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छह साल पाकिस्तान में रहकर पागल हो गया था मैं   

Tue, 01 Nov 2016 11:44 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर Updated Tue, 01 Nov 2016 11:44 PM IST
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Killing four people in Pakistan
99 वर्षीय कैसर अब्बास, जिनके बच्चों की पाकिस्तान में हत्या की गई। - फोटो : अमर उजाला
कवाल के 99 साल के कैसर अब्बास को अपने मुल्क से बेपनाह मोहब्बत है। कैसर पाकिस्तान गए, लेकिन अपने वतन और गांव की यादें नहीं भुला पाए। छह साल पाकिस्तान में रहने के बाद कैसर पिता की मौत पर कवाल आए और पाकिस्तान जाने से तौबा कर ली। बीवी नहीं मानी, वह नाराज होकर पांचों बच्चों को साथ लेकर पाकिस्तान चली गई। हालांकि बेटों का पिता से जुड़ाव बना रहा।
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देश की आजादी से पहले ही माहौल को भांपकर 1943 में कैसर अब्बास अपने परिवार के साथ पाकिस्तान में कराची के निजामाबाद चले गए थे। कैसर अब्बास कहते हैं कि अपने गांव और मुल्क की याद में पाकिस्तान में उसकी पागलों जैसी स्थिति हो गई थी। वह वापस हिंदुस्तान आना चाहते थे, लेकिन ससुर ने नहीं आने दिया। कवाल में पिता की मौत के बाद वह किसी तरह पाकिस्तान से अपने बच्चों को लेकर जनवरी 1949 को भारत आ गए।
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बेटे नैयर मेहंदी और नासिर अब्बास की पढ़ाई भी डीएवी इंटर कॉलेज जानसठ में हुई, अन्य बेटों बाकर अब्बास, नादिर और ताहिर की पढ़ाई भी अन्य स्कूलों में हुई। पत्नी नन्हीं पाकिस्तान जाने पर अड़ी थी, कैसर अब्बास ने साफ इंकार कर दिया। बड़े बेटे नैयर मेहंदी की शादी भी इन्होंने कवाल में अपने भाई की लड़की से कराई। बावजूद इसके इनकी बीवी नहीं मानी। अपने पांचों बेटों को लेकर वह सहारनपुर मायके चली गई और वहां से परिवार के साथ कराची में जाकर बस गई। 
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कैसर अब्बास कहते हैं कि उन्हें अपने देश से इतना प्यार था कि वह पत्नी की जिद के बाद भी पाकिस्तान नहीं गए। बल्कि इस बात पर पत्नी से अनबन हो गई। बाद में कैसर अब्बास ने परिवार की नजदीकी रियाज फातमा से दूसरा निकाह कर लिया। दूसरी पत्नी से एक लड़की गजाला हुई, जो इस समय इंग्लैंड में रह रही है।

99 वर्षीय कैसर अब्बास कहते हैं कि पाकिस्तान के छह साल उसे जेल की तरह लगे। सुकून अपने वतन की मिट्टी में ही मिला। जिंदगी के अंतिम पड़ाव पर बेटों की मौत की खबर ने बुजुर्ग को अंदर तक हिलाकर रख दिया है। कैसर कहते हैं कि उसकी पत्नी और बच्चे मेरा कहा मानकर पाकिस्तान नहीं जाते तो यह दिन देखना नहीं पड़ता। देश की सरहद पर ऐसे हालात हैं कि आखिरी बार अपने जिगर के टुकड़ों को देख भी नहीं पाया। 

छह साल पहले हुई आखिरी मुलाकात
मुजफ्फरनगर। अपने बेटे नैय्यर मेहंदी से आखिरी मुलाकात का जिक्र कर कैसर अब्बास फफक पड़ते हैं। नैय्यर मेहंदी छह साल पहले कवाल में पिता का हाल जानने पहुंचे थे। इससे पहले बैंक में नौकरी होने के कारण अमेरिका से वह टूर पर एक साल में दो बार भारत आ जाते थे।

इस दौरान बैंक के काम से निपटकर अपने पिता का हाल जानने गांव जरूर आते थे। बेटों का अपने पिता के प्रति मोह लगातार बना रहा। नासिर अब्बास भी पिता से मिलने बीच-बीच में आते रहते थे। छह साल से वह भी नहीं आ सके। कैसर अब्बास कहते हैं कि मोबाइल पर उनका अपने बेटों से संपर्क हमेशा बना रहता था।


बेटी गजाला को मिली भारतीय नागरिकता
मुजफ्फरनगर। कैसर अब्बास की दूसरी पत्नी से हुई बेटी गजाला अपने परिवार के साथ इंग्लैंड में रह रही है। कैसर अब्बास ने बताया कि उनकी बेटी को भारतीय नागरिकता मिली हुई है। वह लगातार उनसे बात करती है और बुढ़ापे में उनका ख्याल रखती है। बेटी को भी हिंदुस्तान से बेहद मोहब्बत है।
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