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शहर में बड़ा बवाल होने से बचा ले गई पुलिस
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Updated Sat, 06 Aug 2016 12:53 AM IST
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मृतकों के जनाजे में तैनात पुलिस।
- फोटो : अमर उजाला
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खालापार में ट्रिपल मर्डर के बाद पुलिस की प्लानिंग ने शहर को एक बड़े बवाल से बचा लिया। वारदात के बाद लोगों में गुस्सा इस कदर था कि वह मरने-मारने पर उतारु थे। लोगों का गुस्सा देखते हुए पुलिस ने बिना कोई देरी किए तत्काल आधा दर्जन एंबुलेंस की व्यवस्था कराई और मरणासन्न हालत में घायलों को मेरठ रेफर करा दिया।
हालांकि चिकित्सकों का कहना है कि अस्पताल आने तक तीन लोग दम तोड़ चुके थे। रेफर करने को लेकर भीड़ की पुलिस से भी कहासुनी हुई। शुक्रवार को मेरठ में शवों के पोस्टमार्टम में पूरा दिन लग गया। इस बीच पुलिस को सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने का पूरा समय मिल गया। दिन में पुलिस ने कई मोहल्लों में गश्त जारी रखी।
शवों के आने से पहले पुलिस ने बिरादरी के कुछ नेताओं और समाजसेवियों का सहारा लिया। यह लोग पीड़ित परिवार को समझाने-बुझाने में लगे थे। कप्तान खुद 10 घंटे से अधिक पीड़ित परिवार के संपर्क में रहे। पुलिस की कड़ी सुरक्षा के बीच हजारों लोगों ने शवों को सुपुर्दे खाक किया। भीड़ के वापस लौटने के बाद ही पुलिस ने राहत की सांस ली।
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लग रहा था कि कुछ होने वाला है
ट्रिपल मर्डर का आरोपी वसीम पिछले 20 दिनों से घटना को अंजाम देने की फिराक में था। दोनों पक्षों में तनातनी चल रही थी। आसपास और उसके नजदीकियों का कहना है कि दोनों परिवार आपस में रिश्तेदार होने के कारण सभी को लग रहा था कि कुछ होने वाला है, लेकिन तीन हत्याएं हो जाएंगी यह किसी को अंदाजा नहीं था। लेनदेन को लेकर झगड़े की संभावना व्यक्त की जा रही थी, लेकिन हत्या की उम्मीद किसी को नहीं थी।
खून देकर बचाई थी वसीम की जान
जिस वसीम ने इस्लाम और उसके बेटे गुलशेर और भाई को मौत के घाट उतारा है, इन्हीं मृतकों ने चार साल पहले आरोपी वसीम को खून देकर उसकी जान बचाई थी।
एक दूसरे के खून के प्यासे वसीम और इस्लाम पक्ष आपस में घनिष्ठ रिश्तेदार होने के साथ-साथ एक दूसरे का हरसंभव साथ देने को तैयार रहते थे।
लोगों की माने तो वसीम का फकीरों के साथ झगड़ा होने पर इस्लाम पक्ष ने इसके घर का पहरा दिया था। चार साल पूर्व गोली लगने से घायल होने पर इस्लाम पक्ष के लोगों ने वसीम को खून देकर उसकी जान बचाई थी। आपस में रिश्तेदार होने के चलते दोनों पक्षों का एक दूसरे के यहां खूब आना-जाना था। शादी-ब्याह में भी एक दूसरे के कार्यक्रमों में दोनों पक्ष बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते थे।
वारदात की कहानी पीड़ित की जुबानी
शहर कोतवाली के ट्रिपल मर्डर मामले में पीड़ित नौशाद पुत्र इस्लाम ने पुलिस को तहरीर देकर बताया कि चार अगस्त की शाम करीब आठ बजे ताऊ असलम, चाचा अकरम अपनी लॉटरी के 80 हजार रुपये लेने के लिए रशीद के होटल पर गए थे। वहां मौजूद वसीम, नदीम और परवेज पुत्रगण रसीद, शाहनवाज पुत्र यासीन और शाकिर, शाकिब पुत्रगण शमीम ने रशीद के साथ मिलकर पिस्टल और तमंचों से एकराय होकर वादी के पिता इस्लाम, चाचा अकरम पर फायर किए।
गोलियों की आवाज सुनकर वहां पहुंचे भाई गुलशेर, चाचा अख्तर व शमशेर आदि पर भी फायर झोंक दिए। जिससे सभी गंभीर रूप से घायल हो गए। जिसमें भाई गुलशेर, चाचा अख्तर और पिता इस्लाम की मौत हो गई। सभी आरोपियों ने क्षेत्र में दहशत फैलाने के लिए मौके पर अंधाधुंध फायरिंग की। जिसके चलते आसपास का बाजार बंद हो गया।
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हालांकि चिकित्सकों का कहना है कि अस्पताल आने तक तीन लोग दम तोड़ चुके थे। रेफर करने को लेकर भीड़ की पुलिस से भी कहासुनी हुई। शुक्रवार को मेरठ में शवों के पोस्टमार्टम में पूरा दिन लग गया। इस बीच पुलिस को सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने का पूरा समय मिल गया। दिन में पुलिस ने कई मोहल्लों में गश्त जारी रखी।
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शवों के आने से पहले पुलिस ने बिरादरी के कुछ नेताओं और समाजसेवियों का सहारा लिया। यह लोग पीड़ित परिवार को समझाने-बुझाने में लगे थे। कप्तान खुद 10 घंटे से अधिक पीड़ित परिवार के संपर्क में रहे। पुलिस की कड़ी सुरक्षा के बीच हजारों लोगों ने शवों को सुपुर्दे खाक किया। भीड़ के वापस लौटने के बाद ही पुलिस ने राहत की सांस ली।
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लग रहा था कि कुछ होने वाला है
ट्रिपल मर्डर का आरोपी वसीम पिछले 20 दिनों से घटना को अंजाम देने की फिराक में था। दोनों पक्षों में तनातनी चल रही थी। आसपास और उसके नजदीकियों का कहना है कि दोनों परिवार आपस में रिश्तेदार होने के कारण सभी को लग रहा था कि कुछ होने वाला है, लेकिन तीन हत्याएं हो जाएंगी यह किसी को अंदाजा नहीं था। लेनदेन को लेकर झगड़े की संभावना व्यक्त की जा रही थी, लेकिन हत्या की उम्मीद किसी को नहीं थी।
खून देकर बचाई थी वसीम की जान
जिस वसीम ने इस्लाम और उसके बेटे गुलशेर और भाई को मौत के घाट उतारा है, इन्हीं मृतकों ने चार साल पहले आरोपी वसीम को खून देकर उसकी जान बचाई थी।
एक दूसरे के खून के प्यासे वसीम और इस्लाम पक्ष आपस में घनिष्ठ रिश्तेदार होने के साथ-साथ एक दूसरे का हरसंभव साथ देने को तैयार रहते थे।
लोगों की माने तो वसीम का फकीरों के साथ झगड़ा होने पर इस्लाम पक्ष ने इसके घर का पहरा दिया था। चार साल पूर्व गोली लगने से घायल होने पर इस्लाम पक्ष के लोगों ने वसीम को खून देकर उसकी जान बचाई थी। आपस में रिश्तेदार होने के चलते दोनों पक्षों का एक दूसरे के यहां खूब आना-जाना था। शादी-ब्याह में भी एक दूसरे के कार्यक्रमों में दोनों पक्ष बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते थे।
वारदात की कहानी पीड़ित की जुबानी
शहर कोतवाली के ट्रिपल मर्डर मामले में पीड़ित नौशाद पुत्र इस्लाम ने पुलिस को तहरीर देकर बताया कि चार अगस्त की शाम करीब आठ बजे ताऊ असलम, चाचा अकरम अपनी लॉटरी के 80 हजार रुपये लेने के लिए रशीद के होटल पर गए थे। वहां मौजूद वसीम, नदीम और परवेज पुत्रगण रसीद, शाहनवाज पुत्र यासीन और शाकिर, शाकिब पुत्रगण शमीम ने रशीद के साथ मिलकर पिस्टल और तमंचों से एकराय होकर वादी के पिता इस्लाम, चाचा अकरम पर फायर किए।
गोलियों की आवाज सुनकर वहां पहुंचे भाई गुलशेर, चाचा अख्तर व शमशेर आदि पर भी फायर झोंक दिए। जिससे सभी गंभीर रूप से घायल हो गए। जिसमें भाई गुलशेर, चाचा अख्तर और पिता इस्लाम की मौत हो गई। सभी आरोपियों ने क्षेत्र में दहशत फैलाने के लिए मौके पर अंधाधुंध फायरिंग की। जिसके चलते आसपास का बाजार बंद हो गया।