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उपद्रव में अमरेश की मौत बनेगी पुलिस का सिरदर्द
Updated Fri, 06 Apr 2018 12:53 AM IST
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उपद्रव में अमरेश की मौत बनेगी पुलिस का सिरदर्द
मुजफ्फरनगर।
उपद्रव के दौरान वीडियो में अभी तक तमंचे मिलने का कोई पुख्ता सबूत पुलिस नहीं जुटा पाई है। प्रदर्शन के दौरान दलित युवक अमरेश की मौके पर ही मौत हुई, पुलिस के दो सिपाहियों को भी गोली लगी और रेलवे का एक कर्मचारी भी घायल हुआ। पूरे मामले को लेकर पुलिस अपनी ही लिखापढ़ी में ऐसे सवाल खड़े कर रही है, जिसका किसी के पास जवाब नहीं है।
पुलिस की तफ्तीश में प्रदर्शनकारियों पर कोई तमंचा और हथियार अभी तक सामने नहीं आया है। बात इसलिए भी सच है, क्योंकि पुलिस को वीडियो और फोटो के लिए जनता को व्हाट्सएप नंबर जारी करना पड़ा। भोपा के गादला गांव के अमरेश पुत्र सुरेश की विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई मौत पुुलिस का सिरदर्द बनेगी। उपद्रव में गोली लगने से अमरेश की मौके पर ही मौत की पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी कर चुकी है। आनन-फानन में पुलिस अफसरों ने नईमंडी कोतवाली में युवक की हत्या का मुकदमा भी अपनी ओर से ही दर्ज कराया है। पूरे मामले में पुलिस की कार्रवाई में कई झोल हैं। अमरेश की मौत के मुकदमे से पहले नईमंडी थाने में दो सिपाहियों को उपद्रव के दौरान गोली लगने का मुकदमा भी पुलिस प्रशासन ने लिखवाया है। जहां बवाल हुआ था, वहीं रेलवे के गैंगमेन प्रताप को भी गोली लगी। एक अन्य युवक विक्रांत को भी गोली से घायल हुआ। घटनास्थल पर पुलिस ने किसी तमंचे की कोई बरामदगी नहीं दिखाई है। अभी तक की जांच में उपद्रव के आरोप में पुलिस ने बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी की है, मगर भीड़ में अवैध तमंचे थे, इसका कोई साक्ष्य नहीं ढूंढ पाई है। मजबूरी में पुलिस को व्हाट्सएप नंबर भी जारी करना पड़ा। ताकि किसी के हाथ में तमंचा खोजा जा सके। पुलिस अधिकारी पहले से ही यह दावा कर चुके हैं कि गोली पुलिस ने नहीं चलाई। मजिस्ट्रेट का कोई आदेश भी उपद्रव के दौरान सुरक्षा में गोली चलाने के लिए नहीं किया गया था। उपद्रव में फायरिंग का मुद्दा अबूझ पहेली बना हुआ है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक जानसठ फ्लाईओवर के नीचे बवाल के दौरान दस से 15 मिनट तक गोलियों की आवाजे सुनी गई। गोली प्रकरण मामले में पुलिस की थ्योरी खुद को सवालों के घेरे में खडा कर रही है। अमरेश की मौत का मामला क्या मोड लेगा, अभी कुछ कहा नहीं जा सकता। परिजनों ने इस मामले में कोई मुकदमा दर्ज नहीं कराया है। गादला में युवक की शोकसभा के बाद परिजन कोई निर्णय ले सकते हैं।
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मुजफ्फरनगर।
उपद्रव के दौरान वीडियो में अभी तक तमंचे मिलने का कोई पुख्ता सबूत पुलिस नहीं जुटा पाई है। प्रदर्शन के दौरान दलित युवक अमरेश की मौके पर ही मौत हुई, पुलिस के दो सिपाहियों को भी गोली लगी और रेलवे का एक कर्मचारी भी घायल हुआ। पूरे मामले को लेकर पुलिस अपनी ही लिखापढ़ी में ऐसे सवाल खड़े कर रही है, जिसका किसी के पास जवाब नहीं है।
पुलिस की तफ्तीश में प्रदर्शनकारियों पर कोई तमंचा और हथियार अभी तक सामने नहीं आया है। बात इसलिए भी सच है, क्योंकि पुलिस को वीडियो और फोटो के लिए जनता को व्हाट्सएप नंबर जारी करना पड़ा। भोपा के गादला गांव के अमरेश पुत्र सुरेश की विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई मौत पुुलिस का सिरदर्द बनेगी। उपद्रव में गोली लगने से अमरेश की मौके पर ही मौत की पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी कर चुकी है। आनन-फानन में पुलिस अफसरों ने नईमंडी कोतवाली में युवक की हत्या का मुकदमा भी अपनी ओर से ही दर्ज कराया है। पूरे मामले में पुलिस की कार्रवाई में कई झोल हैं। अमरेश की मौत के मुकदमे से पहले नईमंडी थाने में दो सिपाहियों को उपद्रव के दौरान गोली लगने का मुकदमा भी पुलिस प्रशासन ने लिखवाया है। जहां बवाल हुआ था, वहीं रेलवे के गैंगमेन प्रताप को भी गोली लगी। एक अन्य युवक विक्रांत को भी गोली से घायल हुआ। घटनास्थल पर पुलिस ने किसी तमंचे की कोई बरामदगी नहीं दिखाई है। अभी तक की जांच में उपद्रव के आरोप में पुलिस ने बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी की है, मगर भीड़ में अवैध तमंचे थे, इसका कोई साक्ष्य नहीं ढूंढ पाई है। मजबूरी में पुलिस को व्हाट्सएप नंबर भी जारी करना पड़ा। ताकि किसी के हाथ में तमंचा खोजा जा सके। पुलिस अधिकारी पहले से ही यह दावा कर चुके हैं कि गोली पुलिस ने नहीं चलाई। मजिस्ट्रेट का कोई आदेश भी उपद्रव के दौरान सुरक्षा में गोली चलाने के लिए नहीं किया गया था। उपद्रव में फायरिंग का मुद्दा अबूझ पहेली बना हुआ है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक जानसठ फ्लाईओवर के नीचे बवाल के दौरान दस से 15 मिनट तक गोलियों की आवाजे सुनी गई। गोली प्रकरण मामले में पुलिस की थ्योरी खुद को सवालों के घेरे में खडा कर रही है। अमरेश की मौत का मामला क्या मोड लेगा, अभी कुछ कहा नहीं जा सकता। परिजनों ने इस मामले में कोई मुकदमा दर्ज नहीं कराया है। गादला में युवक की शोकसभा के बाद परिजन कोई निर्णय ले सकते हैं।
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