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गले नहीं उतर रही पुलिस की कहानी
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, मुजफ्फरनगर
Updated Sun, 17 Jul 2016 12:12 AM IST
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Arif hijack of Jula
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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मुजफ्फरनगर। बसपा प्रत्याशी आरिफ जौला के कथित अपहरण कांड का सच सामने आया तो लोग हैरान रह गए, किसी को विश्वास नहीं हुआ कि ऐसा भी हो सकता है। प्रत्याशी के खुद ही जाने की बात गले नहीं उतर रही। उनके करीबियों का कहना है कि पुलिस ने दबाव में लेकर मामले को अपने तरीके से पेश किया है। हालांकि लोगों में यह भी चर्चा है कि फिरौती की मोटी रकम चुकाने के बाद ही आरिफ की वापसी हुई है।
बुढ़ाना के बसपा प्रत्याशी आरिफ जौला मंगलवार को उस समय अचानक लापता हो गए थे, जब वह दिल्ली से अपने गांव जौला लौट रहे थे। उनकी स्कॉर्पियो लावारिस हालत में मेरठ के कंकरखेड़ा के डाबका गांव के पास खड़ी मिली थी। प्रत्याशी के अपहरण की जानकारी सामने आते ही पुलिस में अफरातफरी मच गई। कई टीमें मामले के खुलासे में जुटी हुई थीं। शनिवार सुबह पुलिस ने खुलासा किया कि आरिफ खुद ही दिल्ली अपने घर पहुंच गए। पुलिस पर भरोसा करें तो आरिफ का किसी ने अपहरण नहीं किया। वह पारिवारिक कारणों से उत्पन्न तनाव के चलते खुद ही एकांत में चले गए थे। पुलिस का यह खुलासा लोगों के गले नहीं उतर रहा।
इस मामले में उनका कहना है कि पुलिस ने आरिफ को दबाव में लेकर अपने हिसाब से कहानी गढ़ दी। हालांकि कुछ लोग दबी जुबान से यह चर्चा कर रहे हैं कि मोटी फिरौती की मोटी रकम चुकाने के बाद ही आरिफ की वापसी हुई है। परिवार के लोगों को यह संतोष जरूर हुआ कि आरिफ सकुशल लौट आया है।
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खुलासे के बाद बहनजी ने किया आउट
मुजफ्फरनगर। जिलाध्यक्ष कमल गौतम ने पार्टी कार्यालय पर प्रेस कांफ्रेंस बुलाई और कहा कि बुढ़ाना विधानसभा प्रत्याशी आरिफ पांच दिन पहले अचानक लापता हो गए थे। इनके परिवार के लोग भी अपहरण होने का दावा कर रहे थे।
पार्टी भी इस पर भरोसा कर रही थी, लेकिन शनिवार को मामले का खुलासा होने पर पता चला कि वह पारिवारिक कारणों से स्वयं अपनी मर्जी से कहीं गए थे, उनका किसी ने कोई अपहरण नहीं किया। प्रत्याशी के इस कार्य से पार्टी की छवि खराब हुई है। बहनजी के निर्देश पर तत्काल आरिफ का टिकट काटने के साथ ही उन्हें बसपा की प्राथमिक सदस्यता से भी निष्कासित कर दिया गया है।
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बुढ़ाना के बसपा प्रत्याशी आरिफ जौला मंगलवार को उस समय अचानक लापता हो गए थे, जब वह दिल्ली से अपने गांव जौला लौट रहे थे। उनकी स्कॉर्पियो लावारिस हालत में मेरठ के कंकरखेड़ा के डाबका गांव के पास खड़ी मिली थी। प्रत्याशी के अपहरण की जानकारी सामने आते ही पुलिस में अफरातफरी मच गई। कई टीमें मामले के खुलासे में जुटी हुई थीं। शनिवार सुबह पुलिस ने खुलासा किया कि आरिफ खुद ही दिल्ली अपने घर पहुंच गए। पुलिस पर भरोसा करें तो आरिफ का किसी ने अपहरण नहीं किया। वह पारिवारिक कारणों से उत्पन्न तनाव के चलते खुद ही एकांत में चले गए थे। पुलिस का यह खुलासा लोगों के गले नहीं उतर रहा।
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इस मामले में उनका कहना है कि पुलिस ने आरिफ को दबाव में लेकर अपने हिसाब से कहानी गढ़ दी। हालांकि कुछ लोग दबी जुबान से यह चर्चा कर रहे हैं कि मोटी फिरौती की मोटी रकम चुकाने के बाद ही आरिफ की वापसी हुई है। परिवार के लोगों को यह संतोष जरूर हुआ कि आरिफ सकुशल लौट आया है।
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खुलासे के बाद बहनजी ने किया आउट
मुजफ्फरनगर। जिलाध्यक्ष कमल गौतम ने पार्टी कार्यालय पर प्रेस कांफ्रेंस बुलाई और कहा कि बुढ़ाना विधानसभा प्रत्याशी आरिफ पांच दिन पहले अचानक लापता हो गए थे। इनके परिवार के लोग भी अपहरण होने का दावा कर रहे थे।
पार्टी भी इस पर भरोसा कर रही थी, लेकिन शनिवार को मामले का खुलासा होने पर पता चला कि वह पारिवारिक कारणों से स्वयं अपनी मर्जी से कहीं गए थे, उनका किसी ने कोई अपहरण नहीं किया। प्रत्याशी के इस कार्य से पार्टी की छवि खराब हुई है। बहनजी के निर्देश पर तत्काल आरिफ का टिकट काटने के साथ ही उन्हें बसपा की प्राथमिक सदस्यता से भी निष्कासित कर दिया गया है।