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चार हत्यारों को आजीवन कारावास, अगवा कर की गई थी हत्या
ब्यूरो, अमर उजाला/मुजफ्फरनगर
Updated Wed, 21 Feb 2018 11:55 PM IST
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एडीजे प्रथम गौरव कुमार श्रीवास्तव की कोर्ट ने इंद्रा कॉलोनी के चर्चित लक्ष्य हत्याकांड में चारों हत्यारों को आजीवन कारावास और दो लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। अदालत ने जुर्माने की रकम में से एक लाख रुपये पीड़ित परिवार को देने के आदेश दिए हैं।
शहर के सिविल लाइन थाने पर इंद्रा कॉलोनी में बेसिक शिक्षा विभाग में लिपिक अरविंद कुमार शर्मा पुत्र श्यामलाल शर्मा ने आठ सितंबर 2015 को अपने 11 वर्षीय बेटे लक्ष्य की गुमशुदगी दर्ज कराई थी। बताया था कि उनका बेटा लक्ष्य साइकिल लेकर घर से निकला था, मगर लौटकर नहीं आया। काफी तलाश के बाद भी उसका पता नहीं चला।
लक्ष्य शहर के एक पब्लिक स्कूल में कक्षा सात में पढ़ता था। पुलिस ने जांच-पड़ताल की। जांच के दौरान पड़ोसी विपुल, विक्की के अलावा कपिल और पंकज के नाम प्रकाश में आए। पुलिस ने सभी को पकड़कर पूछताछ की। इस पर आरोपियों ने लक्ष्य का अपहरण कर गला घोंटकर हत्या करना स्वीकार कर लिया।
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पुलिस ने 16 सितंबर 2015 को इनकी निशानदेही पर लक्ष्य के शव को रथेड़ी के जंगल से बरामद किया था। अभियुक्त विक्की की निशानदेही पर लक्ष्य की साइकिल भी उसके घर से बरामद की थी। इस मुकदमे की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश गौरव कुमार श्रीवास्तव की अदालत संख्या-1 में हुई। एडीजीसी जितेंद्र कुमार त्यागी ने कोर्ट में नौ गवाह और सबूत पेश किए।
न्यायाधीश ने दोनों पक्षों को सुनते हुए मंगलवार को अभियुक्त विपुल, कपिल, पंकज और विक्की को लक्ष्य का अपहरण कर हत्या करने का दोषी करार दिया था। बुधवार को कोर्ट ने उक्त चारों को हत्या की धारा 302 के तहत आजीवन कारावास और 30-30 रुपये जुर्माना, अपहरण की धारा 363 के तहत तीन-तीन वर्ष के कारावास और दस-दस हजार रुपये जुर्माना, साक्ष्य मिटाने की धारा 201 के तहत पांच-पांच वर्ष के कारावास और दस-दस हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
चारों को जेल भेजा
मुजफ्फरनगर। विपुल और विक्की तभी से जेल में बंद है, जबकि पंकज और कपिल को जमानत मिल गई थी। मंगलवार को दोषी करार देने के बाद कोर्ट ने सभी को जेल भेज दिया था। बुधवार को चारों को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से सजा सुनाए जाने के बाद फिर से सभी को जेल भेज दिया गया।
दुकान की रंजिश में की थी मासूम की हत्या
मुजफ्फरनगर। हत्यारों ने ढाई वर्ष पहले दुकान न देने की रंजिश में पड़ोसी अरविंद के इकलौते बेटे लक्ष्य की अपहरण कर हत्या की थी। डीजे का काम करने वाले विपुल ने पुलिस की पूछताछ में बताया था कि पड़ोसी अरविंद की एक दुकान थी, जिसे वह लेना चाहता था, मगर अरविंद ने दुकान उसे न देकर किसी अन्य को दे दी थी। इसी रंजिश में उन्होंने अरविंद के बेटे लक्ष्य का अपहरण कर हत्या कर शव को रथेड़ी के जंगल में जमीन में दबा दिया था।
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शहर के सिविल लाइन थाने पर इंद्रा कॉलोनी में बेसिक शिक्षा विभाग में लिपिक अरविंद कुमार शर्मा पुत्र श्यामलाल शर्मा ने आठ सितंबर 2015 को अपने 11 वर्षीय बेटे लक्ष्य की गुमशुदगी दर्ज कराई थी। बताया था कि उनका बेटा लक्ष्य साइकिल लेकर घर से निकला था, मगर लौटकर नहीं आया। काफी तलाश के बाद भी उसका पता नहीं चला।
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लक्ष्य शहर के एक पब्लिक स्कूल में कक्षा सात में पढ़ता था। पुलिस ने जांच-पड़ताल की। जांच के दौरान पड़ोसी विपुल, विक्की के अलावा कपिल और पंकज के नाम प्रकाश में आए। पुलिस ने सभी को पकड़कर पूछताछ की। इस पर आरोपियों ने लक्ष्य का अपहरण कर गला घोंटकर हत्या करना स्वीकार कर लिया।
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पुलिस ने 16 सितंबर 2015 को इनकी निशानदेही पर लक्ष्य के शव को रथेड़ी के जंगल से बरामद किया था। अभियुक्त विक्की की निशानदेही पर लक्ष्य की साइकिल भी उसके घर से बरामद की थी। इस मुकदमे की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश गौरव कुमार श्रीवास्तव की अदालत संख्या-1 में हुई। एडीजीसी जितेंद्र कुमार त्यागी ने कोर्ट में नौ गवाह और सबूत पेश किए।
न्यायाधीश ने दोनों पक्षों को सुनते हुए मंगलवार को अभियुक्त विपुल, कपिल, पंकज और विक्की को लक्ष्य का अपहरण कर हत्या करने का दोषी करार दिया था। बुधवार को कोर्ट ने उक्त चारों को हत्या की धारा 302 के तहत आजीवन कारावास और 30-30 रुपये जुर्माना, अपहरण की धारा 363 के तहत तीन-तीन वर्ष के कारावास और दस-दस हजार रुपये जुर्माना, साक्ष्य मिटाने की धारा 201 के तहत पांच-पांच वर्ष के कारावास और दस-दस हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
चारों को जेल भेजा
मुजफ्फरनगर। विपुल और विक्की तभी से जेल में बंद है, जबकि पंकज और कपिल को जमानत मिल गई थी। मंगलवार को दोषी करार देने के बाद कोर्ट ने सभी को जेल भेज दिया था। बुधवार को चारों को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से सजा सुनाए जाने के बाद फिर से सभी को जेल भेज दिया गया।
दुकान की रंजिश में की थी मासूम की हत्या
मुजफ्फरनगर। हत्यारों ने ढाई वर्ष पहले दुकान न देने की रंजिश में पड़ोसी अरविंद के इकलौते बेटे लक्ष्य की अपहरण कर हत्या की थी। डीजे का काम करने वाले विपुल ने पुलिस की पूछताछ में बताया था कि पड़ोसी अरविंद की एक दुकान थी, जिसे वह लेना चाहता था, मगर अरविंद ने दुकान उसे न देकर किसी अन्य को दे दी थी। इसी रंजिश में उन्होंने अरविंद के बेटे लक्ष्य का अपहरण कर हत्या कर शव को रथेड़ी के जंगल में जमीन में दबा दिया था।