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एक हफ्ते से सुलग रही थी नफरत की चिंगारी
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Updated Sat, 25 Jun 2016 12:24 AM IST
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कैदी की मौत के बाद जेल में तैनात पुलिस।
- फोटो : अमर उजाला
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जिला कारागार में पिछले एक हफ्ते से नफरत की चिंगारी सुलग रही थी। जेल में बंदियों के कई गुट हैं, जिनमें वर्चस्व को लेकर आए दिन टकराव होता रहता है। पिछले माह भी बंदियों में मारपीट हुई थी। इसके बाद से बंदियों और कैदियों में तनातनी बनी हुई थी, जेल अफसर मामले की गंभीरता को भांप नहीं सके। जिसका नतीजा खूनी संघर्ष के रूप में सामने आया। डीआईजी जेल ने भी माना कि जेल के हालात ठीक नहीं चल रहे हैं।
शुक्रवार सुबह करीब पांच बजे बंदियों को कैदी चंद्रहास की मौत की खबर मिली। कैदी की मौत की जानकारी मिलते ही जिला कारागार में बंद करीब दो हजार बंदी और कैदी भड़क गए। बैरकों में ही बंदियों और कैदियों ने हंगामा शुरू कर दिया। इतना ही नहीं वह सुबह बैरकों से बाहर आ गए और हंगामा शुरू कर दिया। बैरकों में पहुंचे बंदी रक्षकों को भी उन्होंने दौड़ा लिया।
सुबह का नाश्ता और दुपहर का खाना खाने से बंदियों ने इंकार कर दिया। भूख हडताल कर जेल अफसरों के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी गई। आरोप लगाया कि बंदी रक्षकों की पिटाई से कैदी की मौत हुई है। डिप्टी जेलर नागेश सिंह उन्हें समझाने पहुंचे तो उनका घेराव कर खूब खरी खोटी सुनाई, बंदियों का उग्र रुप देख कर डिप्टी जेलर को वहां से जान बचाकर भागना पड़ा।
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जेल में बवाल की खबर पाकर सिटी मजिस्ट्रेट राजेंद्र सिंह, सीओ सिटी डॉ तेजवीर सिंह, सीओ मंडी अरुण कुमार भारी पुलिस बल लेकर कारागार पहुंचे और बंदियों से वार्ता कर उन्हें समझा बुझा कर शांत किया। तब जाकर दुपहर बारह बजे बंदी शांत हुए और उन्होंने खाना लिया। इसी दौरान मौके पर पहुंचे डीआईजी वीके शेखर ने भी बंदियों के बीच पहुंच कर उनसे घटना की जानकारी ली।
डीआईजी के समक्ष भी बंदियों ने कैदी की मौत के लिए जेल अफसरों को जिम्मेदार बताया। जिस पर डीआईजी ने जांच करा कर कार्रवाई का आश्वासन देकर उन्हें शांत किया। पता चला है कि पिछले माह आठ मई को कैदी चंद्रहास की कुछ बंदियों के साथ मारपीट हुई थी, इसके बाद से कुछ बंदी उससे खार खाए बैठे थे। पिछले एक हफ्ते से ज्यादा खुराफात हो रही थी।
मारपीट की घटना को जेल अफसरों ने गंभीरता से नहीं लिया। जिसका परिणाम हुआ कि बृहस्पतिवार को फिर से बैरक नंबर आठ में बंदी सचिन के साथ कैदी चंद्रहास के साथ दाल को लेकर कहासुनी के बाद खूब मारपीट हुई। बंदी रक्षकों और जेल अफसरों ने तब भी गंभीरता नहीं दिखाई, बल्कि उसे खार खाए बंदियों की बैरक नंबर तीन में ले जाकर बंद कर दिया। कुछ देर में ही इस बैरक में बंदियों ने चंद्रहास पर हमला कर उसे मरनासन्न कर दिया। यदि जेल अफसर एक माह से चली आ रही इस मारपीट को गंभीरता लेते तो कैदी चंद्रहास की मौत नहीं होती।
दोषियों पर कार्रवाई होगी : डीआईजी
डीआईजी जेल वीके शेखर ने जांच-पड़ताल के बाद बाहर आकर पत्रकारों को बताया कि बंदियों की पिटाई के कारण कैैदी चंद्रहास की मौत हुई है। कुछ बंदियों ने बंदी रक्षकों द्वारा भी उसके साथ मारपीट किए जाने का आरोप लगाया है, जिसकी जांच की जा रही है। जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
इनके खिलाफ हुई रिपोर्ट दर्ज
घायल बंदी बिट्टू की ओर से नई मंडी कोतवाली में सदोष मानव वध की धारा 304, 323 और 44 बंदी अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कराया गया है। जिसमें बैरक नंबर तीन के चार बंदियों शाहरुख पुत्र इकराम निवासी कांधला, सुक्का पुत्र मुल्ला निवासी सुुजडू, प्रमोद पुत्र मांगेराम निवासी काबडौत, प्रदीप कश्यप पुत्र प्रकाश निवासी कैराना का नामजद कराया है। चारों आरोपी 302 के तहत जेल में बंद हैं।
हमलावर विक्की के गुर्गे बताए गए
जिला कारागार की बैरक नंबर तीन में हमला कर कैदी चंद्रहास की हत्या करने वाले आरोपी शातिर विक्की त्यागी के गुर्गे बताए गए हैं। जेलर ने स्वीकार किया है कि नामजद आरोपी बंदी प्रदीप और प्रमोद पूर्व में विक्की त्यागी के गुर्गे रह चुके हैं।
बंदियों को दुपहर को कोर्ट ले जाया गया
कैदी की मौत के बाद जिला कारागार में हुई हंगामा के कारण शुक्रवार को बंदी समय से कोर्ट के लिए नहीं जा सके। हंगामा थमने के बाद कोर्ट के लिए बंदियों को दुपहर दो बजे ले जाया गया।
बंदियों से मुलाकात दुपहर बाद हुई
जेल में हंगामा के कारण बंदियों की मुलाकात का काम भी प्रभावित हुआ। शुक्रवार सुबह ही मुलाकाती जेल पर आ गए थे, मगर उनकी मिलाई नहीं हो सकी। जिन लोगों ने ऑनलाइन मुलाकात दर्ज करा दी थी, उनकी बंदियों से मुलाकात दो बजे के बाद कराई गई। बाकी को निराश लौटना पड़ा।
चंद्रहास ने पहले भी की जेल में मारपीट
बंदियों की पिटाई से मरे कैदी चंद्रहास ने जेल में पहले भी कई बार मारपीट की थी। जिसको लेकर वह काफी चर्चाओं में था। गत माह आठ मई को उसने कुछ बंदियों के साथ मारपीट की थी, जब डिप्टी जेलर नागेश सिंह वहां पहुंचे तो उन पर भी हमला किया था। जिस पर जेल अफसर ने उसके खिलाफ नई मंडी कोतवाली पर हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज कराया था। वह जेल में वर्ष 2006 से बंद था।
लखनऊ तक पहुंची कैदी की मौत की गूंज
जिला कारागार में बंदियों के बीच संघर्ष के दौरान कैदी चंद्रहास की मौत की गूंज लखनऊ तक पहुंची है। प्रदेश के कारागार मंत्री बलवंत सिंह रामूवालिया ने जेल अफसरों से पूरे घटना की जानकारी तलब की है। जेल अधीक्षक राकेश सिंह ने बताया कि मंत्री को पूरे प्रकरण की जानकारी भेज दी गई है।
पहले भी कई बार हो चुके हैं जेल में संघर्ष
जिला कारागार में बंदियों के बीच संघर्ष की घटना पहली नहीं है। इससे पूर्व भी जेल में बंदियों के बीच वर्चस्व को लेकर कई बार झगड़े हो चुके हैं। मगर बंदियों के बीच झगड़े में कैदी की हत्या की यह पहली घटना है। इस घटना को जेल प्रशासन काफी गंभीरता से ले रहा है।
डीआईजी वीके शेखर का कहना है कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने बताया कि झगड़ों के कारण यहां से काफी शातिर अपराधियों को दूसरे जिलों में शिफ्ट कर दिया गया है। अब जो बाक खुराफाती रह गए हैं, उन्हें सूचीबद्ध करने के निर्देश जेल अफसरों को दिए गए हैं, शासन को सूची भेज कर उन्हें जल्द बाहरी जेलों में भेजा जाएगा।
जेल में वर्चस्व को लेकर बंदियों के बीच काफी तनातनी रहती है। दो साल पहले विक्की त्यागी के जेल में रहते हुए कई बार विक्की त्यागी और अनिल दुजाना के समर्थक बंदियों के बीच कई मारपीट हुई थी। विक्की त्यागी की हत्या के बाद भी जेल में झगडे़ थमे नहीं। छह माह में जेल में अनेक बार झगडे़ हो चुके है। जिनके चलते कई शातिर बदमाशों को यहां से दूसरी जेलों में शिफ्ट भी करा दिया गया, मगर इसके बावजूद भी बंदियों के बीच झगड़े की घटनाओं पर अंकुश नहीं लग पा रहा है।
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शुक्रवार सुबह करीब पांच बजे बंदियों को कैदी चंद्रहास की मौत की खबर मिली। कैदी की मौत की जानकारी मिलते ही जिला कारागार में बंद करीब दो हजार बंदी और कैदी भड़क गए। बैरकों में ही बंदियों और कैदियों ने हंगामा शुरू कर दिया। इतना ही नहीं वह सुबह बैरकों से बाहर आ गए और हंगामा शुरू कर दिया। बैरकों में पहुंचे बंदी रक्षकों को भी उन्होंने दौड़ा लिया।
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सुबह का नाश्ता और दुपहर का खाना खाने से बंदियों ने इंकार कर दिया। भूख हडताल कर जेल अफसरों के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी गई। आरोप लगाया कि बंदी रक्षकों की पिटाई से कैदी की मौत हुई है। डिप्टी जेलर नागेश सिंह उन्हें समझाने पहुंचे तो उनका घेराव कर खूब खरी खोटी सुनाई, बंदियों का उग्र रुप देख कर डिप्टी जेलर को वहां से जान बचाकर भागना पड़ा।
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जेल में बवाल की खबर पाकर सिटी मजिस्ट्रेट राजेंद्र सिंह, सीओ सिटी डॉ तेजवीर सिंह, सीओ मंडी अरुण कुमार भारी पुलिस बल लेकर कारागार पहुंचे और बंदियों से वार्ता कर उन्हें समझा बुझा कर शांत किया। तब जाकर दुपहर बारह बजे बंदी शांत हुए और उन्होंने खाना लिया। इसी दौरान मौके पर पहुंचे डीआईजी वीके शेखर ने भी बंदियों के बीच पहुंच कर उनसे घटना की जानकारी ली।
डीआईजी के समक्ष भी बंदियों ने कैदी की मौत के लिए जेल अफसरों को जिम्मेदार बताया। जिस पर डीआईजी ने जांच करा कर कार्रवाई का आश्वासन देकर उन्हें शांत किया। पता चला है कि पिछले माह आठ मई को कैदी चंद्रहास की कुछ बंदियों के साथ मारपीट हुई थी, इसके बाद से कुछ बंदी उससे खार खाए बैठे थे। पिछले एक हफ्ते से ज्यादा खुराफात हो रही थी।
मारपीट की घटना को जेल अफसरों ने गंभीरता से नहीं लिया। जिसका परिणाम हुआ कि बृहस्पतिवार को फिर से बैरक नंबर आठ में बंदी सचिन के साथ कैदी चंद्रहास के साथ दाल को लेकर कहासुनी के बाद खूब मारपीट हुई। बंदी रक्षकों और जेल अफसरों ने तब भी गंभीरता नहीं दिखाई, बल्कि उसे खार खाए बंदियों की बैरक नंबर तीन में ले जाकर बंद कर दिया। कुछ देर में ही इस बैरक में बंदियों ने चंद्रहास पर हमला कर उसे मरनासन्न कर दिया। यदि जेल अफसर एक माह से चली आ रही इस मारपीट को गंभीरता लेते तो कैदी चंद्रहास की मौत नहीं होती।
दोषियों पर कार्रवाई होगी : डीआईजी
डीआईजी जेल वीके शेखर ने जांच-पड़ताल के बाद बाहर आकर पत्रकारों को बताया कि बंदियों की पिटाई के कारण कैैदी चंद्रहास की मौत हुई है। कुछ बंदियों ने बंदी रक्षकों द्वारा भी उसके साथ मारपीट किए जाने का आरोप लगाया है, जिसकी जांच की जा रही है। जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
इनके खिलाफ हुई रिपोर्ट दर्ज
घायल बंदी बिट्टू की ओर से नई मंडी कोतवाली में सदोष मानव वध की धारा 304, 323 और 44 बंदी अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कराया गया है। जिसमें बैरक नंबर तीन के चार बंदियों शाहरुख पुत्र इकराम निवासी कांधला, सुक्का पुत्र मुल्ला निवासी सुुजडू, प्रमोद पुत्र मांगेराम निवासी काबडौत, प्रदीप कश्यप पुत्र प्रकाश निवासी कैराना का नामजद कराया है। चारों आरोपी 302 के तहत जेल में बंद हैं।
हमलावर विक्की के गुर्गे बताए गए
जिला कारागार की बैरक नंबर तीन में हमला कर कैदी चंद्रहास की हत्या करने वाले आरोपी शातिर विक्की त्यागी के गुर्गे बताए गए हैं। जेलर ने स्वीकार किया है कि नामजद आरोपी बंदी प्रदीप और प्रमोद पूर्व में विक्की त्यागी के गुर्गे रह चुके हैं।
बंदियों को दुपहर को कोर्ट ले जाया गया
कैदी की मौत के बाद जिला कारागार में हुई हंगामा के कारण शुक्रवार को बंदी समय से कोर्ट के लिए नहीं जा सके। हंगामा थमने के बाद कोर्ट के लिए बंदियों को दुपहर दो बजे ले जाया गया।
बंदियों से मुलाकात दुपहर बाद हुई
जेल में हंगामा के कारण बंदियों की मुलाकात का काम भी प्रभावित हुआ। शुक्रवार सुबह ही मुलाकाती जेल पर आ गए थे, मगर उनकी मिलाई नहीं हो सकी। जिन लोगों ने ऑनलाइन मुलाकात दर्ज करा दी थी, उनकी बंदियों से मुलाकात दो बजे के बाद कराई गई। बाकी को निराश लौटना पड़ा।
चंद्रहास ने पहले भी की जेल में मारपीट
बंदियों की पिटाई से मरे कैदी चंद्रहास ने जेल में पहले भी कई बार मारपीट की थी। जिसको लेकर वह काफी चर्चाओं में था। गत माह आठ मई को उसने कुछ बंदियों के साथ मारपीट की थी, जब डिप्टी जेलर नागेश सिंह वहां पहुंचे तो उन पर भी हमला किया था। जिस पर जेल अफसर ने उसके खिलाफ नई मंडी कोतवाली पर हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज कराया था। वह जेल में वर्ष 2006 से बंद था।
लखनऊ तक पहुंची कैदी की मौत की गूंज
जिला कारागार में बंदियों के बीच संघर्ष के दौरान कैदी चंद्रहास की मौत की गूंज लखनऊ तक पहुंची है। प्रदेश के कारागार मंत्री बलवंत सिंह रामूवालिया ने जेल अफसरों से पूरे घटना की जानकारी तलब की है। जेल अधीक्षक राकेश सिंह ने बताया कि मंत्री को पूरे प्रकरण की जानकारी भेज दी गई है।
पहले भी कई बार हो चुके हैं जेल में संघर्ष
जिला कारागार में बंदियों के बीच संघर्ष की घटना पहली नहीं है। इससे पूर्व भी जेल में बंदियों के बीच वर्चस्व को लेकर कई बार झगड़े हो चुके हैं। मगर बंदियों के बीच झगड़े में कैदी की हत्या की यह पहली घटना है। इस घटना को जेल प्रशासन काफी गंभीरता से ले रहा है।
डीआईजी वीके शेखर का कहना है कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने बताया कि झगड़ों के कारण यहां से काफी शातिर अपराधियों को दूसरे जिलों में शिफ्ट कर दिया गया है। अब जो बाक खुराफाती रह गए हैं, उन्हें सूचीबद्ध करने के निर्देश जेल अफसरों को दिए गए हैं, शासन को सूची भेज कर उन्हें जल्द बाहरी जेलों में भेजा जाएगा।
जेल में वर्चस्व को लेकर बंदियों के बीच काफी तनातनी रहती है। दो साल पहले विक्की त्यागी के जेल में रहते हुए कई बार विक्की त्यागी और अनिल दुजाना के समर्थक बंदियों के बीच कई मारपीट हुई थी। विक्की त्यागी की हत्या के बाद भी जेल में झगडे़ थमे नहीं। छह माह में जेल में अनेक बार झगडे़ हो चुके है। जिनके चलते कई शातिर बदमाशों को यहां से दूसरी जेलों में शिफ्ट भी करा दिया गया, मगर इसके बावजूद भी बंदियों के बीच झगड़े की घटनाओं पर अंकुश नहीं लग पा रहा है।