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तिहरे हत्याकांड के 13 आरोपी बरी
Updated Thu, 17 Aug 2017 01:48 AM IST
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तिहरे हत्याकांड के 13 आरोपी बरी
मुजफ्फरनगर। दंगे के दौरान फुगाना के लांक गांव में हुए ट्रिपल मर्डर के मुकदमे के 13 आरोपियों को अदालत ने सबूतों के अभाव में बरी कर दिया है। 15 आरोपियों में से दो आरोपियों की ट्रायल के दौरान जेल में मौत हो गई थी। बरी होने वाले 13 आरोपियों में से दो वर्तमान में जेल में बंद हैं, जबकि 11 जमानत पर जेल से बाहर हैं।
वर्ष 2013 में जिले में भड़के दंगे के दौरान आठ सितंबर को फुगाना थाना क्षेत्र के गांव लांक में यह वारदात हुई थी। दंगे में लांक निवासी अब्दुल वहीद, उसके बेटे ताहिर को जिंदा जलाकर और पुत्रवधू रईसा की धारदार हथियार से वार कर हत्या की गई थी। मृतक अब्दुल वहीद के बेटे अख्तर की ओर से गांव के ही 25 नामजद और 60-70 अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था। एसआईटी ने अपनी तफ्तीश के बाद 15 आरोपियों के खिलाफ पुलिस को रिपोर्ट दी थी। पुलिस ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। ट्रिपल मर्डर का यह मुकदमा एडीजे (कोर्ट नंबर छह) अंबर रावत की अदालत में सुुना गया। बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता जुलकरण सिंह और चंद्रवीर सिंह ने मामले में पैरवी की। न्यायाधीश ने दोनों पक्षों को सुनते हुए बुधवार को मुकदमे के 13 आरोपियों काला पुत्र भालू, ओमपाल, सतबीर, मंजीत, गुरमीत, प्रदीप, काला पुत्र राजबीर, अरुण, रुपेंद्र पुत्र हुकुमचंद, महक सिंह, रुपेंद्र पुत्र राजपाल, बिल्लू, संजीव को सबूत के अभाव में बरी कर दिया। इनमें गुरमीत और सतवीर जेल में बंद हैं, जबकि बाकी 11 जमानत पर बाहर चल रहे थे। कोर्ट में मुकदमे की सुनवाई के दौरान दो आरोपियों रणवीर और इकबाल उर्फ घोड़ा की जेल में ही मौत हो गई थी।
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मुजफ्फरनगर। दंगे के दौरान फुगाना के लांक गांव में हुए ट्रिपल मर्डर के मुकदमे के 13 आरोपियों को अदालत ने सबूतों के अभाव में बरी कर दिया है। 15 आरोपियों में से दो आरोपियों की ट्रायल के दौरान जेल में मौत हो गई थी। बरी होने वाले 13 आरोपियों में से दो वर्तमान में जेल में बंद हैं, जबकि 11 जमानत पर जेल से बाहर हैं।
वर्ष 2013 में जिले में भड़के दंगे के दौरान आठ सितंबर को फुगाना थाना क्षेत्र के गांव लांक में यह वारदात हुई थी। दंगे में लांक निवासी अब्दुल वहीद, उसके बेटे ताहिर को जिंदा जलाकर और पुत्रवधू रईसा की धारदार हथियार से वार कर हत्या की गई थी। मृतक अब्दुल वहीद के बेटे अख्तर की ओर से गांव के ही 25 नामजद और 60-70 अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था। एसआईटी ने अपनी तफ्तीश के बाद 15 आरोपियों के खिलाफ पुलिस को रिपोर्ट दी थी। पुलिस ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। ट्रिपल मर्डर का यह मुकदमा एडीजे (कोर्ट नंबर छह) अंबर रावत की अदालत में सुुना गया। बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता जुलकरण सिंह और चंद्रवीर सिंह ने मामले में पैरवी की। न्यायाधीश ने दोनों पक्षों को सुनते हुए बुधवार को मुकदमे के 13 आरोपियों काला पुत्र भालू, ओमपाल, सतबीर, मंजीत, गुरमीत, प्रदीप, काला पुत्र राजबीर, अरुण, रुपेंद्र पुत्र हुकुमचंद, महक सिंह, रुपेंद्र पुत्र राजपाल, बिल्लू, संजीव को सबूत के अभाव में बरी कर दिया। इनमें गुरमीत और सतवीर जेल में बंद हैं, जबकि बाकी 11 जमानत पर बाहर चल रहे थे। कोर्ट में मुकदमे की सुनवाई के दौरान दो आरोपियों रणवीर और इकबाल उर्फ घोड़ा की जेल में ही मौत हो गई थी।
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