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उतरपुस्तिका कांड में घिरा जिले का एक कालेज
Updated Thu, 22 Mar 2018 12:18 AM IST
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उत्तरपुस्तिका कांड में घिरा जिले का एक कालेज
मुजफ्फरनगर।
सीसीएसयू के उत्तरपुस्तिका कांड में जिले का एक कॉलेज घिरता नजर आ रहा है। इस कालेज में मूल्यांकन के लिए कापियां भेजी गई थी। एसटीएफ के हाथ जो कॉपियां लगी हैं। वह उक्त कालेज को भेजी गई थी, ऐसे में जांच की आंच कालेज तक पहुंच सकती है। इससे कालेज प्रशासन के साथ छात्रों में भी हड़कंप की स्थिति है।
बिजनौर निवासी छात्र नेता कविराज ने विश्वविद्यालय कर्मचारियों पवन, संदीप, कपिल कुमार, चंद्रप्रकाश सिंह, सलेकचंद आदि के साथ मिलकर एमबीबीएस, लॉ की उत्तरपुस्तिकाएं बदली है। एसटीएफ की गिरफ्त में आने पर कविराज ने इस काले खेल से पर्दा हटाया था। एसटीएफ को जो कापियां आरोपियों से बरामद हुई थी, उनमें मुजफ्फरनगर के एक कालेज को आवंटित कापियां की गई थी। अब सवाल है कि यह कापियां कालेज से चोरी कर इस्तेमाल की गई हैं या विवि के मूल्यांकन केंद्र से बाहर आई है। एसटीएफ मामले की तह तक जाने में जुटी है। आरोपियों ने चार साल में 600 कॉपियों में हेरफेर किया है। इन कापियों के असल स्टूडेंट आदि की छानबीन की जा रही है। माना जा रहा है कि अधिकांश स्टूडेंट आसपास जिलों के शामिल रहे हैं, जिन्होंने आरोपियों के साथ मिलकर यह कार्य किया है। समस्या यह है कि इन दिनों विश्वविद्यालय की परीक्षाएं प्रारंभ हो गई है। एसटीएफ कालेज पर छापेमारी और स्टूडेंट को सीधे पकडऩे से बच रही है। कार्रवाई से कालेज पर लगे सेंटर की स्थिति बिगडेगी। जिस कालेज का नाम सामने आ रहा है उसमें मेडिकल से संबंधित कोर्स संचालित है। इसको लेकर एसटीएफ कभी जिले में दस्तक देकर छापेमारी कर सकती है।
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मुजफ्फरनगर।
सीसीएसयू के उत्तरपुस्तिका कांड में जिले का एक कॉलेज घिरता नजर आ रहा है। इस कालेज में मूल्यांकन के लिए कापियां भेजी गई थी। एसटीएफ के हाथ जो कॉपियां लगी हैं। वह उक्त कालेज को भेजी गई थी, ऐसे में जांच की आंच कालेज तक पहुंच सकती है। इससे कालेज प्रशासन के साथ छात्रों में भी हड़कंप की स्थिति है।
बिजनौर निवासी छात्र नेता कविराज ने विश्वविद्यालय कर्मचारियों पवन, संदीप, कपिल कुमार, चंद्रप्रकाश सिंह, सलेकचंद आदि के साथ मिलकर एमबीबीएस, लॉ की उत्तरपुस्तिकाएं बदली है। एसटीएफ की गिरफ्त में आने पर कविराज ने इस काले खेल से पर्दा हटाया था। एसटीएफ को जो कापियां आरोपियों से बरामद हुई थी, उनमें मुजफ्फरनगर के एक कालेज को आवंटित कापियां की गई थी। अब सवाल है कि यह कापियां कालेज से चोरी कर इस्तेमाल की गई हैं या विवि के मूल्यांकन केंद्र से बाहर आई है। एसटीएफ मामले की तह तक जाने में जुटी है। आरोपियों ने चार साल में 600 कॉपियों में हेरफेर किया है। इन कापियों के असल स्टूडेंट आदि की छानबीन की जा रही है। माना जा रहा है कि अधिकांश स्टूडेंट आसपास जिलों के शामिल रहे हैं, जिन्होंने आरोपियों के साथ मिलकर यह कार्य किया है। समस्या यह है कि इन दिनों विश्वविद्यालय की परीक्षाएं प्रारंभ हो गई है। एसटीएफ कालेज पर छापेमारी और स्टूडेंट को सीधे पकडऩे से बच रही है। कार्रवाई से कालेज पर लगे सेंटर की स्थिति बिगडेगी। जिस कालेज का नाम सामने आ रहा है उसमें मेडिकल से संबंधित कोर्स संचालित है। इसको लेकर एसटीएफ कभी जिले में दस्तक देकर छापेमारी कर सकती है।
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