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मुआवजा नहीं मिलने पर निर्माण कार्य नहीं होने देंगे
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मंसूरपुर में मुआवजा की समस्या का समाधान करने को आयोजित बैठक में मौजूद एसडीएम।
- फोटो : KHATAULI
वाजिब मुआवजा मिलने पर ही निर्माण कार्य शुरू होने देंगे
मंसूरपुर। किसानों की जमीन के मुआवजे की समस्या का हल करने के लिए प्रशासन द्वारा बुलाई गई किसानों की बैठक में कोई आम सहमति नहीं बन सकी। प्रशासन का कहना था कि 50 प्रतिशत मुआवजा बढ़ा दिया गया है, लेकिन किसान इस पर सहमत नहीं हुए। किसानों ने चेतावनी दी कि किसी भी सूरत में बिना उचित मुआवजे के निर्माण कार्य नहीं होने दिया जाएगा। एसडीएम का कहना था कि दो दिन में प्रशासन भूमि अधिग्रहण का निर्माण कार्य शुरू कर देगा।
बता दें कि भारतीय रेलवे माल ढुलाई के लिए डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का निर्माण कर रहा है। इसके लिए किसानों की भूमि का अधिग्रहण कार्य चल रहा है। मंसूरपुर क्षेत्र के 67 किसान जिनका रकबा इस्लामाबाद गांव से जुड़ा हुआ है। इन किसानों का कहना है कि उन्हें बहुत कम 400 प्रति वर्ग मीटर का मुआवजा दिया जा रहा है, जबकि बराबर में ही गांव खानुपुर तथा जोहरा के किसानों को 1600 रुपये वर्ग प्रति मीटर का मुआवजा दिया जा रहा है। किसानों का कहना था कि उनके साथ यह भेदभाव क्यों किया जा रहा है। मंसूरपुर में हुई बैठक में किसानों के बीच पहुंचे एसडीएम खतौली इंद्रकांत द्विवेदी का कहना था कि जिला प्रशासन ने इस्लामाबाद क्षेत्र के किसानों का मुआवजा 50 प्रतिशत बढ़ा दिया है। किसान इससे संतुष्ट नहीं हुए। किसान नेता चौधरी अंगद तथा अन्य किसानों का कहना था कि बराबर में दूसरे गांव के किसानों के समान उन्हें मुआवजा मिलना चाहिए, तभी निर्माण कार्य होने देंगे। कानूनगो सुनील शर्मा तथा लेखपाल इंद्रवीर ने बताया कि सवा दो हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया जाना है। किसानों के विरोध के कारण अधिग्रहण का कार्य अधूरा है। बैठक में प्रियंक घासीपुरा, अंगद, बेगराज सिंह राठी, चंद्रपाल सिंह, जयवीर सिंह, परविंदर, रविंद्र फौजी, इलियास आदि किसान उपस्थित रहे।
-एसडीएम इंद्रकांत द्विवेदी का कहना है कि जिला प्रशासन ने अपने अधिकारों के तहत 50 प्रतिशत मुआवजा बढ़ा दिया है। किसान निर्माण कार्य न रोकें। यदि किसान इससे संतुष्ट नहीं है, तो वे कोर्ट जा सकते हैं।
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-किसान नेता चौधरी अंगद का कहना है कि इस्लामाबाद गांव के रकबे से जुड़े किसानों का मुआवजा 400 वर्ग प्रति मीटर से बढ़ाकर 600 प्रति वर्ग मीटर किया गया है, जबकि बराबर में ही दूसरे गांव से जुड़े किसानों का मुआवजा 1600 रुपये वर्ग प्रति मीटर है। किसान प्रशासन के इस मुआवजे को बिल्कुल भी स्वीकार नहीं करेगा। किसान आगे भी संघर्ष जारी रखेंगे।
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मंसूरपुर। किसानों की जमीन के मुआवजे की समस्या का हल करने के लिए प्रशासन द्वारा बुलाई गई किसानों की बैठक में कोई आम सहमति नहीं बन सकी। प्रशासन का कहना था कि 50 प्रतिशत मुआवजा बढ़ा दिया गया है, लेकिन किसान इस पर सहमत नहीं हुए। किसानों ने चेतावनी दी कि किसी भी सूरत में बिना उचित मुआवजे के निर्माण कार्य नहीं होने दिया जाएगा। एसडीएम का कहना था कि दो दिन में प्रशासन भूमि अधिग्रहण का निर्माण कार्य शुरू कर देगा।
बता दें कि भारतीय रेलवे माल ढुलाई के लिए डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का निर्माण कर रहा है। इसके लिए किसानों की भूमि का अधिग्रहण कार्य चल रहा है। मंसूरपुर क्षेत्र के 67 किसान जिनका रकबा इस्लामाबाद गांव से जुड़ा हुआ है। इन किसानों का कहना है कि उन्हें बहुत कम 400 प्रति वर्ग मीटर का मुआवजा दिया जा रहा है, जबकि बराबर में ही गांव खानुपुर तथा जोहरा के किसानों को 1600 रुपये वर्ग प्रति मीटर का मुआवजा दिया जा रहा है। किसानों का कहना था कि उनके साथ यह भेदभाव क्यों किया जा रहा है। मंसूरपुर में हुई बैठक में किसानों के बीच पहुंचे एसडीएम खतौली इंद्रकांत द्विवेदी का कहना था कि जिला प्रशासन ने इस्लामाबाद क्षेत्र के किसानों का मुआवजा 50 प्रतिशत बढ़ा दिया है। किसान इससे संतुष्ट नहीं हुए। किसान नेता चौधरी अंगद तथा अन्य किसानों का कहना था कि बराबर में दूसरे गांव के किसानों के समान उन्हें मुआवजा मिलना चाहिए, तभी निर्माण कार्य होने देंगे। कानूनगो सुनील शर्मा तथा लेखपाल इंद्रवीर ने बताया कि सवा दो हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया जाना है। किसानों के विरोध के कारण अधिग्रहण का कार्य अधूरा है। बैठक में प्रियंक घासीपुरा, अंगद, बेगराज सिंह राठी, चंद्रपाल सिंह, जयवीर सिंह, परविंदर, रविंद्र फौजी, इलियास आदि किसान उपस्थित रहे।
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-एसडीएम इंद्रकांत द्विवेदी का कहना है कि जिला प्रशासन ने अपने अधिकारों के तहत 50 प्रतिशत मुआवजा बढ़ा दिया है। किसान निर्माण कार्य न रोकें। यदि किसान इससे संतुष्ट नहीं है, तो वे कोर्ट जा सकते हैं।
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-किसान नेता चौधरी अंगद का कहना है कि इस्लामाबाद गांव के रकबे से जुड़े किसानों का मुआवजा 400 वर्ग प्रति मीटर से बढ़ाकर 600 प्रति वर्ग मीटर किया गया है, जबकि बराबर में ही दूसरे गांव से जुड़े किसानों का मुआवजा 1600 रुपये वर्ग प्रति मीटर है। किसान प्रशासन के इस मुआवजे को बिल्कुल भी स्वीकार नहीं करेगा। किसान आगे भी संघर्ष जारी रखेंगे।