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दलसिंह के हत्यारे को चार साल बाद उम्रकैद
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Updated Wed, 06 Jul 2016 12:02 AM IST
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एडीजे-6 ने पीनना के दल सिंह हत्याकांड में एक हत्यारे को आजीवन कारावास और 57 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। चार साल पहले यह हत्या उधार के रुपयों को लेकर हुई थी।
अभियोजन पक्ष के अनुसार पीनना गांव के चर्चित रहे ट्रक ड्राईवर दल सिंह हत्याकांड का मुकदमा शहर कोतवाली पर मृतक के पिता इन्द्र सिंह पीनना ने दर्ज कराया था। 4 नवम्बर 2012 की रात नौ बजे उनके घर पर ऋषिपाल और उसका पुत्र अजय आए और दल सिंह को गोली मार दी। जिससे वह गम्भीर रूप से घायल हो गया।
उसे जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया था। हत्या की वजह दल सिंह का ऋषिपाल से उधार के 20 हजार रुपया मांगना बताया गया था। इस मुकदमे की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश अंबर रावत की अदालत संख्या 6 में हुई, जिसमें सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता कय्यूम अली ने मुकदमा सिद्ध करने के लिए गवाह पेश करते हुए दलील व सुबूत पेश किए।
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न्यायाधीश ने दोनों पक्षों को सुना। सुबूतों पर गौर करते हुए अभियुक्त ऋषिपाल पुत्र सुरेन्द्र सिंह निवासी ग्राम पीनना को दल सिंह की हत्या करने का दोषी करार देते उसे आजीवन कारावास और 57 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। दूसरे अभियुक्त अजय के नाबालिग होने के कारण उसका मुकदमा किशोर न्यायालय में विचाराधीन है।
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अभियोजन पक्ष के अनुसार पीनना गांव के चर्चित रहे ट्रक ड्राईवर दल सिंह हत्याकांड का मुकदमा शहर कोतवाली पर मृतक के पिता इन्द्र सिंह पीनना ने दर्ज कराया था। 4 नवम्बर 2012 की रात नौ बजे उनके घर पर ऋषिपाल और उसका पुत्र अजय आए और दल सिंह को गोली मार दी। जिससे वह गम्भीर रूप से घायल हो गया।
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उसे जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया था। हत्या की वजह दल सिंह का ऋषिपाल से उधार के 20 हजार रुपया मांगना बताया गया था। इस मुकदमे की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश अंबर रावत की अदालत संख्या 6 में हुई, जिसमें सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता कय्यूम अली ने मुकदमा सिद्ध करने के लिए गवाह पेश करते हुए दलील व सुबूत पेश किए।
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न्यायाधीश ने दोनों पक्षों को सुना। सुबूतों पर गौर करते हुए अभियुक्त ऋषिपाल पुत्र सुरेन्द्र सिंह निवासी ग्राम पीनना को दल सिंह की हत्या करने का दोषी करार देते उसे आजीवन कारावास और 57 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। दूसरे अभियुक्त अजय के नाबालिग होने के कारण उसका मुकदमा किशोर न्यायालय में विचाराधीन है।