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बंदी ने फेसबुक पर अपलोड की ‘जेल की सेल्फी’
ब्यूरो, अमर उजाला/मुजफ्फरनगर
Updated Sat, 10 Mar 2018 11:15 PM IST
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साथियों के साथ फेसबुक पर अपलोड बंदी की सेल्फी।
- फोटो : अमर उजाला
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जेल के भीतर ली गई तीन बंदियों की सेल्फी के सोशल मीडिया पर वायरल होने का मामला सामने आया है। इस सेल्फी को लेकर दावा किया जा रहा है कि हत्या के प्रयास के मामले में जिला कारागार में निरुद्ध बंदी ने बैरक में अपने साथी बंदियों संग सेल्फी ली और उसे अपनी फेसबुक पर अपलोड़ कर दिया।
इस मामले में जेलर एके त्रिपाठी की ओर से नईमंडी कोतवाली में मोबाइल सेल्फी के आरोपी विजय, मोहित और सचिन के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया है। बड़ा सवाल यही है कि यदि ये सेल्फी जेल की ही है तो कैसे बंदियों तक मोबाइल फोन पहुंचा, इस पर अफसरों को जवाब देते नहीं बन रहा। एडीजी कारागार ने जेल अधीक्षक से प्रकरण की रिपोर्ट तलब की है।
यह सेल्फी कब और कैसे ली गई, इसका खुलासा नहीं हुआ है, लेकिन यह सात मार्च को वायरल हुई। सोशल मीडिया पर इसके वायरल होने के बाद आनन फानन में इसे फेसबुक से हटा भी दिया गया। तितावी थाना क्षेत्र के गांव कादीखेड़ा निवासी विजय मलिक पुत्र नरेश मलिक हत्या के प्रयास के मामले में जिला कारागार में बंद है।
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उसने सेल्फी में जेल बैरक में बैठे हुए अपनी सेल्फी खींची। इसमें उसके साथ दो अन्य बंदी भी नजर आ रहे है और पीछे कुछ लोग और बैठे दिखाए दे रहे हैं। सेल्फी प्रकरण की गूंज लखनऊ तक पहुंच गई। शासन के निर्देश पर तत्काल जिला कारागार में तलाशी अभियान चलाया गया।
सूत्रों की माने तो जिस बैरक नंबर 16 में विजय बंद है, उसके बाहर से जेल प्रशासन को जिओ का एंड्रायड फोन बरामद हुआ। हालांकि जेल अधिकारी इससे इंकार कर रहे हैं। जेलर एके त्रिपाठी की ओर से नईमंडी कोतवाली में मोबाइल सेल्फी के आरोपी विजय, मोहित, सचिन और नंदू के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी है।
त्रिपाठी ने बताया कि अभी तक की जांच में सामने आया है कि जेल से रिहा हुए नंदू नामक युवक ने विजय को फोन जेल की दीवारों के बाहर से फेंका था। नंदू को भी मुकदमे में आरोपी बनाया गया है। बता दें, जिला कारागार में औचक निरीक्षण के दौरान कई बार मोबाइल फोन और फर्जी आइडी पर लिए गए सिम मिल चुके हैं। पपीते, सेव और अन्य फलों में छिपाकर सिम को बंदियों तक पहुंचाया जाता है।
आनन-फानन में हटाई गई सेल्फी
मुजफ्फरनगर। सेल्फी क्रेज में फंसे बंदियों को जैसे ही वायरल हुए फोटो से मचे हड़कंप की जानकारी मिली, उन्होंने फेसबुक पर अपलोड़ किया बैरक का फोटो डिलीट कर दिया। सवाल ये है कि जेल में बंदियों का नेटवर्क कितना तेज है। सेल्फी वायरल की जानकारी कैसे आरोपियों तक पहुंच गई। बताते चलें कि पांच मार्च को चेकिंग के दौरान अधिवक्ता आमिर खान उर्फ आमिर त्यागी पुत्र याकूब खान निवासी गांव बसधाड़ा को दो मोबाइल फोन के साथ बंदी रक्षकों ने पकड़ा था। आरोपी अधिवक्ता के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज हो चुका है।
पहले भी खींची जेल में सेल्फी
मुजफ्फरनगर। जिला कारागार से एक और सेल्फी का फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। दो फरवरी को जेल के बैरक में बैठे बंदियों का सामूहिक फोटो एक बंदी की फेसबुक पर अपलोड़ किया गया। विजय मलिक की सेल्फी पर मचे हड़कंप के बाद दूसरी सेल्फी का मामला भी सामने आने से जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर कई सवाल खड़े हो गए हैं।
कारागार में फोन नहीं पकड़ पा रहा है जैमर
मुजफ्फरनगर। जेल में करोड़ों रुपये की लागत से लगा जैमर भी मोबाइल और सिम के प्रयोग को नहीं पकड़ पा रहा है। करीब दो साल पहले प्रदेश सरकार ने मुजफ्फरनगर जेल में जैमर की व्यवस्था की थी। 24 घंटे जैमर की सक्रियता के लिए जेनरेटर से बिजली आपूर्ति का प्रबंध किया गया था। यह आश्चर्यजनक है कि आधुनिक जैमर भी जेल में मोबाइल के प्रयोग को नहीं पकड़ पा रहे हैं।
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इस मामले में जेलर एके त्रिपाठी की ओर से नईमंडी कोतवाली में मोबाइल सेल्फी के आरोपी विजय, मोहित और सचिन के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया है। बड़ा सवाल यही है कि यदि ये सेल्फी जेल की ही है तो कैसे बंदियों तक मोबाइल फोन पहुंचा, इस पर अफसरों को जवाब देते नहीं बन रहा। एडीजी कारागार ने जेल अधीक्षक से प्रकरण की रिपोर्ट तलब की है।
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यह सेल्फी कब और कैसे ली गई, इसका खुलासा नहीं हुआ है, लेकिन यह सात मार्च को वायरल हुई। सोशल मीडिया पर इसके वायरल होने के बाद आनन फानन में इसे फेसबुक से हटा भी दिया गया। तितावी थाना क्षेत्र के गांव कादीखेड़ा निवासी विजय मलिक पुत्र नरेश मलिक हत्या के प्रयास के मामले में जिला कारागार में बंद है।
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उसने सेल्फी में जेल बैरक में बैठे हुए अपनी सेल्फी खींची। इसमें उसके साथ दो अन्य बंदी भी नजर आ रहे है और पीछे कुछ लोग और बैठे दिखाए दे रहे हैं। सेल्फी प्रकरण की गूंज लखनऊ तक पहुंच गई। शासन के निर्देश पर तत्काल जिला कारागार में तलाशी अभियान चलाया गया।
सूत्रों की माने तो जिस बैरक नंबर 16 में विजय बंद है, उसके बाहर से जेल प्रशासन को जिओ का एंड्रायड फोन बरामद हुआ। हालांकि जेल अधिकारी इससे इंकार कर रहे हैं। जेलर एके त्रिपाठी की ओर से नईमंडी कोतवाली में मोबाइल सेल्फी के आरोपी विजय, मोहित, सचिन और नंदू के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी है।
त्रिपाठी ने बताया कि अभी तक की जांच में सामने आया है कि जेल से रिहा हुए नंदू नामक युवक ने विजय को फोन जेल की दीवारों के बाहर से फेंका था। नंदू को भी मुकदमे में आरोपी बनाया गया है। बता दें, जिला कारागार में औचक निरीक्षण के दौरान कई बार मोबाइल फोन और फर्जी आइडी पर लिए गए सिम मिल चुके हैं। पपीते, सेव और अन्य फलों में छिपाकर सिम को बंदियों तक पहुंचाया जाता है।
आनन-फानन में हटाई गई सेल्फी
मुजफ्फरनगर। सेल्फी क्रेज में फंसे बंदियों को जैसे ही वायरल हुए फोटो से मचे हड़कंप की जानकारी मिली, उन्होंने फेसबुक पर अपलोड़ किया बैरक का फोटो डिलीट कर दिया। सवाल ये है कि जेल में बंदियों का नेटवर्क कितना तेज है। सेल्फी वायरल की जानकारी कैसे आरोपियों तक पहुंच गई। बताते चलें कि पांच मार्च को चेकिंग के दौरान अधिवक्ता आमिर खान उर्फ आमिर त्यागी पुत्र याकूब खान निवासी गांव बसधाड़ा को दो मोबाइल फोन के साथ बंदी रक्षकों ने पकड़ा था। आरोपी अधिवक्ता के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज हो चुका है।
पहले भी खींची जेल में सेल्फी
मुजफ्फरनगर। जिला कारागार से एक और सेल्फी का फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। दो फरवरी को जेल के बैरक में बैठे बंदियों का सामूहिक फोटो एक बंदी की फेसबुक पर अपलोड़ किया गया। विजय मलिक की सेल्फी पर मचे हड़कंप के बाद दूसरी सेल्फी का मामला भी सामने आने से जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर कई सवाल खड़े हो गए हैं।
कारागार में फोन नहीं पकड़ पा रहा है जैमर
मुजफ्फरनगर। जेल में करोड़ों रुपये की लागत से लगा जैमर भी मोबाइल और सिम के प्रयोग को नहीं पकड़ पा रहा है। करीब दो साल पहले प्रदेश सरकार ने मुजफ्फरनगर जेल में जैमर की व्यवस्था की थी। 24 घंटे जैमर की सक्रियता के लिए जेनरेटर से बिजली आपूर्ति का प्रबंध किया गया था। यह आश्चर्यजनक है कि आधुनिक जैमर भी जेल में मोबाइल के प्रयोग को नहीं पकड़ पा रहे हैं।