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होम आइसोलेशन में कोरोना मरीजों की सेहत से खिलवाड़

Tue, 29 Sep 2020 12:30 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 29 Sep 2020 12:30 AM IST
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Corona victims being treated carelessly
नगरपालिका सभागार में बैठक लेते पलिका अधिकारी। - फोटो : MUZAFFARNAGAR
होम आइसोलेशन में कोरोना मरीजों की सेहत से खिलवाड़
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मुजफ्फरनगर। शासन के नोडल अधिकारी विशेष सचिव नगर विकास डॉ इंद्रमणि त्रिपाठी जिले में कोरोना पीड़ितों की इलाज के दौरान बरती जा रही लापरवाही को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों के कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। जिले में कोरोना पीड़ितों को रामभरोसे छोड़ दिया गया है। नियमों की अनदेखी कर कोरोना पीड़ित मरीजों को होम आइसोलेट कर उनके परिजनों के साथ ही अन्य लोगों का भी जीवन खतरे में डाला जा रहा है। डोर-टू-डोर सर्वे, हॉटस्पॉट-कंटेनमेंट जोन में सख्ती व सैनिटाइजेशन की कार्रवाई भी महज प्रशासनिक बैठकों में कागजों तक सीमित रह गईं हैं।
कोरोना-19 की प्रशासनिक व्यवस्थाओं का जायजा लेने पहुंचे शासन के नोडल अधिकारी विशेष सचिव नगर विकास डॉ इंद्रमणि त्रिपाठी की पड़ताल में यह सच सामने आया है कि होम आइसोलेशन के दौरान पीड़ितों की निगरानी और उनके स्वास्थ्य की देखरेख में लापरवाही बरती जा रही है। दरअसल, डॉ इंद्रमणि त्रिपाठी ने तीन दिन से जनपद में स्टे करते हुए अपने ही घरों में होम आइसोलेट किए गए कोरोना मरीज, उनके परिजन व आसपास के लोगों से वार्ता कर उनके क्षेत्र की व्यवस्थाओं का हाल जाना। इस दौरान जो जानकारी सामने आई, उसने प्रशासनिक व्यवस्थाओं की धज्जियां उड़ाकर रख दी हैं। डॉ त्रिपाठी के अनुसार कोरोना पाजिटिव लोगों को बिना नियमों का पालन किए उनके परिजनों के साथ ही होम आइसोलेट रहने के लिए विवश कर दिया गया है। पॉजिटिव पाए जाने के बावजूद न तो मरीजों की रोजाना होनी वाली स्वास्थ्य जांच की जा रही है और न ही उनके परिजनों की जांच की जा रही है। मरीजों के घर व आसपास क्षेत्र को सैनिटाइज तक नहीं करते हुए वहां रहने वाले लोगों को रामभरोसे छोड़ दिया गया है। नोडल अफसर ने इस संबंध में अपनी रिपोर्ट शासन को भेज दी है, जिसके बाद शासन से इसे गंभीरता से लेते हुए सहारनपुर मंडलायुक्त को मामले में कार्रवाई के निर्देश दिए। मंडलायुक्त संजय कुमार ने इस मामले में नगरपालिका ईओ विनयमणि त्रिपाठी को प्रथम दृष्टया दोषी मानकर उनके खिलाफ (डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट एवं एपेडेपिक एक्ट) के तहत कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
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नोडल अफसर डॉ इंद्रमणि त्रिपाठी ने बताया कि जांच के दौरान कोरोना मरीजों के होम आइसोलेशन में नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है। न तो उन्हें स्वास्थ्य सुविधाएं दी जा रहीं हैं और न ही सैनिटाइजेशन किया जा रहा है। ऐसे में अन्य लोगों के भी कोरोना की चपेट में आने का बड़ा खतरा है। इस संबंध में जांच रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है।
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