम को समस्त रिकार्ड उपलब्ध करा दिया गया है। हमने किसी प्रकार का कोई घोटाला नहीं किया है। सभी बच्चों को प्रतिपूर्ति शुल्क का पैसा दिया गया है। हमारे ऊपर जो आरोप लगाए जा रहे हैं, वह सब निराधार हैं।
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