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डॉक्टर का खरीद फरोख्त के धंधे से जुडे़ होने की आशंका
ब्यूरो/ अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
Updated Wed, 09 Sep 2015 12:49 AM IST
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मुजफ्फरनगर। नवजात एक लड़का था, लिहाजा वंश चलाने को उसके खरीदारों की भी कमी नहीं रही। खरीदार अधिक होने की वजह से उसकी बोली 50 हजार तक पहुंच गई और खरीद-फरोख्त के काले कारोबार का भंडा फूट गया।
मासूम को एक अखबार में लपेटकर रखा हुआ था। पुलिस के कब्जे में नवजात के होठ मां के ममत्व को तरस रहे थे। जिसने भी इस घटना के बारे में सुना सन्न रह गया। हर जगह बस इसी केस की चर्चा थी।
आरोपी डॉक्टर जितेंद्र चौधरी का मकान अंकित विहार में सुनसान इलाके में है। डॉक्टर के मकान में नीचे दुकान है, लेकिन दुकान पर किसी डॉक्टर या उनकी उसकी डिग्री आदि के बारे में कुछ नहीं लिखा है, इसलिए पुलिस को आशंका है कि कथित डॉक्टर झोला छाप हो सकता है।
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नवजात लड़के को जन्म देने वाली मां की क्या मजबूरी थी, यह तो पुलिस की तफ्तीश के बाद ही सामने आएगा, फिलहाल संभावना जताई जा रही है कि बिन ब्याही मां ने ही अपने इस पाप को छिपाने के लिए मासूम का सौदा कर लिया। बच्चा अठमासी है ,इसलिए पुलिस यह भी नहीं समझ पा रही कि आखिर महिला आठ माह का गर्भ किस तरह इतने दिन तक अपना गर्भ छिपाए रही।
फिलहाल पूछताछ में डॉक्टर ने युवती की पहचान पुलिस को नहीं बताई है। इस बात का भी शोर है कि आरोपी डॉक्टर ने डिलीवरी के लिए युवती से कोई रकम नहीं ली, बच्चे को बेचने से मिलने वाली रकम से ही फीस की भरपाई करने की बात तय हुई थी। संभवत: इसी वजह से युवती बच्चे को जन्म देने के बाद चली गई और डॉक्टर ने रकम बनाने के लिए नि:संतान लोगोें से संपर्क किया।
सरवट के सलीम से सौदा भी हो गया था, सलीम ज्यादा अमीर नहीं है, लेकिन उसे संतान की जरूरत थी। 20 हजार रुपये में बच्चा लेने की बात हो भी गई थी लेकिन ऐन वक्त पर डॉक्टर के ही एक परिचित बीच में आ गए और उन्होंने बच्चे की 50 हजार की बोली लगा दी।
डॉक्टर ने तुरंत बच्चा उनके हवाले कर दिया, बस यही बात बिगड़ गई और सलीम सीधे नई मंडी थाने पहुंच गया और मासूम की खरीद-फरोख्त का भंडा फोड़ दिया। पुलिस ने नवजात को कब्जे में ले लिया है और फिलहाल उसे पुलिस पहरे में नर्सरी में रखा गया है। पुलिस का कहना है कि यदि बच्चे का कोई अभिभावक सामने आता है तो नियमानुसार कार्रवाई के बाद बच्चा उन्हें सौप दिया जाएगा।
कोर्ट में अर्जी लगाएगी पुलिस
मुजफ्फरनगर। एक दिन के नवजात के लिए पुलिस को काफी माथापच्ची करनी पड़ेगी। नियम के मुताबिक लावारिस बच्चे को लेकर पुलिस कोर्ट में अर्जी दाखिल करेगी, जिसमें कोर्ट ही यह फैसला करेगी कि बच्चा किसके पास रहेगा। एक दिन के बच्चे को किसी की सुपुर्दगी में दिया जाना भी संभव नहीं है।
ऐसे में बच्चे को लंबे समय तक नर्सरी में ही रखे जाने की संभावना अधिक है। फिलहाल बच्चे का भविष्य क्या होगा कहना मुश्किल है। नियमानुसार बच्चे के लिए कोई अभिभावक या दावेदार सामने ना आने की स्थिति में उसके गोदनामे की प्रक्रिया करनी होती है। जिसमें प्रशासन योग्य परिवार को ही बच्चा देने की संस्तुति करता है।
सलीम से भी हुई पूछताछ
मुजफ्फरनगर। पुलिस ने बच्चे की खरीद-फरोख्त की सूचना देने वाले सलीम से भी पूछताछ की है। सलीम के मुताबिक डॉ जितेंद्र झोलाछाप है और उसका देहात में बड़ा नेटवर्क है।
वह पहले भी इस तरह की डिलीवरी कर बच्चों को बेच चुका है। बकौल सलीम, नर्सिंगहोम में काम सीखने के बाद जितेंद्र बच्चों का सौदागर बन गया था। पचेंडा रोड के अलावा, मदीना कालोनी और बागोवाली में जितेंद्र के अवैध क्लीनिक बताए गए हैं।
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मासूम को एक अखबार में लपेटकर रखा हुआ था। पुलिस के कब्जे में नवजात के होठ मां के ममत्व को तरस रहे थे। जिसने भी इस घटना के बारे में सुना सन्न रह गया। हर जगह बस इसी केस की चर्चा थी।
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आरोपी डॉक्टर जितेंद्र चौधरी का मकान अंकित विहार में सुनसान इलाके में है। डॉक्टर के मकान में नीचे दुकान है, लेकिन दुकान पर किसी डॉक्टर या उनकी उसकी डिग्री आदि के बारे में कुछ नहीं लिखा है, इसलिए पुलिस को आशंका है कि कथित डॉक्टर झोला छाप हो सकता है।
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नवजात लड़के को जन्म देने वाली मां की क्या मजबूरी थी, यह तो पुलिस की तफ्तीश के बाद ही सामने आएगा, फिलहाल संभावना जताई जा रही है कि बिन ब्याही मां ने ही अपने इस पाप को छिपाने के लिए मासूम का सौदा कर लिया। बच्चा अठमासी है ,इसलिए पुलिस यह भी नहीं समझ पा रही कि आखिर महिला आठ माह का गर्भ किस तरह इतने दिन तक अपना गर्भ छिपाए रही।
फिलहाल पूछताछ में डॉक्टर ने युवती की पहचान पुलिस को नहीं बताई है। इस बात का भी शोर है कि आरोपी डॉक्टर ने डिलीवरी के लिए युवती से कोई रकम नहीं ली, बच्चे को बेचने से मिलने वाली रकम से ही फीस की भरपाई करने की बात तय हुई थी। संभवत: इसी वजह से युवती बच्चे को जन्म देने के बाद चली गई और डॉक्टर ने रकम बनाने के लिए नि:संतान लोगोें से संपर्क किया।
सरवट के सलीम से सौदा भी हो गया था, सलीम ज्यादा अमीर नहीं है, लेकिन उसे संतान की जरूरत थी। 20 हजार रुपये में बच्चा लेने की बात हो भी गई थी लेकिन ऐन वक्त पर डॉक्टर के ही एक परिचित बीच में आ गए और उन्होंने बच्चे की 50 हजार की बोली लगा दी।
डॉक्टर ने तुरंत बच्चा उनके हवाले कर दिया, बस यही बात बिगड़ गई और सलीम सीधे नई मंडी थाने पहुंच गया और मासूम की खरीद-फरोख्त का भंडा फोड़ दिया। पुलिस ने नवजात को कब्जे में ले लिया है और फिलहाल उसे पुलिस पहरे में नर्सरी में रखा गया है। पुलिस का कहना है कि यदि बच्चे का कोई अभिभावक सामने आता है तो नियमानुसार कार्रवाई के बाद बच्चा उन्हें सौप दिया जाएगा।
कोर्ट में अर्जी लगाएगी पुलिस
मुजफ्फरनगर। एक दिन के नवजात के लिए पुलिस को काफी माथापच्ची करनी पड़ेगी। नियम के मुताबिक लावारिस बच्चे को लेकर पुलिस कोर्ट में अर्जी दाखिल करेगी, जिसमें कोर्ट ही यह फैसला करेगी कि बच्चा किसके पास रहेगा। एक दिन के बच्चे को किसी की सुपुर्दगी में दिया जाना भी संभव नहीं है।
ऐसे में बच्चे को लंबे समय तक नर्सरी में ही रखे जाने की संभावना अधिक है। फिलहाल बच्चे का भविष्य क्या होगा कहना मुश्किल है। नियमानुसार बच्चे के लिए कोई अभिभावक या दावेदार सामने ना आने की स्थिति में उसके गोदनामे की प्रक्रिया करनी होती है। जिसमें प्रशासन योग्य परिवार को ही बच्चा देने की संस्तुति करता है।
सलीम से भी हुई पूछताछ
मुजफ्फरनगर। पुलिस ने बच्चे की खरीद-फरोख्त की सूचना देने वाले सलीम से भी पूछताछ की है। सलीम के मुताबिक डॉ जितेंद्र झोलाछाप है और उसका देहात में बड़ा नेटवर्क है।
वह पहले भी इस तरह की डिलीवरी कर बच्चों को बेच चुका है। बकौल सलीम, नर्सिंगहोम में काम सीखने के बाद जितेंद्र बच्चों का सौदागर बन गया था। पचेंडा रोड के अलावा, मदीना कालोनी और बागोवाली में जितेंद्र के अवैध क्लीनिक बताए गए हैं।