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कोरोना संक्रमितों को महंगे रेट पर भी नहीं मिल रही दवाएं

Wed, 28 Apr 2021 11:10 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 28 Apr 2021 11:10 PM IST
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Corona infected are not getting medicines even at expensive rate
कोरोना संक्रमितों को महंगे रेट पर भी नहीं मिल रही दवाएं
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मुजफ्फरनगर/चरथावल। देश में कोरोना की दूसरी लहर में बाजार से दवाएं गायब होने लगी है। हालात यह है कि कोरोना संक्रमित मरीजों के परिजनों को भी बीमार महंगी दवाएं खरीदने को विवश होना पड़ रहा है। इसके अलावा सर्जिकल सामानों के दामों में भी बेतहाशा वृद्धि हो रही है। मेडिकल स्टोर संचालक इसका कारण दिल्ली में लगे कोरोना कर्फ्यू के बाद दवाओं की आपूर्ति में आई बाधा को बता रहे है। साथ ही आरोप लगा रहे है कि बड़ी मार्केट में कुछ थोक व्यापारी कालाबाजारी कर रहे है।
ऐसे बढ़ रहे कोरोना लहर में दाम
उपकरण पूर्व रेट वर्तमान रेट
ऑक्सीमीटर 600 से 800 1300-3000
स्टीमर 140 300
नेब्युलाइजर 1000 1400-1500
थर्मामीटर 70-80 120-150
गलब्स बॉक्स 200-450 500
ग्लुकोज की पेटी 25 पीस 340-450 500
इन दवाओं की किल्लत
होलसेल मार्केट में सर्जिकल सामान के अलावा रोजमर्रा की आम दवाएं गायब है। उनमें स्टेरायड प्रमुख है। आईवैमेक्टीन, पेरासिटामोल, जिंक टेबलेट, लिवोसिट्राजिन मॉन्टोक्लास्ट आदि दवाएं दो डिब्बे मांगने पर एक पत्ता मिल पा रहा है। मल्टी विटामिन और विटामिन डी के कैप्सूल की बाजार में पर्याप्त मात्रा नहीं होने से मरीज भटक रहे है।
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केमिस्ट का कहना
चरथावल के फुटकर केमिस्ट सुशील कुमार कहते कि बड़ी मार्केट में कुछ थोक व्यापारी कालाबाजारी कर रहे है। स्टॉकिस्ट दबाकर बैठ गए है और कोरोना की दूसरी लहर में दिल्ली से आपूर्ति कम आने के कारण बुधवार को एक होल सेल दवा व्यवसायी ने स्कालवेन सेट देने से मना कर दिया। ब्लैक बाजार बना दिया है, जिसकी मार आम लोगों पर पड़ रहा है।
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केमिस्ट संदीप कंसल ने बताया कुछ थोक व्यापारी मौके का फायदा उठाकर माल को दबाकर बैठ गए है। इसके अलावा दिल्ली में कोरोना कर्फ्यू का असर भी जिले और देहात के बाजारों में पड़ा है। इससे आम आदमी की पहुंच से कुछ दवाएं दूर हो गई है।

सर्जिकल सामान की है कमी
मुजफ्फरनगर केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष सुभाष चौहान ने बताया कि मांग बढ़ने से मार्केट में कुछ दवाएं शार्ट है। ऐसा नहीं है कि फुटकर विक्रेता शहर से खाली वापस जा रहा है। मांग के विपरीत कम मात्रा में दवाएं मिल पा रही है। सर्जिकल आइटमों की कमी है। कोरोना में प्रयोग की जाने वाली दवाओं एजिथ्रोमाइसिन, जिंक टेबलेट और पेरासिटामॉल कम मिल पा रही है। इनके अलावा अन्य दवाएं पहले की तरह बिक रही है। थोक दवा व्यापारियों द्वारा कालाबाजारी नहीं की जा रही है। मार्केट से लेकर यदि कोई हॉस्पिटल कालाबाजारी करता है, तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
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