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कहां गई महिमा की पर्सनल डायरी
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 18 Feb 2017 11:59 PM IST
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बैठक करते भारतीय मानव अधिकार संरक्षण संघ के पदाधिकारी।
- फोटो : अमर उजाला
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मुजफ्फरनगर। दबंगों की दहशत में खुदकुशी के लिए मजबूर हुई महिमा का सुसाइड नोट गायब करने के घेरे में नईमंडी पुलिस आ गई है। मौत से पहले दो घंटे तक कमरे में बंद रही मृतका ने अपनी डायरी में खौफ की दास्तां लिखी थी। मां संजू देवी और भाई अक्षय का कहना है कि बहन की आत्महत्या के बाद पुलिस ने जो डायरी और रजिस्टर उनके घर से उठाए हैं, उन्हें वापस दिलाया जाए।
एसडी डिग्री कालेज की बीकॉम द्वितीय वर्ष की छात्रा महिमा विश्वकर्मा ने अंकित विहार के आवास में ऊपरी मंजिल पर बने कमरे में बृहस्पतिवार दिन में फांसी का फंदा लगाकर अपनी जान दे दी थी। भाई अक्षय के दबंगों के कब्जे से रिहा नहीं होने से व्यथित बहन को जब आरोपियों ने निर्वस्त्र कर साढ़े चार लाख रुपये वसूलने की धमकी दी तो वह टूट गई। इज्जत गंवाने से अच्छा, मर जाना है, उसने यह बात अपनी मां से कही थी। संजू देवी के मुताबिक न्याय की कोई राह नहीं दिखने पर बेटी ने खुद को कमरे में कैद रख लिया।
मैंने पूछा कि क्या कर रही है, उसने पूजा करने का बहाना बनाया। गरीबी से जूझते परिवार का वह पढ़ लिखकर सहारा बनने का ख्वाब संजोए थी। उसे दैनिक डायरी लिखने का शौक था। दीवार पर महिमा ने लिखा कि मेरे भाई अक्षय को वापस ला दो। बेटी की मौत ने मुझे बेहाल कर दिया है। न घर में पति था और न ही बेटा। आठ साल के छोटे बेटे अमित को लिए मैं रोती रही। पुलिस आई और कमरे की तलाशी ली। महिमा की डायरी और रजिस्टर उसकी अलमारी से उठाकर ले गई। मुझे आशंका है कि बेटी महिमा ने अपनी डायरी में सुसाइड नोट लिखा था। जिसे दबंगों के दबाव में नईमंडी कोतवाली पुलिस ने गायब कर दिया है।
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भाई अक्षय का कहना है कि बहन की डायरी और रजिस्टर पुलिस परिवार को वापस लौटाए। मां संजू कहती हैं कि वह अपनी बेटी को साथ लिए थाने से लेकर कप्तान तक के चक्कर काटती रही, मगर किसी ने उनकी नहीं सुनी। 14 फरवरी को मंत्री और उसके गुर्गे पहलवानों के खिलाफ तहरीर दी, लेकिन पुलिस के दरोगा हमसे ही उल्टे-सीधे सवाल करते रहे। अब मुझे अपने पति देव प्रकाश, बड़े बेटे अक्षय और छोटे बेटे अमित की जान का खतरा है। जवान बेटी की मौत का गम एक मां ही जानती है। पुलिस किसके दबाव में है कि हमें बार-बार गुहार लगाने की बाद भी सुरक्षा तक नहीं दी गई है।
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एसडी डिग्री कालेज की बीकॉम द्वितीय वर्ष की छात्रा महिमा विश्वकर्मा ने अंकित विहार के आवास में ऊपरी मंजिल पर बने कमरे में बृहस्पतिवार दिन में फांसी का फंदा लगाकर अपनी जान दे दी थी। भाई अक्षय के दबंगों के कब्जे से रिहा नहीं होने से व्यथित बहन को जब आरोपियों ने निर्वस्त्र कर साढ़े चार लाख रुपये वसूलने की धमकी दी तो वह टूट गई। इज्जत गंवाने से अच्छा, मर जाना है, उसने यह बात अपनी मां से कही थी। संजू देवी के मुताबिक न्याय की कोई राह नहीं दिखने पर बेटी ने खुद को कमरे में कैद रख लिया।
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मैंने पूछा कि क्या कर रही है, उसने पूजा करने का बहाना बनाया। गरीबी से जूझते परिवार का वह पढ़ लिखकर सहारा बनने का ख्वाब संजोए थी। उसे दैनिक डायरी लिखने का शौक था। दीवार पर महिमा ने लिखा कि मेरे भाई अक्षय को वापस ला दो। बेटी की मौत ने मुझे बेहाल कर दिया है। न घर में पति था और न ही बेटा। आठ साल के छोटे बेटे अमित को लिए मैं रोती रही। पुलिस आई और कमरे की तलाशी ली। महिमा की डायरी और रजिस्टर उसकी अलमारी से उठाकर ले गई। मुझे आशंका है कि बेटी महिमा ने अपनी डायरी में सुसाइड नोट लिखा था। जिसे दबंगों के दबाव में नईमंडी कोतवाली पुलिस ने गायब कर दिया है।
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भाई अक्षय का कहना है कि बहन की डायरी और रजिस्टर पुलिस परिवार को वापस लौटाए। मां संजू कहती हैं कि वह अपनी बेटी को साथ लिए थाने से लेकर कप्तान तक के चक्कर काटती रही, मगर किसी ने उनकी नहीं सुनी। 14 फरवरी को मंत्री और उसके गुर्गे पहलवानों के खिलाफ तहरीर दी, लेकिन पुलिस के दरोगा हमसे ही उल्टे-सीधे सवाल करते रहे। अब मुझे अपने पति देव प्रकाश, बड़े बेटे अक्षय और छोटे बेटे अमित की जान का खतरा है। जवान बेटी की मौत का गम एक मां ही जानती है। पुलिस किसके दबाव में है कि हमें बार-बार गुहार लगाने की बाद भी सुरक्षा तक नहीं दी गई है।