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फ्लैट दिलाने के नाम पर 30 लाख की ठगी
ब्यूरो/ अमर उजाला, मुफ्फरनगर
Updated Mon, 24 Aug 2015 12:34 AM IST
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शामली। लखनऊ में फ्लैट दिलाने के नाम पर एक रिटायर फौजी से 30.40 लाख रुपये ठग लिए। छानबीन कर पुलिस ने हाईटेक अंदाज में ठगी को अंजाम देने वाले आरोपी को दबोच लिया। हालांकि पुलिस रकम बरामद नहीं करवा सकी है।
रविवार को एसपी कार्यालय पर आरोपी सुभाष शर्मा पुत्र ज्ञानदास शर्मा निवासी ग्राम बेलकुर थाना गगाह जिला गोरखपुर (हाल निवासी मोहल्ला ढेड़ी बाजार बलरामपुर) को मीडिया के सामने पेश किया गया। एसपी विजय भूषण ने बताया कि बाबरी थाना क्षेत्र के गांव हिरनवाड़ा निवासी रिटायर फौजी सहेंद्र सिंह ने शिकायती पत्र देकर फ्लैट दिलाने के नाम पर 30.40 लाख की ठगी के बारे में बताया था।
इतनी रकम देने के बाद भी उसे फ्लैट नहीं मिला तथा 10 लाख रुपये की और मांग की गई। मामले की जांच केे लिए सर्विलांस टीम को लगाया गया। जिन नंबरों से सहेंद्र को कॉल की गई थीं, उनकी आईडी निकलवाई गई। इसके बाद पता चला कि उक्त नंबर सुभाष शर्मा चला रहा है।
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पुलिस ने सहेंद्र से कॉल कराकर 10 लाख रुपये देने के लिए सुभाष को शामली बुलाया। शनिवार रात रेलवे स्टेशन के पास से उसे गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपी के कब्जे से दो मोबाइल और चार सिमकार्ड बरामद हुए हैं।
ऐसे अंजाम दी ठगी :
सहेंद्र के मोबाइल पर अक्तूबर 2011 में आशा देवी नामक महिला की कॉल आई। उसने गोमतीनगर लखनऊ में आवासीय योजना के तहत 200-200 वर्ग गज के फ्लैट के बारे में बताया और कहा बुकिंग कराकर मार्च 2015 तक 25 लाख रुपये जमा करने पर फ्लैट मिलेंगे। महिला ने आवासीय योजना में 10 लोगों की कमेटी के नाम भी बताए।
इसी बीच सीमा चौधरी नामक महिला कॉल करने लगी और उसने खुद को लखनऊ निशातगंज स्थित एसबीआई शाखा में बैंक कर्मी बताया। पहले तो सहेंद्र से एसबीआई शाखा अंसारी रोड मुजफ्फरनगर से एक हजार रुपये तथा 925 रुपये पंजीकरण के लिए जमा कराए। फिर अलग-अलग खातों में जुलाई 2015 तक सहेंद्र से 30 लाख 40 हजार 261 रुपये जमा करा लिए।
जुलाई 2015 के प्रथम सप्ताह में सहेंद्र को पहचानपत्र, बैंक पासबुक और अन्य कागजात लेकर लखनऊ बुलाया। सहेंद्र बेटे मोहित और दोस्त कामिल नेता के साथ लखनऊ गया, तो वहां जाकर पता चला सीमा चौधरी नाम की कोई महिला बैंक में कर्मी नहीं है। लखनऊ विभूति खंड में जहां समिति का कार्यालय बताया, वह भी नहीं मिला, तो सहेंद्र को धोखाधड़ी का अहसास हुआ।
वायस चेंजर का करता था इस्तेमाल
आरोपी सुभाष इतना शातिर है कि वह मोबाइल में वॉयस चेंजर के जरिये खुद ही महिला की आवाज में सहेंद्र से बात करता था। कभी अपना नाम आशा, तो कभी विमला और सीमा चौधरी बताता था। रात के वक्त सहेंद्र को कॉल करके मीठी और लुभावनी बातें कर गुमराह करता था।
रुपये बरामद नहीं कर सकी पुलिस
आरोपी सुभाष शर्मा को तो पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया, मगर सहेंद्र से की गई ठगी की रकम में से एक रुपया भी बरामद नहीं हुआ। गिरफ्तार सुभाष से जब एसपी ने पूछा कि पैसा कहां गया, तो उसने बताया कि टुकड़ों में आया था, वैसे ही खर्च हो गया। सुभाष पेशे से फर्नीचर का काम करता है और परिवार में दो बच्चे हैं।
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रविवार को एसपी कार्यालय पर आरोपी सुभाष शर्मा पुत्र ज्ञानदास शर्मा निवासी ग्राम बेलकुर थाना गगाह जिला गोरखपुर (हाल निवासी मोहल्ला ढेड़ी बाजार बलरामपुर) को मीडिया के सामने पेश किया गया। एसपी विजय भूषण ने बताया कि बाबरी थाना क्षेत्र के गांव हिरनवाड़ा निवासी रिटायर फौजी सहेंद्र सिंह ने शिकायती पत्र देकर फ्लैट दिलाने के नाम पर 30.40 लाख की ठगी के बारे में बताया था।
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इतनी रकम देने के बाद भी उसे फ्लैट नहीं मिला तथा 10 लाख रुपये की और मांग की गई। मामले की जांच केे लिए सर्विलांस टीम को लगाया गया। जिन नंबरों से सहेंद्र को कॉल की गई थीं, उनकी आईडी निकलवाई गई। इसके बाद पता चला कि उक्त नंबर सुभाष शर्मा चला रहा है।
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पुलिस ने सहेंद्र से कॉल कराकर 10 लाख रुपये देने के लिए सुभाष को शामली बुलाया। शनिवार रात रेलवे स्टेशन के पास से उसे गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपी के कब्जे से दो मोबाइल और चार सिमकार्ड बरामद हुए हैं।
ऐसे अंजाम दी ठगी :
सहेंद्र के मोबाइल पर अक्तूबर 2011 में आशा देवी नामक महिला की कॉल आई। उसने गोमतीनगर लखनऊ में आवासीय योजना के तहत 200-200 वर्ग गज के फ्लैट के बारे में बताया और कहा बुकिंग कराकर मार्च 2015 तक 25 लाख रुपये जमा करने पर फ्लैट मिलेंगे। महिला ने आवासीय योजना में 10 लोगों की कमेटी के नाम भी बताए।
इसी बीच सीमा चौधरी नामक महिला कॉल करने लगी और उसने खुद को लखनऊ निशातगंज स्थित एसबीआई शाखा में बैंक कर्मी बताया। पहले तो सहेंद्र से एसबीआई शाखा अंसारी रोड मुजफ्फरनगर से एक हजार रुपये तथा 925 रुपये पंजीकरण के लिए जमा कराए। फिर अलग-अलग खातों में जुलाई 2015 तक सहेंद्र से 30 लाख 40 हजार 261 रुपये जमा करा लिए।
जुलाई 2015 के प्रथम सप्ताह में सहेंद्र को पहचानपत्र, बैंक पासबुक और अन्य कागजात लेकर लखनऊ बुलाया। सहेंद्र बेटे मोहित और दोस्त कामिल नेता के साथ लखनऊ गया, तो वहां जाकर पता चला सीमा चौधरी नाम की कोई महिला बैंक में कर्मी नहीं है। लखनऊ विभूति खंड में जहां समिति का कार्यालय बताया, वह भी नहीं मिला, तो सहेंद्र को धोखाधड़ी का अहसास हुआ।
वायस चेंजर का करता था इस्तेमाल
आरोपी सुभाष इतना शातिर है कि वह मोबाइल में वॉयस चेंजर के जरिये खुद ही महिला की आवाज में सहेंद्र से बात करता था। कभी अपना नाम आशा, तो कभी विमला और सीमा चौधरी बताता था। रात के वक्त सहेंद्र को कॉल करके मीठी और लुभावनी बातें कर गुमराह करता था।
रुपये बरामद नहीं कर सकी पुलिस
आरोपी सुभाष शर्मा को तो पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया, मगर सहेंद्र से की गई ठगी की रकम में से एक रुपया भी बरामद नहीं हुआ। गिरफ्तार सुभाष से जब एसपी ने पूछा कि पैसा कहां गया, तो उसने बताया कि टुकड़ों में आया था, वैसे ही खर्च हो गया। सुभाष पेशे से फर्नीचर का काम करता है और परिवार में दो बच्चे हैं।