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महिमा प्रकरण : 26 दिन तक न्याय के लिए जूझता रहा पीड़ित परिवार      

Tue, 07 Mar 2017 11:29 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर Updated Tue, 07 Mar 2017 11:29 PM IST
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Family struggling for justice for 26 days
महिमा के पिता को मेडिकल के लिए ले जाती पुलिस। - फोटो : अमर उजाला
महिमा सुसाइड केस पुलिस के गले की फांस बन गया है। कई ऐसे सवाल हैं, जिन पर पुलिस को जवाब देते नहीं बन रहा। हालात यह हैं कि पीड़िता के सवाल उठाने पर ही पुलिस कार्रवाई के लिए अगला कदम बढ़ाती है। दरोगा से लेकर बड़े साहब तक संजू देवी और बेटी महिमा ने न्याय की गुहार लगाई, लेकिन खाकी के कानों पर जूं नहीं रेंगी। महिमा के सुसाइड करने पर सामने आए जनाक्रोश ने पुलिस की आंखें खोली।       
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महिमा आत्महत्या प्रकरण में मुजरिम कौन है, इसका फैसला अदालत करेगी। मुख्य आरोपी पचेंडा कलां निवासी युधिष्ठिर जेल में है, क्राइम ब्रांच अन्य नामजद आरोपियों की मामले में भूमिका की जांच में जुटी है। इस मामले में पुलिस कार्रवाई तभी अमल में दिखी जब वादी संजू देवी ने एसएसपी को प्रार्थनापत्र दिया। पुलिस की चूक पहले ही दिन से है। नौ फरवरी को डायल-100 पर पीड़िता अपने फोन से घटना की सूचना दर्ज कराती है।
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वादी को एसएमएस मिलता है, मगर राहत नहीं। एसएसपी को 14 फरवरी को मां-बेटी प्रार्थनापत्र देती हैं, फिर भी कुछ नहीं होता। 15 फरवरी को आरोपी बंधक बनाए गए देवप्रकाश को मंडी कोतवाली लाते हैं।  यहां फिर पुलिस की मौजूदगी में मां-बेटी आती हैं, मगर दबंगों के आगे उनकी कोई सुनवाई नहीं होती। भाई अक्षय के घर नहीं लौटने और आरोपियों द्वारा बेइज्जत करने की धमकी से आहत महिमा विश्वकर्मा 16 फरवरी को फांसी का फंदा लगाकर जिंदगी खत्म कर लेती है।
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अभी तक के पूरे घटनाक्रम में कहीं भी पुलिस की निष्पक्ष कार्रवाई का कोई कदम सामने नहीं आता। खाकी के इकबाल पर अनगिनत सवाल हैं। अंकित विहार के आवास पर महिमा का शव पोस्टमार्टम पर जाने से पहले आरोपी वहां पहुंच जाते हैं। पुलिस अफसर और फोर्स तमाशबीन बने रहते हैं। अगले दिन नई मंडी शमशान घाट से आरोपी युधिष्ठिर बेटी के  दाह-संस्कार के बाद पिता देवप्रकाश को पुलिस के सामने कब्जे में कर ले जाते हैं।

इतना ही नहीं अंत्येष्टि से पहले ब्लू रिवोल्यूशन कंपनी के पार्टनर विनोद निवासी लच्छेड़ा मृतका के पिता के साथ सौ रुपये के स्टांप पर बचाव के लिए सुलहनामा भी कर लेते हैं। वादी के प्रार्थनापत्र पर पुलिस ने क्या किया? सब कुछ अपने अंदाज में नामजद आरोपी करते रहे। बेगुनाह महिमा की खुदकुशी के बाद जब जन आक्रोश बढ़ा तब कानून के रखवालों की आंखें खुली। 

अधूरा रह गया देव प्रकाश का मेडिकल            
पुलिस की एक बड़ी चूक यह भी रही कि आरोपियों के कब्जे से देव प्रकाश को मुक्त कराने के बाद उसकी डॉक्टरी क्यों नहीं कराई गई। मंडी कोतवाल और विवेचक संजू देवी के पति को अंकित विहार छोड़ आए थे। वादी फिर शिकायत करती है, तब मंगलवार को जिला चिकित्सालय में देवप्रकाश की डॉक्टरी कराई जाती है।


लखनऊ में बंधक बनाए जाने के दौरान देवप्रकाश ने खुद के गले में चाकू मारकर जान देने की कोशिश की थी। बुधवार को पुन: गले के जख्म का चिकित्सक परीक्षण करेंगे। वादी संजू देवी और महिमा के भाई अक्षय की विवेचक से नोकझोंक हुई। पुलिस देव प्रकाश को चिकित्सालय लाई, मगर पत्नी और बेटे को साथ ले जाने से मना कर दिया। बाद में वादी स्वयं हॉस्पिटल पहुंची। घंटों इंतजार के बाद भी देव प्रकाश का मेडिकल पूरा नहीं हो पाया।       
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