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मां-बेटी की हत्या में छह को उम्रकैद, एडीजे फर्स्ट ने सुनाया निर्णय      

Thu, 16 Mar 2017 12:19 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर Updated Thu, 16 Mar 2017 12:19 AM IST
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Life imprisonment for killing mother and daughter
हत्यारों को पकड़कर ले जाती पुलिस। - फोटो : अमर उजाला
किवाना गांव के चर्चित मां-बेटी हत्याकांड में कोर्ट ने छह लोगों को उम्रकैद और जुर्माने की सजा सुनाई गई है। एडीजे प्रथम दिनेशचंद्र सिंह की कोर्ट ने इस मुकदमे का निर्णय सुनाया। साढ़े छह साल पहले जमीन के विवाद को लेकर इन लोगों ने मां-बेटी की ट्रैक्टर से कुचलकर हत्या कर दी थी।      
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अभियोजन पक्ष के अनुसार शामली जिले के कांधला थाना क्षेत्र के गांव किवाना में 20 सितंबर 2010 को रघुवीरी और उसकी बेटी राजेश देवी की ट्रैक्टर से कुचल कर हत्या कर दी गई थी। मृतका राजेश देवी के पति वीरसेन निवासी मंगलौरा, थाना झिंझाना ने कांधला थाने पर किवाना के नरेश, सुरेश, रामनिवास, देशपाल उर्फ मोटा पुत्रगण लखमी, काला पुत्र रामनिवास, सोनू पुत्र सुरेश और अक्षय पुत्र नरेश के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था।
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इस मुकदमे की सुनवाई एडीजे प्रथम दिनेशचंद्र सिंह की कोर्ट में हुई। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता जितेंद्र त्यागी ने अदालत में सात गवाह और सबूत पेश किए। न्यायाधीश ने दोनों पक्षों को सुनते हुए 10 मार्च को मां-बेटी की हत्या में नरेश, सुरेश, रामनिवास, देशपाल, काला और सोनू को दोषी करार दिया था। बुधवार को न्यायाधीश ने इन सभी छह लोगों को आजीवन कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई है।      
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1.84 लाख का जुर्माना भी लगाया             
अदालत ने सभी छह आरोपियों को हत्या की धारा 302 में 30-30 हजार रुपये का जुर्माना किया है। नरेश और काला पर आर्म्स एक्ट की धारा 25/ए में 2-2 हजार रुपये का जुर्माना किया है। इस प्रकार कुल जुर्माना 1.84 लाख रुपये में से कोर्ट ने एक लाख रुपये वादी वीरसेन को देने के आदेश दिए हैं। किवाना के डबल मर्डर के सभी छह दोषी लोग साढ़े छह साल से जेल में बंद हैं। इनकी जमानत सेशन से लेकर हाईकोर्ट तक निरस्त हो गई थी।  मां-बेटी हत्याकांड में नामजद सात लोगों में से अक्षय वारदात के दौरान नाबालिग था, जिसकी सुनवाई अभी भी किशोर न्यायालय में विचाराधीन है।      


ये था डबल मर्डर का कारण
कांधला थाना क्षेत्र के गांव किवाना निवासी बुजुर्ग रघुवीरी के पास 42 बीघा जमीन थी। जिसे उसने गांव के ही नरेश पक्ष को बटाई पर दे रखी थी। रघुवीरी के कोई बेटा नहीं था, इसलिए उसने 21 बीघा जमीन अपनी बेटी राजेश देवी पत्नी वीरसेन के नाम कर दी थी। जिसका नरेश पक्ष ने विरोध किया था। नरेश पक्ष रघुवीरी की जमीन को कब्जाना चाहता था। इसी रंजिश में घटना के दिन रघुवीरी और उसकी बेटी राजेश देवी खेतों से गांव लौट रही थीं। रास्ते में आरोपियों ने दोनों मां-बेटी को घेर लिया तथा लाठी-डंडों से पिटाई कर दोनों की ट्रैक्टर से कुचलकर हत्या कर दी थी। पुलिस ने सभी नामजद लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
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