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चेयरपर्सन ने कर अधीक्षक के खिलाफ एफआईआर के आदेश दिए
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कर अधीक्षक के खिलाफ दर्ज होगा मुकदमा
मुजफ्फरनगर। नगरपालिका के कर अधीक्षक ने आदर्श चुनाव आचार संहिता के बीच में ही गुपचुप तरीके से बिना किसी जांच के छह विज्ञापन एजेंसियों का नवीनीकरण कर दिया। पालिका के खाते में इन एजेंसियों से पैसा भी जमा करा लिया। चेयरपर्सन ने ईओ को पत्र लिखकर कर अधीक्षक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने और विज्ञापन एजेंसियों का पैसा आरटीजीएस के माध्यम से वापस करने के आदेश दिए हैं।
चेयरपर्सन अंजू अग्रवाल ने कर अधीक्षक आरडी पोरवाल से 28 दिसंबर 2018 को विज्ञापन शुल्क आदि का काम छीन लिया था। विज्ञापन एजेंसियों से मिलीभगत कर पालिका को लाखों का चूना लगाए जाने पर उनके खिलाफ कार्रवाई की गई। पोरवाल का वेतन रोकते हुए स्पष्टीकरण मांगा गया था। पोरवाल ने पांच माह से न तो वेतन लिया और न ही चेयरपर्सन को अपना स्पष्टीकरण दिया। उनकी लापरवाही को देखते हुए ईओ का कार्य देख रहे एसडीएम कुमार भूपेंद्र ने शासन में उनके खिलाफ आरोप पत्र भेजा था। पद से हटनेके बावजूद पोरवाल ने छह अप्रैल 2019 को छह विज्ञापन एजेंसियों का नवीनीकरण कर दिया। तत्कालीन ईओ अमित कुमार से मिलीभगत कर यह खेल कर दिया। नवीनीकरण की समस्त फाइल चेयरपर्सन के पास थी और लीगल एडवाइज के लिए पालिका के अधिवक्ता विकास वर्मा को दी गई थी। जांच रिपोर्ट के बाद जब उन्होंने कर विभाग का रिकार्ड देखा तो पाया कि पांच अप्रैल में रेशू एडवरटाईजिंग का नवीनीकरण कर उससे खाते में एक लाख 28 हजार 220 रूपए जमा करा दिए गए। छह अप्रैल को भारती एडवरटाइजिंग एंड मार्केटिंग से तीन लाख 48 हजार 856 जमा कराए। छह अप्रैल को ही आरबी पब्लिसिटी से दो लाख 71 हजार 530, इंपेक्ट आउटडोर से 57 हजार 600, सुरेंद्र आर्ट से 28 हजार 800 की धनराशि आरटीजीएस के माध्यम से खाते में जमा करा ली गई। चेयरपर्सन अंजू अग्रवाल ने ईओ को पत्र जारी करते हुए कहा कि आरडी पोरवाल ने नियमों के विपरीत आदर्श चुनाव आचार संहिता में ही नवीनीकरण किया है। शासन को इनके विरुद्ध आरोप पत्र भेजने के साथ आईपीसी की सुसंगत धाराओं में कानूनी कार्रवाई की जाए। छह विज्ञापन एजेंसियों द्वारा पालिका कोष में जमा कराई धनराशि को आरटीजीएस के माध्यम से वापस कराई जाए। चेयरपर्सन ने इस संबंध में प्रमुख सचिव नगर विकास, प्रमुख सचिव कार्मिक, निदेशक स्थानीय निकाय, कमिश्नर सहारनपुर और डीएम को भी पत्र लिखा है।
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मुजफ्फरनगर। नगरपालिका के कर अधीक्षक ने आदर्श चुनाव आचार संहिता के बीच में ही गुपचुप तरीके से बिना किसी जांच के छह विज्ञापन एजेंसियों का नवीनीकरण कर दिया। पालिका के खाते में इन एजेंसियों से पैसा भी जमा करा लिया। चेयरपर्सन ने ईओ को पत्र लिखकर कर अधीक्षक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने और विज्ञापन एजेंसियों का पैसा आरटीजीएस के माध्यम से वापस करने के आदेश दिए हैं।
चेयरपर्सन अंजू अग्रवाल ने कर अधीक्षक आरडी पोरवाल से 28 दिसंबर 2018 को विज्ञापन शुल्क आदि का काम छीन लिया था। विज्ञापन एजेंसियों से मिलीभगत कर पालिका को लाखों का चूना लगाए जाने पर उनके खिलाफ कार्रवाई की गई। पोरवाल का वेतन रोकते हुए स्पष्टीकरण मांगा गया था। पोरवाल ने पांच माह से न तो वेतन लिया और न ही चेयरपर्सन को अपना स्पष्टीकरण दिया। उनकी लापरवाही को देखते हुए ईओ का कार्य देख रहे एसडीएम कुमार भूपेंद्र ने शासन में उनके खिलाफ आरोप पत्र भेजा था। पद से हटनेके बावजूद पोरवाल ने छह अप्रैल 2019 को छह विज्ञापन एजेंसियों का नवीनीकरण कर दिया। तत्कालीन ईओ अमित कुमार से मिलीभगत कर यह खेल कर दिया। नवीनीकरण की समस्त फाइल चेयरपर्सन के पास थी और लीगल एडवाइज के लिए पालिका के अधिवक्ता विकास वर्मा को दी गई थी। जांच रिपोर्ट के बाद जब उन्होंने कर विभाग का रिकार्ड देखा तो पाया कि पांच अप्रैल में रेशू एडवरटाईजिंग का नवीनीकरण कर उससे खाते में एक लाख 28 हजार 220 रूपए जमा करा दिए गए। छह अप्रैल को भारती एडवरटाइजिंग एंड मार्केटिंग से तीन लाख 48 हजार 856 जमा कराए। छह अप्रैल को ही आरबी पब्लिसिटी से दो लाख 71 हजार 530, इंपेक्ट आउटडोर से 57 हजार 600, सुरेंद्र आर्ट से 28 हजार 800 की धनराशि आरटीजीएस के माध्यम से खाते में जमा करा ली गई। चेयरपर्सन अंजू अग्रवाल ने ईओ को पत्र जारी करते हुए कहा कि आरडी पोरवाल ने नियमों के विपरीत आदर्श चुनाव आचार संहिता में ही नवीनीकरण किया है। शासन को इनके विरुद्ध आरोप पत्र भेजने के साथ आईपीसी की सुसंगत धाराओं में कानूनी कार्रवाई की जाए। छह विज्ञापन एजेंसियों द्वारा पालिका कोष में जमा कराई धनराशि को आरटीजीएस के माध्यम से वापस कराई जाए। चेयरपर्सन ने इस संबंध में प्रमुख सचिव नगर विकास, प्रमुख सचिव कार्मिक, निदेशक स्थानीय निकाय, कमिश्नर सहारनपुर और डीएम को भी पत्र लिखा है।
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