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दलित हिंसा के अमरेश हत्याकांड का खुलासा
Updated Fri, 07 Sep 2018 12:35 AM IST
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अमरेश हत्याकांड का खुलासा: एसआईटी ने मेघाखेड़ी के युवक को भेजा जेल
मुजफ्फरनगर। एससी-एसटी एक्ट में किए गए संशोधन के खिलाफ दो अप्रैल को आयोजित भारत बंद के दौरान नई मंडी थाने पर भीड़ के हमले में हुई अमरेश की हत्या का एसआईटी ने चुपचाप ही खुलासा कर दिया। इस मामले में एसआईटी ने गांव मेघाखेड़ी के युवक को गिरफ्तार कर जेल भेजते हुए उसके खिलाफ चार्जशीट भी कोर्ट में दाखिल कर दी है।
एससी-एसटी एक्ट में किए गए संशोधन के खिलाफ विभिन्न दलित संगठनों द्वारा दो अप्रैल को भारत बंद का आयोजन किया गया था। इस दौरान भीड़ ने शहर के विभिन्न बाजारों को जबरन बंद कराने के साथ ही कुछ लोगों को हिरासत में लिए जाने के बाद नई मंडी थाने पर हमला कर दिया था। गुस्साई भीड़ ने थाने पर जमकर पथराव, फायरिंग करते हुए थाने परिसर व बाहर खड़े दर्जनों वाहनों को भी फूंक डाला था। वहीं, जानसठ रोड पर रोडवेज बस भी फूंक डाली गई थी। कई घंटे तक चले भीड़ के तांडव के दौरान थाने के निकट ही दो युवकों को भी गोली लग गई थी, जिनमें से भोपा के गांव गादला निवासी अमरेश पुत्र सुरेश को जिला अस्पताल में मृत घोषित कर दिया गया था। मामले में एसएसआई नई मंडी मदन सिंह बिष्ट ने अज्ञात के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। बाद में दलित हिंसा के सभी मामलों की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया था। एसआईटी ने अमरेश की हत्या का खुलासा करते हुए 19 मई को गांव मेघाखेड़ी निवासी रामशरण पुत्र अतरसिंह को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। यही नहीं, हत्यारोपी को गिरफ्तार करने के 19 दिन बाद ही आठ जून को आरोपी के खिलाफ चार्जशीट भी कोर्ट में दाखिल कर दी गई। सीओ नई मंडी योगेंद्र सिंह ने बताया कि जांच के दौरान रामशरण का नाम अमरेश की हत्या में सामने आया था। सर्विलांस जांच के दौरान हत्यारोपी की लोकेशन भी घटना के समय वहीं की थी, जहां अमरेश को गोली लगी थी।
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मुजफ्फरनगर। एससी-एसटी एक्ट में किए गए संशोधन के खिलाफ दो अप्रैल को आयोजित भारत बंद के दौरान नई मंडी थाने पर भीड़ के हमले में हुई अमरेश की हत्या का एसआईटी ने चुपचाप ही खुलासा कर दिया। इस मामले में एसआईटी ने गांव मेघाखेड़ी के युवक को गिरफ्तार कर जेल भेजते हुए उसके खिलाफ चार्जशीट भी कोर्ट में दाखिल कर दी है।
एससी-एसटी एक्ट में किए गए संशोधन के खिलाफ विभिन्न दलित संगठनों द्वारा दो अप्रैल को भारत बंद का आयोजन किया गया था। इस दौरान भीड़ ने शहर के विभिन्न बाजारों को जबरन बंद कराने के साथ ही कुछ लोगों को हिरासत में लिए जाने के बाद नई मंडी थाने पर हमला कर दिया था। गुस्साई भीड़ ने थाने पर जमकर पथराव, फायरिंग करते हुए थाने परिसर व बाहर खड़े दर्जनों वाहनों को भी फूंक डाला था। वहीं, जानसठ रोड पर रोडवेज बस भी फूंक डाली गई थी। कई घंटे तक चले भीड़ के तांडव के दौरान थाने के निकट ही दो युवकों को भी गोली लग गई थी, जिनमें से भोपा के गांव गादला निवासी अमरेश पुत्र सुरेश को जिला अस्पताल में मृत घोषित कर दिया गया था। मामले में एसएसआई नई मंडी मदन सिंह बिष्ट ने अज्ञात के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। बाद में दलित हिंसा के सभी मामलों की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया था। एसआईटी ने अमरेश की हत्या का खुलासा करते हुए 19 मई को गांव मेघाखेड़ी निवासी रामशरण पुत्र अतरसिंह को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। यही नहीं, हत्यारोपी को गिरफ्तार करने के 19 दिन बाद ही आठ जून को आरोपी के खिलाफ चार्जशीट भी कोर्ट में दाखिल कर दी गई। सीओ नई मंडी योगेंद्र सिंह ने बताया कि जांच के दौरान रामशरण का नाम अमरेश की हत्या में सामने आया था। सर्विलांस जांच के दौरान हत्यारोपी की लोकेशन भी घटना के समय वहीं की थी, जहां अमरेश को गोली लगी थी।
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