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ग्राम प्रधान समेत चार को उम्रकैद
ब्यूरो/ अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
Updated Wed, 21 Oct 2015 12:44 AM IST
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मुजफ्फरनगर। भौराकलां थाना क्षेत्र के गांव हड़ौली में तीन साल पहले हुई अमरपाल की हत्या में मंगलवार को कोर्ट का निर्णय आया। एडीजे-11 अरविंद कुमार उपाध्याय की कोर्ट ने हड़ौली के ग्राम प्रधान प्रमोद समेत चार लोगों को हत्या में आजीवन कारावास और बीस-बीस हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार गांव हड़ौली निवासी धर्म सिंह पक्ष की ग्राम प्रधान प्रमोद के साथ चुनावी रंजिश चली आ रही है। इसी रंजिश के चलते नौ सितंबर 2012 को प्रधान पक्ष के लोगों ने धर्म सिंह पक्ष के साथ मारपीट की थी, तब ग्रामीणों ने समझा-बुझाकर दोनों पक्षों को शांत कर दिया था, मगर प्रधान पक्ष ने देख लेने की धमकी दी थी।
इससे अगले रोज 10 सितंबर 2012 को प्रधान पक्ष ने धर्म सिंह के घेर में घुसकर धर्म सिंह, कवित और अमरपाल पर लाइसेंसी बंदूक, तमंचों और धारदार हथियारों से हमला कर दिया था। गोली से अमरपाल की मौके पर मौत हो गई थी, जबकि बाकी परिजन घायल हो गए थे।
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धर्म सिंह ने भौंराकलां थाने पर ग्राम प्रधान प्रमोद, प्रधान के बेटे सागर के अलावा अंतरपाल, प्रवीण और रवि उर्फ सोनू के खिलाफ हत्या और हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने हत्यारोपियों को पकड़ कर जेल भेजा था, जो जमानत पर बाहर आ गए थे।
हत्या का यह मुकदमा एडीजे-11 अरविंद कुमार उपाध्याय की कोर्ट में चला। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता यशपाल सिंह ने कोर्ट में 11 गवाह पेश किए। न्यायधीश ने दोनों पक्षों को सुना। अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए साक्ष्य और गवाहों के बयानों के आधार पर कोर्ट ने प्रधान प्रमोद, अंतरपाल, प्रवीण, रवि उर्फ सोनू को अमरपाल की हत्या में दोषी ठहराया।
कोर्ट ने मंगलवार को अपना निर्णय सुनाया। जिसमें उक्त चारों को धारा 302 में आजीवन कारावास और बीस-बीस हजार रुपये अर्थदंड, धारा 307 में सात साल की सजा और पांच-पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अमरपाल हत्याकांड में नामजद ग्राम प्रधान प्रमोद के बेटे सागर की उम्र कम होने के कारण उसका मुकदमा किशोर अदालत में ट्रायल पर है।
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अभियोजन पक्ष के अनुसार गांव हड़ौली निवासी धर्म सिंह पक्ष की ग्राम प्रधान प्रमोद के साथ चुनावी रंजिश चली आ रही है। इसी रंजिश के चलते नौ सितंबर 2012 को प्रधान पक्ष के लोगों ने धर्म सिंह पक्ष के साथ मारपीट की थी, तब ग्रामीणों ने समझा-बुझाकर दोनों पक्षों को शांत कर दिया था, मगर प्रधान पक्ष ने देख लेने की धमकी दी थी।
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इससे अगले रोज 10 सितंबर 2012 को प्रधान पक्ष ने धर्म सिंह के घेर में घुसकर धर्म सिंह, कवित और अमरपाल पर लाइसेंसी बंदूक, तमंचों और धारदार हथियारों से हमला कर दिया था। गोली से अमरपाल की मौके पर मौत हो गई थी, जबकि बाकी परिजन घायल हो गए थे।
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धर्म सिंह ने भौंराकलां थाने पर ग्राम प्रधान प्रमोद, प्रधान के बेटे सागर के अलावा अंतरपाल, प्रवीण और रवि उर्फ सोनू के खिलाफ हत्या और हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने हत्यारोपियों को पकड़ कर जेल भेजा था, जो जमानत पर बाहर आ गए थे।
हत्या का यह मुकदमा एडीजे-11 अरविंद कुमार उपाध्याय की कोर्ट में चला। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता यशपाल सिंह ने कोर्ट में 11 गवाह पेश किए। न्यायधीश ने दोनों पक्षों को सुना। अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए साक्ष्य और गवाहों के बयानों के आधार पर कोर्ट ने प्रधान प्रमोद, अंतरपाल, प्रवीण, रवि उर्फ सोनू को अमरपाल की हत्या में दोषी ठहराया।
कोर्ट ने मंगलवार को अपना निर्णय सुनाया। जिसमें उक्त चारों को धारा 302 में आजीवन कारावास और बीस-बीस हजार रुपये अर्थदंड, धारा 307 में सात साल की सजा और पांच-पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अमरपाल हत्याकांड में नामजद ग्राम प्रधान प्रमोद के बेटे सागर की उम्र कम होने के कारण उसका मुकदमा किशोर अदालत में ट्रायल पर है।