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जैमर को भेद रहे बंदियों के मोबाइल
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Updated Tue, 21 Jun 2016 12:36 AM IST
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Jail
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जैमर भी बंदियों के फोन की घंटी को बंद करने में विफल साबित हो गया है। कारागार में जैमर चलने के बावजूद एक कंपनी के मोबाइलों के सिग्नल मिल रहे हैं। बंदी अभी भी फोन इस्तेमाल कर रहे हैं। इसका पता चलने पर जेल अधिकारियों ने कंपनी के अधिकारियों को मामले की जानकारी दी है। तकनीकी विशेषज्ञों की टीम जल्द ही कारागार आकर गड़बड़ी को दूर करेगी।
जेल में बंदियों के मोबाइल पर रोक लगाने के लिए लगाए गए जैमर भी विफल हो गए हैं। जैमर चालू होने के बाद भी बंदियों के फोन चलने की जानकारी मिली है। जेल के भीतर चलने वाले मोबाइल फोन पर एक ही कंपनी का नेटवर्क आ रहा है।
बंदियों को इस बात का पता चला तो उन्होंने खुराफात शुरू कर दी है। एक बंदी ने अपने घर सूचना भेजकर केले के भीतर इस कंपनी का सिम मंगवाया है। यह सूचना लीक होकर अफसरों तक पहुंची तो हड़कंप मच गया। तुरंत ही जेल अफसरों ने कंपनी के अधिकारियों से दिल्ली में संपर्क साधा। जेलर अधिकारियों के अनुसार अगले दो दिन के भीतर कंपनी के तकनीकी विशेषज्ञ जेल आकर मामले की जांच करेंगे।
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फ्रीक्वेंसी अभी सेट नहीं है: जेलर
जेलर सतीश चंद्र त्रिपाठी ने बताया कि जैमर की फ्रीक्वेंसी अभी पूरी तरह से सेट नहीं होने के चलते इस तरह की समस्या हो रही है। जैमर लगाने वाली कंपनी के तकनीशियन एक दो दिन में जेल आकर इसे ठीक करेंगे। जेल में किसी भी तरह के फोन को चलने नहीं दिया जाएगा।
सवा तीन करोड़ हो चुके हैं खर्च
बंदियों द्वारा कारागार के भीतर से ही फोन पर गैंग संचालित करने, रंगदारी मांगने और धमकी देने जैसे अपराध किए जाने के मामले प्रदेशभर में शासन के सामने आ रहे थे। शासन ने मामले का संज्ञान लेते हुए जिला कारागार में जैमर लगवाने के निर्देश दिए।
शासन ने प्राइवेट कंपनी से सवा तीन करोड़ रुपये की लागत से जेल में छह जैमर लगवाए। तीन माह में जैमर लगकर तैयार हुए। शनिवार को जैमर चालू कर दिए गए थे। कंपनी के अधिकारियों का कहना था कि जेल के साथ-साथ जेल की बाहरी दीवार से सटे मकानों के भी फोन बंद हो जाएंगे, लेकिन पूरी तरह रोक नहीं लग पाई।
जनरेटर नहीं लगने से हो रही समस्या
जेल में चालू किए गए जैमर के साथ ही एक जनरेटर भी लगाया जाना था। बिजली भागने पर जनरेटर आटोमैटिक स्टार्ट होकर जैमर को चालू रखता। कंपनी ने जैमर तो लगा दिया, लेकिन जनरेटर नहीं लगाया।
जेल में चल रहा पुराना 25 केवी का जनरेटर जैमर का लोड उठाने में नाकाफी साबित हो रहा है। जनरेटर पर जैसे ही जैमर का लोड डाला जाता है, वह बंद हो जाता है। ऐसे में बंदियों को जनरेटर नहीं चलने का भी पता है। जैसे ही लाइट भागती है, तभी बंदी भी मोबाइल शुरू कर देते हैं। जेलर सतीश त्रिपाठी ने बताया कि इसी सप्ताह जैमर के लिए अलग से जनरेटर लगवा दिया जाएगा। उसके बाद 24 घंटे जैमर चालू रहेगा।
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जेल में बंदियों के मोबाइल पर रोक लगाने के लिए लगाए गए जैमर भी विफल हो गए हैं। जैमर चालू होने के बाद भी बंदियों के फोन चलने की जानकारी मिली है। जेल के भीतर चलने वाले मोबाइल फोन पर एक ही कंपनी का नेटवर्क आ रहा है।
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बंदियों को इस बात का पता चला तो उन्होंने खुराफात शुरू कर दी है। एक बंदी ने अपने घर सूचना भेजकर केले के भीतर इस कंपनी का सिम मंगवाया है। यह सूचना लीक होकर अफसरों तक पहुंची तो हड़कंप मच गया। तुरंत ही जेल अफसरों ने कंपनी के अधिकारियों से दिल्ली में संपर्क साधा। जेलर अधिकारियों के अनुसार अगले दो दिन के भीतर कंपनी के तकनीकी विशेषज्ञ जेल आकर मामले की जांच करेंगे।
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फ्रीक्वेंसी अभी सेट नहीं है: जेलर
जेलर सतीश चंद्र त्रिपाठी ने बताया कि जैमर की फ्रीक्वेंसी अभी पूरी तरह से सेट नहीं होने के चलते इस तरह की समस्या हो रही है। जैमर लगाने वाली कंपनी के तकनीशियन एक दो दिन में जेल आकर इसे ठीक करेंगे। जेल में किसी भी तरह के फोन को चलने नहीं दिया जाएगा।
सवा तीन करोड़ हो चुके हैं खर्च
बंदियों द्वारा कारागार के भीतर से ही फोन पर गैंग संचालित करने, रंगदारी मांगने और धमकी देने जैसे अपराध किए जाने के मामले प्रदेशभर में शासन के सामने आ रहे थे। शासन ने मामले का संज्ञान लेते हुए जिला कारागार में जैमर लगवाने के निर्देश दिए।
शासन ने प्राइवेट कंपनी से सवा तीन करोड़ रुपये की लागत से जेल में छह जैमर लगवाए। तीन माह में जैमर लगकर तैयार हुए। शनिवार को जैमर चालू कर दिए गए थे। कंपनी के अधिकारियों का कहना था कि जेल के साथ-साथ जेल की बाहरी दीवार से सटे मकानों के भी फोन बंद हो जाएंगे, लेकिन पूरी तरह रोक नहीं लग पाई।
जनरेटर नहीं लगने से हो रही समस्या
जेल में चालू किए गए जैमर के साथ ही एक जनरेटर भी लगाया जाना था। बिजली भागने पर जनरेटर आटोमैटिक स्टार्ट होकर जैमर को चालू रखता। कंपनी ने जैमर तो लगा दिया, लेकिन जनरेटर नहीं लगाया।
जेल में चल रहा पुराना 25 केवी का जनरेटर जैमर का लोड उठाने में नाकाफी साबित हो रहा है। जनरेटर पर जैसे ही जैमर का लोड डाला जाता है, वह बंद हो जाता है। ऐसे में बंदियों को जनरेटर नहीं चलने का भी पता है। जैसे ही लाइट भागती है, तभी बंदी भी मोबाइल शुरू कर देते हैं। जेलर सतीश त्रिपाठी ने बताया कि इसी सप्ताह जैमर के लिए अलग से जनरेटर लगवा दिया जाएगा। उसके बाद 24 घंटे जैमर चालू रहेगा।