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नोडल अधिकारी बदले, कमेटी में अमान्य रूप से रखे हैं कई डॉक्टर      

Tue, 20 Jun 2017 11:42 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर Updated Tue, 20 Jun 2017 11:42 PM IST
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Committee for the PCPNDT Act
डेमो - फोटो : demo pic
महीनों से चल रहे पीसीपीएनडीटी एक्ट के लिए बनाई गई कमेटी पर फिलहाल स्वास्थ्य विभाग मौन है। आला अधिकारियों ने कमेटी के जिला नोडल अधिकारी को हटा दिया है, जबकि कमेटी में अमान्य सदस्यों पर नरमी बरती गई है। विभाग ने नोडल अधिकारी बदलकर अन्य से पल्ला झाड़ लिया है। हालांकि यह एक्शन भी डीएम के सख्त होने के बाद लिया गया है।       
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जिले में अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर छापामारी के लिए स्वास्थ्य विभाग स्तर पर कमेटी बनी हुई है। इस कमेटी में नोडल अधिकारी के साथ अन्य आठ लोग शामिल रहते हैं। जिनमें रेडियोलॉजिस्ट के साथ वरिष्ठ चिकित्सक रखे जाते हैं। महिला चिकित्सक भी कमेटी का हिस्सा रहती हैं। जिले की इस कमेटी पर कई माह से विवाद बना हुआ है।
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शिकायत स्वास्थ्य मंत्रालय तक पहुंच की है। स्वास्थ्य विभाग ने टीम को लीड करने के लिए एसीएमओ डॉ. बीके ओझा को नोडल अधिकारी बनाया हुआ था। बीते दिनों डीएम जीएस प्रियदर्शी ने भी सीएमओ की पीसीपीएनडी एक्ट को लेकर खिंचाई की थी। पूरी कमेटी की कार्रवाई और अब छापामारी की डिटेल मांगी गई। 
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आनन-फानन में विभगीय स्तर कमेटी में बदलाव की आहट खड़ी हो गई, लेकिन आला अधिकारियों के केवल नोडल अधिकारी डॉ. बीके ओझा हटाकर कर्तव्य को पूरा कर लिया है। अब नोडल अधिकारी डॉ. एसके अग्रवाल को बनाया गया है, जबकि कमेटी में कई चिकित्सकों अमान्य रूप से सदस्य रखा गया है।

जो पीसीपीएनटी एक्ट के विरुद्ध है। कमेटी में बदलाव करने में स्वास्थ्य विभाग ने हाथ खड़े कर दिए हैं। नोडल अधिकारी बदले जाने पर विभाग में भी खींचतान है। सीएमओ डॉ. पीएस मिश्रा ने बताया कि कमेटी में फिलहाल नोडल अधिकारी बदले गए हैं। डॉ. एसके अग्रवाल को नोडल अधिकारी बनाया गया है। कमेटी में बदलाव उनके हाथ में नहीं है। कमेटी में बदलाव आला अधिकारियों के स्तर से होगा।       

 
पुरकाजी के भ्रूण के नहीं मिले गुनहगार      
जनवरी माह में पुरकाजी क्षेत्र में कूड़े के ढेर पर भ्रूण पड़े मिले थे। जिस पर टीम ने कार्रवाई कर यहां दो क्लीनिक डॉ. शायना परवीन और डॉ. संध्या क्लीनिक सील किए थे। करीब पांच माह बीतने के बाद भी विभाग भ्रूण फेंकने वालों को पकड़ नहीं सका है। इसके अलावा भी शहर में कई नर्सिंगहोम में लिंग परीक्षण की जांच करने की शिकायतें प्रशासन तक पहुंची हैं।
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