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टारगेट पर लाटरी के धंधेबाज
ब्यूरो, अमर उजाला/मुजफ्फरनगर।
Updated Tue, 27 Mar 2018 12:35 AM IST
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crime
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
मुजफ्फरनगर। आतंकवादी निरोधी दस्ता (एटीएस) की पकड़ में आए आतंकी फंडिंग के बड़े नेटवर्क की जड़ कहां तक फैली है, इसकी तस्दीक प्रारंभ हो गई है। लाटरी का झांसा देकर नेटवर्क में युवाओं को जोड़ा गया है। इसके चलते जिले में भी लाटरी के धंधेबाज और संदिग्ध बैंक खातों पर खुफिया एजेंसियों की टेढ़ी नजर है।
जनपद का आतंकी कनेक्शन काफी पुराना है। ऐसे में नई-पुरानी सभी गुत्थियों की पड़ताल चल रही है। एनआईए की लगातार दबिश ने भी जिले के लोगों को सकते में डाल दिया है। इस संबंध में एसपी सिटी ओमबीर सिंह ने बताया कि पुलिस अपने स्तर से जांच करने में जुटी है। पूर्व में हवाला कारोबार का जिले का नाता निकला था। ऐसे में सतर्कता बरती जा रही है।
वर्ष 2013 में सांप्रदायिक दंगों के बाद जिले की रेंज में सेटेलाइट फोन का इस्तेमाल सामने आया था। इसके बाद लगातार संदिग्ध गतिविधियों को लेकर छानबीन की गई है। वर्ष 2017 में जिले के लिए मुफीद नहीं रहा है। बांग्लादेशी आतंकी अब्दुल्ला अल मामून की गिरफ्तारी ने भी बहुत कुछ बयां किया था। इसके अलावा अंकित विहार के संदीप शर्मा का जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियों में शामिल होने के बाद जिला पूरी तरह से जांच एजेंसियों के निशाने पर आ गया। लश्कर-ए-तैयबा को आतंकी फंडिंग के मामले में जो नेटवर्क पकड़ा गया है, वह लाटरी का झांसा देकर युवाओं को जोड़ रहा था, ताकि अधिक मदद पहुंचाने के साथ कार्य में आसानी हो सके।
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दिलचस्प यह है कि जिले के बागोवाली, दधेडू, बधाईखुर्द, रथेड़ी, चरथावल क्षेत्र आदि स्थानों से बड़ी संख्या में युवा खाड़ी देशों में काम कर रहे हैं। लश्कर-ए-तैयबा की सक्रियता जांच एजेंसियों को खाड़ी देशों में अधिक मिली है। पाक में बैठे आतंकी आकाओं ने संगठन को रफ्तार देेने के लिए युवाओं को निशाना बनाया है।
एनआईए के साथ एटीएस भी जिले में ऐसे बैंक खातों की जांच कर सकती है, जो संदिग्ध हैं और उनमें बड़ा लेनदेन किया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार आतंकी संगठन ऐसे युवाओं को अपना शिकार बना रहा है जो आर्थिक रुप से कमजोर, कम पढ़े-लिखे हैं, लेकिन हुनर के बल पर कार्य करने में सक्षम है। स्थानीय खुफिया तंत्र जिले में लाटरी के धंधेबाजों की जांच करने में जुट गया है। एसपी सिटी ओमबीर सिंह ने बताया कि एटीएस और शासन स्तर से अभी कोई आदेश नहीं आए हैं, हालांकि पुलिस अपने स्तर से जांच करने में जुटी है। पूर्व में हवाला कारोबार का जिले का नाता निकला था। ऐसे में कुछ कहा नहीं जा सकता है।
आठ माह रहा था आतंकी अब्दुल्ला
मुजफ्फरनगर। बांग्लादेशी आतंकी अब्दुल्ला जिले में आठ तक छिपा रहा था। उसने सरवट के एक मदरसे में रहकर पढ़ाई की थी। इसके बाद वह देवबंद गया और वहां से अपने आतंकी आकाओं के इशारे पर चरथावल के कुुटेसरा में एक मस्जिद का इमाम बन गया था। आतंकी को पकड़ने के लिए पूरी प्लानिंग करने के बाद एटीएस ने उसे गिरफ्तार किया था। उसके पास से असम, पश्चिम बंगाल की कई फर्जी आईडी मिली थी। हालांकि उसके पासपोर्ट बनाने के मामले में जिले का नाम जुड़ा था, लेकिन उसकी तस्दीक नहीं हो सकी थी।
आतंकी फंडिंग के मददगारों पर कसी जाएगी नकेल
मुजफ्फरनगर। यूपी एटीएस के हत्थे चढ़े आतंकी फंडिंग नेटवर्क के तार जिले में भी तलाशे जा रहे हैं। आतंक के सौदागरों को जिले से भी मदद मिलती रही है। आतंकी फंडिंग और आतंकियों को पनाह के मामले में जिला बदनाम है। इसको लेकर स्थानीय खुफिया तंत्र और पुलिस महकमा हरकत में आ गया है। साथ ही जिला एनआईए के साथ एटीएस के रडार पर है।
चरथावल के गांव कुटेसरा में 6 अगस्त 2017 को एटीएस ने दबिश देकर अंसारुल बांग्ला आतंकी संगठन के सक्रिय सदस्य अब्दुल्ला अलमामून को पकड़ा था। अब्दुल्ला की गिरफ्तारी ने कई रहस्यों से पर्दा हटाया था। मुजफ्फरनगर, सहारनपुर और बिजनौर तक तफ्तीश की गई थी। एक बार फिर से जिला एटीएस के रडार पर है। लश्कर-ए-तैयबा को आतंकी फंडिंग के मामले में यहां भी जांच-पड़ताल हो सकती है। क्योंकि जिले में इसी आतंकी संगठन को हवाला कारोबार के जरिये मदद मिलती रही है। लश्कर-ए-तैयबा को आतंकी फंडिंग को लेकर सराफ अंकित गर्ग, आदिश जैन को एनआईए दबोच चुकी है।
एनआईए ने लगातार यहां दबिश देकर आतंकी फंडिंग नेटवर्क के सुराग ढूंढे हैं। एटीएस जिले में कभी भी छापेमारी कर सकती है। स्थानीय खुफिया तंत्र भी मामले में सक्रिय हो गया है। पकड़े गए युवकों का बड़ा नेटवर्क यूपी के कई जिलों के साथ बाहर भी काम कर रहा था। इसकी तस्दीक की जा रही है कि जिले में भी संदिग्ध गतिविधियों के मद्देनजर कोई व्यक्ति इनके संपर्क में तो नहीं रहा है।
इसको लेकर एटीएस और एनआईए जांच कर सकती है, जिससे व्यापारियों, खाड़ी देशों में काम करने वाले युवकों, उनके परिजनों के साथ स्वर्ण व्यापारियों में हड़कंप की स्थिति है।
अंकित-आदिश की गिरफ्तारी ने खोला था राज
मुजफ्फरनगर। सराफ बाजार के अंकित गर्ग और आदिश जैन की गिरफ्तारी ने पाकिस्तान के आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा को आतंकी फंडिंग के राज खोले थे। एनआईए ने कई रोज तक जिले में दबिश देकर जगह-जगह छानबीन की थी। मामले में दोनों सराफा के अन्य पारिवारिक सदस्यों को एनआईए ने नोटिस दिए थे। हालांकि अन्य की गिरफ्तारी नहीं हुई है। आतंकी फंडिंग में एक और सराफ जांच के दायरे में है। अहम यह है कि एनआईए ने आतंकी फंडिंग का राजफाश किया था।
राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने बीते फरवरी माह में जिले में दबिश देकर आतंकी फंडिंग के खेल का भंडाफोड़ किया था। नोटिस देने के बाद आठ फरवरी को अंकित गर्ग पुत्र नारायण दास, आदिश जैन पुत्र श्रीराम जैन को पकड़ा था। दोनों के पास करीब 15 लाख रुपयों के साथ सऊदी अरब, कतर, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात, यूएसए (अमेरिका), जापान, थाईलैंड, ओमान की करेंसी बरामद हुई थी।
इनके अलावा विदेश पिस्टल, मैग्जीन पकड़ी गई थी। दोनों सराफ अपने मुनाफे के लालच में देश के दुश्मनों को मदद देकर मजबूत करने में लगे थे। आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का मुख्य सरगना हाफिज मुहम्मद सईद है, जो मुंबई हमलों का मास्टर माइंड है। ऐसे में इस आतंकी आका, संगठन को जिले से हुई फंडिंग के मामले में एनआईए लगातार जांच कर रही है।
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जनपद का आतंकी कनेक्शन काफी पुराना है। ऐसे में नई-पुरानी सभी गुत्थियों की पड़ताल चल रही है। एनआईए की लगातार दबिश ने भी जिले के लोगों को सकते में डाल दिया है। इस संबंध में एसपी सिटी ओमबीर सिंह ने बताया कि पुलिस अपने स्तर से जांच करने में जुटी है। पूर्व में हवाला कारोबार का जिले का नाता निकला था। ऐसे में सतर्कता बरती जा रही है।
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वर्ष 2013 में सांप्रदायिक दंगों के बाद जिले की रेंज में सेटेलाइट फोन का इस्तेमाल सामने आया था। इसके बाद लगातार संदिग्ध गतिविधियों को लेकर छानबीन की गई है। वर्ष 2017 में जिले के लिए मुफीद नहीं रहा है। बांग्लादेशी आतंकी अब्दुल्ला अल मामून की गिरफ्तारी ने भी बहुत कुछ बयां किया था। इसके अलावा अंकित विहार के संदीप शर्मा का जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियों में शामिल होने के बाद जिला पूरी तरह से जांच एजेंसियों के निशाने पर आ गया। लश्कर-ए-तैयबा को आतंकी फंडिंग के मामले में जो नेटवर्क पकड़ा गया है, वह लाटरी का झांसा देकर युवाओं को जोड़ रहा था, ताकि अधिक मदद पहुंचाने के साथ कार्य में आसानी हो सके।
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दिलचस्प यह है कि जिले के बागोवाली, दधेडू, बधाईखुर्द, रथेड़ी, चरथावल क्षेत्र आदि स्थानों से बड़ी संख्या में युवा खाड़ी देशों में काम कर रहे हैं। लश्कर-ए-तैयबा की सक्रियता जांच एजेंसियों को खाड़ी देशों में अधिक मिली है। पाक में बैठे आतंकी आकाओं ने संगठन को रफ्तार देेने के लिए युवाओं को निशाना बनाया है।
एनआईए के साथ एटीएस भी जिले में ऐसे बैंक खातों की जांच कर सकती है, जो संदिग्ध हैं और उनमें बड़ा लेनदेन किया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार आतंकी संगठन ऐसे युवाओं को अपना शिकार बना रहा है जो आर्थिक रुप से कमजोर, कम पढ़े-लिखे हैं, लेकिन हुनर के बल पर कार्य करने में सक्षम है। स्थानीय खुफिया तंत्र जिले में लाटरी के धंधेबाजों की जांच करने में जुट गया है। एसपी सिटी ओमबीर सिंह ने बताया कि एटीएस और शासन स्तर से अभी कोई आदेश नहीं आए हैं, हालांकि पुलिस अपने स्तर से जांच करने में जुटी है। पूर्व में हवाला कारोबार का जिले का नाता निकला था। ऐसे में कुछ कहा नहीं जा सकता है।
आठ माह रहा था आतंकी अब्दुल्ला
मुजफ्फरनगर। बांग्लादेशी आतंकी अब्दुल्ला जिले में आठ तक छिपा रहा था। उसने सरवट के एक मदरसे में रहकर पढ़ाई की थी। इसके बाद वह देवबंद गया और वहां से अपने आतंकी आकाओं के इशारे पर चरथावल के कुुटेसरा में एक मस्जिद का इमाम बन गया था। आतंकी को पकड़ने के लिए पूरी प्लानिंग करने के बाद एटीएस ने उसे गिरफ्तार किया था। उसके पास से असम, पश्चिम बंगाल की कई फर्जी आईडी मिली थी। हालांकि उसके पासपोर्ट बनाने के मामले में जिले का नाम जुड़ा था, लेकिन उसकी तस्दीक नहीं हो सकी थी।
आतंकी फंडिंग के मददगारों पर कसी जाएगी नकेल
मुजफ्फरनगर। यूपी एटीएस के हत्थे चढ़े आतंकी फंडिंग नेटवर्क के तार जिले में भी तलाशे जा रहे हैं। आतंक के सौदागरों को जिले से भी मदद मिलती रही है। आतंकी फंडिंग और आतंकियों को पनाह के मामले में जिला बदनाम है। इसको लेकर स्थानीय खुफिया तंत्र और पुलिस महकमा हरकत में आ गया है। साथ ही जिला एनआईए के साथ एटीएस के रडार पर है।
चरथावल के गांव कुटेसरा में 6 अगस्त 2017 को एटीएस ने दबिश देकर अंसारुल बांग्ला आतंकी संगठन के सक्रिय सदस्य अब्दुल्ला अलमामून को पकड़ा था। अब्दुल्ला की गिरफ्तारी ने कई रहस्यों से पर्दा हटाया था। मुजफ्फरनगर, सहारनपुर और बिजनौर तक तफ्तीश की गई थी। एक बार फिर से जिला एटीएस के रडार पर है। लश्कर-ए-तैयबा को आतंकी फंडिंग के मामले में यहां भी जांच-पड़ताल हो सकती है। क्योंकि जिले में इसी आतंकी संगठन को हवाला कारोबार के जरिये मदद मिलती रही है। लश्कर-ए-तैयबा को आतंकी फंडिंग को लेकर सराफ अंकित गर्ग, आदिश जैन को एनआईए दबोच चुकी है।
एनआईए ने लगातार यहां दबिश देकर आतंकी फंडिंग नेटवर्क के सुराग ढूंढे हैं। एटीएस जिले में कभी भी छापेमारी कर सकती है। स्थानीय खुफिया तंत्र भी मामले में सक्रिय हो गया है। पकड़े गए युवकों का बड़ा नेटवर्क यूपी के कई जिलों के साथ बाहर भी काम कर रहा था। इसकी तस्दीक की जा रही है कि जिले में भी संदिग्ध गतिविधियों के मद्देनजर कोई व्यक्ति इनके संपर्क में तो नहीं रहा है।
इसको लेकर एटीएस और एनआईए जांच कर सकती है, जिससे व्यापारियों, खाड़ी देशों में काम करने वाले युवकों, उनके परिजनों के साथ स्वर्ण व्यापारियों में हड़कंप की स्थिति है।
अंकित-आदिश की गिरफ्तारी ने खोला था राज
मुजफ्फरनगर। सराफ बाजार के अंकित गर्ग और आदिश जैन की गिरफ्तारी ने पाकिस्तान के आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा को आतंकी फंडिंग के राज खोले थे। एनआईए ने कई रोज तक जिले में दबिश देकर जगह-जगह छानबीन की थी। मामले में दोनों सराफा के अन्य पारिवारिक सदस्यों को एनआईए ने नोटिस दिए थे। हालांकि अन्य की गिरफ्तारी नहीं हुई है। आतंकी फंडिंग में एक और सराफ जांच के दायरे में है। अहम यह है कि एनआईए ने आतंकी फंडिंग का राजफाश किया था।
राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने बीते फरवरी माह में जिले में दबिश देकर आतंकी फंडिंग के खेल का भंडाफोड़ किया था। नोटिस देने के बाद आठ फरवरी को अंकित गर्ग पुत्र नारायण दास, आदिश जैन पुत्र श्रीराम जैन को पकड़ा था। दोनों के पास करीब 15 लाख रुपयों के साथ सऊदी अरब, कतर, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात, यूएसए (अमेरिका), जापान, थाईलैंड, ओमान की करेंसी बरामद हुई थी।
इनके अलावा विदेश पिस्टल, मैग्जीन पकड़ी गई थी। दोनों सराफ अपने मुनाफे के लालच में देश के दुश्मनों को मदद देकर मजबूत करने में लगे थे। आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का मुख्य सरगना हाफिज मुहम्मद सईद है, जो मुंबई हमलों का मास्टर माइंड है। ऐसे में इस आतंकी आका, संगठन को जिले से हुई फंडिंग के मामले में एनआईए लगातार जांच कर रही है।