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किसान की जान नहीं बचा पाई पुलिस
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, मुजफ्फरनगर
Updated Sun, 14 Aug 2016 12:23 AM IST
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crime
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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मुजफ्फरनगर। अकबरगढ़ का किसान सत्यप्रकाश अब कभी लौटकर नहीं आएगा। पुलिस उसकी जान बचाने में नाकाम रही है। 22 दिन से कानून के भरोसे बैठे परिजनों के आंसू सूख चुके हैं। पुलिस ने शनिवार को एक आरोपी के हवाले से केस के खुलासे की रस्म पूरी कर दी है, लेकिन परिजनों को न सत्यप्रकाश की लाश मिली और न ही उसके दो कातिलों का सुराग लगा। पुलिस हवा में तीर चलाती रही और हत्यारोपी कानून की पहुंच से दूर निकलते चले गए।
चरथावल के गांव अकबरगढ़ से 23 अगस्त को किसान सत्यप्रकाश का ट्रैक्टर सहित अपहरण किया गया था। बदमाश किसान को किराए ट्रैक्टर ले जाने के बहाने बुलाकर ले गए थे। परिजनों और ग्रामीणों ने किसान की काफी तलाश की, लेकिन किसान और ट्रैक्टर का कोई पता नहीं चला। पुलिस के गंभीर नहीं होने पर भाकियू ने जाम लगाने की कोशिश की तो एसएसपी ने कांवड़ मेले के बाद किसान की बरामदगी का आश्वासन दिया था, लेकिन 22 दिन तक पुलिस हवा में तीर चलाती रही।
न किसान का पता चला और न ही अपहर्ताओं का। बाद में सर्विलांस के दौरान बागोवाली गांव के इमरान को हिरासत में लिया। इमरान ने खुलासा किया कि वारदात वाले दिन बागोवाली में बदमाशों ने शराब पी और मुर्गा खाया। किसान के शव की जानकारी होने से वह इंकार करता रहा। काफी फजीहत होती देख पुलिस ने शनिवार को मामले का खुलासा कर दिया।
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थाना प्रभारी कमल सिंह चौहान ने एक आरोपी को मीडिया के सामने पेश करते हुए बताया कि क्राइम ब्रांच और पुलिस ने मुठभेड़ के दौरान छपार थाना क्षेत्र के गांव बसेड़ा निवासी फरमान को बधाई मोड़ से गिरफ्तार किया है। पूछताछ में आरोपी ने घटना में दो अन्य अभियुक्तों कस्बे का ही नौशाद और देवबंद क्षेत्र निवासी विकास का नाम लिया है।
बकौल पुलिस, आरोपियों ने हत्या कर शव को पेपर मिल के पास जौली रोड पर नाले में डाल दिया था। फरमान की निशानदेही पर नईमंडी के बागोवाली निवासी सह अभियुक्त इमरान से ट्रैक्टर भी बरामद कर लिया है। पकड़ में आया आरोपी शातिर किस्म का अपराधी है।
नईमंडी और छपार में आठ मुकदमे दर्ज हैं, जबकि फरार आरोपियों की लोकेशन दिल्ली और हरियाणा के आसपास बताई जा रही है। पुलिस 22 दिन बाद भी दोनों आरोपियों का कोई सुराग नहीं लगा पाई। पुलिस के मुताबिक सिखेड़ा पुलिस को 25 जुलाई को नाले में एक लावारिस शव मिला था। जिसका बाद में अंतिम संस्कार कर दिया गया। पुलिस ने कपड़ों के आधार पर किसान सत्यप्रकाश की शिनाख्त होने का दावा किया है।
फरार होने के लिए मिला पर्याप्त समय
किसान की हत्या से ग्रामीण आक्रोशित हैं। उनका कहना है कि पुलिस अगर शुरू से ही अलर्ट होती तो सत्यप्रकाश की जान बचाई जा सकती थी। पहले तो पुलिस मामले को अपहरण का मानने को तैयार ही नहीं थी। भाकियू के डीएम दफ्तर पर धरने के बाद पुलिस हरकत में आई, लेकिन शाम को ही धरना खत्म कर दिया गया। पुलिस ने एक हफ्ते तो कांवड़ मेले का बहाना बनाकर मामले को टालती रही। इस दौरान किसान के कातिलों को कानून के हाथ से निकलने में पर्याप्त समय मिल गया।
कत्ल की वजह लूट या रंजिश?
मुजफ्फरनगर। किसान के कत्ल की गुत्थी को सुलझाने में नाकाम रही पुलिस अब दलील दे रही है कि किसान की हत्या ट्रैक्टर लूट नहीं रंजिश में हुई है। पुलिस का कहना है कि मृतक सत्यप्रकाश और आरोपी नौशाद 15 वर्ष पूर्व कादरगढ़ में ईंट भट्ठे पर काम करते थे। वहीं किसी बात को लेकर दोनों में झगड़ा हो गया था। तभी से नौशाद मृतक सत्यप्रकाश से रंजिश रखने लगा था। उसी रंजिश का बदला लेने के लिए नौशाद ने साथियों के साथ मिलकर उसकी हत्या कर दी।
पुलिस का खुलासा सही नहीं : विकास
मुजफ्फरनगर। किसान बरामदगी को लेकर आंदोलन की अगुवाई करने वाले भाकियू नेता विकास शर्मा ने बताया कि पीड़ित परिवार की मनोदशा कुछ ठीक नहीं है, वह कुछ कहने की स्थिति में नही हैं। पुलिस नौशाद से मृतक की दुश्मनी नहीं बता पा रही है। पीड़ित परिवार को सिखेड़ा क्षेत्र से मिली लाश की टीशर्ट और जींस दिखाई गई है, जबकि सत्यप्रकाश पैंट-शर्ट पहनता था। मामले को लेकर गांव में पंचायत चल रही है। जल्दी ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। विकास ने साफ कहा कि पुलिस मामले में लापरवाही बरती है और घटना का सही खुलासा नहीं किया है।
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चरथावल के गांव अकबरगढ़ से 23 अगस्त को किसान सत्यप्रकाश का ट्रैक्टर सहित अपहरण किया गया था। बदमाश किसान को किराए ट्रैक्टर ले जाने के बहाने बुलाकर ले गए थे। परिजनों और ग्रामीणों ने किसान की काफी तलाश की, लेकिन किसान और ट्रैक्टर का कोई पता नहीं चला। पुलिस के गंभीर नहीं होने पर भाकियू ने जाम लगाने की कोशिश की तो एसएसपी ने कांवड़ मेले के बाद किसान की बरामदगी का आश्वासन दिया था, लेकिन 22 दिन तक पुलिस हवा में तीर चलाती रही।
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न किसान का पता चला और न ही अपहर्ताओं का। बाद में सर्विलांस के दौरान बागोवाली गांव के इमरान को हिरासत में लिया। इमरान ने खुलासा किया कि वारदात वाले दिन बागोवाली में बदमाशों ने शराब पी और मुर्गा खाया। किसान के शव की जानकारी होने से वह इंकार करता रहा। काफी फजीहत होती देख पुलिस ने शनिवार को मामले का खुलासा कर दिया।
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थाना प्रभारी कमल सिंह चौहान ने एक आरोपी को मीडिया के सामने पेश करते हुए बताया कि क्राइम ब्रांच और पुलिस ने मुठभेड़ के दौरान छपार थाना क्षेत्र के गांव बसेड़ा निवासी फरमान को बधाई मोड़ से गिरफ्तार किया है। पूछताछ में आरोपी ने घटना में दो अन्य अभियुक्तों कस्बे का ही नौशाद और देवबंद क्षेत्र निवासी विकास का नाम लिया है।
बकौल पुलिस, आरोपियों ने हत्या कर शव को पेपर मिल के पास जौली रोड पर नाले में डाल दिया था। फरमान की निशानदेही पर नईमंडी के बागोवाली निवासी सह अभियुक्त इमरान से ट्रैक्टर भी बरामद कर लिया है। पकड़ में आया आरोपी शातिर किस्म का अपराधी है।
नईमंडी और छपार में आठ मुकदमे दर्ज हैं, जबकि फरार आरोपियों की लोकेशन दिल्ली और हरियाणा के आसपास बताई जा रही है। पुलिस 22 दिन बाद भी दोनों आरोपियों का कोई सुराग नहीं लगा पाई। पुलिस के मुताबिक सिखेड़ा पुलिस को 25 जुलाई को नाले में एक लावारिस शव मिला था। जिसका बाद में अंतिम संस्कार कर दिया गया। पुलिस ने कपड़ों के आधार पर किसान सत्यप्रकाश की शिनाख्त होने का दावा किया है।
फरार होने के लिए मिला पर्याप्त समय
किसान की हत्या से ग्रामीण आक्रोशित हैं। उनका कहना है कि पुलिस अगर शुरू से ही अलर्ट होती तो सत्यप्रकाश की जान बचाई जा सकती थी। पहले तो पुलिस मामले को अपहरण का मानने को तैयार ही नहीं थी। भाकियू के डीएम दफ्तर पर धरने के बाद पुलिस हरकत में आई, लेकिन शाम को ही धरना खत्म कर दिया गया। पुलिस ने एक हफ्ते तो कांवड़ मेले का बहाना बनाकर मामले को टालती रही। इस दौरान किसान के कातिलों को कानून के हाथ से निकलने में पर्याप्त समय मिल गया।
कत्ल की वजह लूट या रंजिश?
मुजफ्फरनगर। किसान के कत्ल की गुत्थी को सुलझाने में नाकाम रही पुलिस अब दलील दे रही है कि किसान की हत्या ट्रैक्टर लूट नहीं रंजिश में हुई है। पुलिस का कहना है कि मृतक सत्यप्रकाश और आरोपी नौशाद 15 वर्ष पूर्व कादरगढ़ में ईंट भट्ठे पर काम करते थे। वहीं किसी बात को लेकर दोनों में झगड़ा हो गया था। तभी से नौशाद मृतक सत्यप्रकाश से रंजिश रखने लगा था। उसी रंजिश का बदला लेने के लिए नौशाद ने साथियों के साथ मिलकर उसकी हत्या कर दी।
पुलिस का खुलासा सही नहीं : विकास
मुजफ्फरनगर। किसान बरामदगी को लेकर आंदोलन की अगुवाई करने वाले भाकियू नेता विकास शर्मा ने बताया कि पीड़ित परिवार की मनोदशा कुछ ठीक नहीं है, वह कुछ कहने की स्थिति में नही हैं। पुलिस नौशाद से मृतक की दुश्मनी नहीं बता पा रही है। पीड़ित परिवार को सिखेड़ा क्षेत्र से मिली लाश की टीशर्ट और जींस दिखाई गई है, जबकि सत्यप्रकाश पैंट-शर्ट पहनता था। मामले को लेकर गांव में पंचायत चल रही है। जल्दी ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। विकास ने साफ कहा कि पुलिस मामले में लापरवाही बरती है और घटना का सही खुलासा नहीं किया है।