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चंदे से करानी पड़ती है सुभाषनगर के नाले की सफाई
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मुजफ्फरनगर के सुभाष नगर में नई कॉलोनियों में पानी की निकासी ना होने के कारण हुआ गली में जलभराव।
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
चंदे से करानी पड़ती है सुभाषनगर के नाले की सफाई
मुजफ्फरनगर। शहर से सटे सुभाषनगर और सरवट के लोग पानी निकासी नहीं होने का दंश झेल रहे हैं। नाले की सफाई कई-कई साल नहीं हो पाती है। लोग चंदा एकत्र कर नाले की सफाई कराते हैं। कॉलोनी की गलियों में पानी भरा रहता है। बरसात में बीमारी फैलने का खतरा बना रहता है।
शहर की गांधी कालोनी का हिस्सा माने जाने वाला सुभाषनगर और सरवट पालिका की सीमा में नहीं आता। लोगों को यह मालूम ही नहीं हो पाता कि वह शहर में है या गांव में रह रहे हैं। सुभाष नगर की सबसे बड़ी समस्या पानी की निकासी नहीं होना है। यहां कई दशक पहले नाला बनाया गया था। सुभाष नगर के लोगों का आरोप है कि नाले की सफाई ही नहीं होती, पानी रुका रहता है। एक ओर लोग बदबू से परेशान है, वहीं रुके पानी से बीमारी फैलने का खतरा बना रहता है। सीमा से बाहर होने के कारण पालिका यहां काम नहीं करती।
गहरा है नाला
सुभाषनगर में इलेक्ट्रानिक की दुकान करने वाले इरफान का कहना है कि उनकी दुकान के नीचे हर समय नाले का पानी भरा रहता है। नाला यहां काफी गहरा है, लेकिन सफाई न होने के कारण इसमें ऊपर तक मलबा भरा पड़ा है। पानी की निकासी हो ही नहीं पाती है।
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चंदे से कराई थी सफाई
दुकानदार कृष्ण कुमार का कहना है कि दो साल पहले यहां के समस्त दुकानदारों ने पैसा एकत्र कर नाले की सफाई कराई थी। तब जाकर यहां गलियों के पानी की निकासी हो पाई थी। प्रधान और पालिका की तरफ से कोई व्यवस्था नहीं है। सुभाषनगर में पशुओं का चारा बेचने वाले अब्दुलरहमान का कहना है कि यहां जो गलियां गहरे में हैं, उनमें रहने वाले लोगों के सामने ज्यादा दिक्कत है। पानी हर समय भरा रहता है। बरसात में हालात बदतर हो जाते हैं। सुभाषनगर के नसीरपुर रोड के रहने वाले शहजाद का कहना है कि उनकी गलियों के खाली प्लाटों में हर समय पानी भरा रहता है। पानी की निकासी की कोई व्यवस्था नहीं है। बीमारियां फैलने का खतरा रहता है।
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मुजफ्फरनगर। शहर से सटे सुभाषनगर और सरवट के लोग पानी निकासी नहीं होने का दंश झेल रहे हैं। नाले की सफाई कई-कई साल नहीं हो पाती है। लोग चंदा एकत्र कर नाले की सफाई कराते हैं। कॉलोनी की गलियों में पानी भरा रहता है। बरसात में बीमारी फैलने का खतरा बना रहता है।
शहर की गांधी कालोनी का हिस्सा माने जाने वाला सुभाषनगर और सरवट पालिका की सीमा में नहीं आता। लोगों को यह मालूम ही नहीं हो पाता कि वह शहर में है या गांव में रह रहे हैं। सुभाष नगर की सबसे बड़ी समस्या पानी की निकासी नहीं होना है। यहां कई दशक पहले नाला बनाया गया था। सुभाष नगर के लोगों का आरोप है कि नाले की सफाई ही नहीं होती, पानी रुका रहता है। एक ओर लोग बदबू से परेशान है, वहीं रुके पानी से बीमारी फैलने का खतरा बना रहता है। सीमा से बाहर होने के कारण पालिका यहां काम नहीं करती।
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गहरा है नाला
सुभाषनगर में इलेक्ट्रानिक की दुकान करने वाले इरफान का कहना है कि उनकी दुकान के नीचे हर समय नाले का पानी भरा रहता है। नाला यहां काफी गहरा है, लेकिन सफाई न होने के कारण इसमें ऊपर तक मलबा भरा पड़ा है। पानी की निकासी हो ही नहीं पाती है।
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चंदे से कराई थी सफाई
दुकानदार कृष्ण कुमार का कहना है कि दो साल पहले यहां के समस्त दुकानदारों ने पैसा एकत्र कर नाले की सफाई कराई थी। तब जाकर यहां गलियों के पानी की निकासी हो पाई थी। प्रधान और पालिका की तरफ से कोई व्यवस्था नहीं है। सुभाषनगर में पशुओं का चारा बेचने वाले अब्दुलरहमान का कहना है कि यहां जो गलियां गहरे में हैं, उनमें रहने वाले लोगों के सामने ज्यादा दिक्कत है। पानी हर समय भरा रहता है। बरसात में हालात बदतर हो जाते हैं। सुभाषनगर के नसीरपुर रोड के रहने वाले शहजाद का कहना है कि उनकी गलियों के खाली प्लाटों में हर समय पानी भरा रहता है। पानी की निकासी की कोई व्यवस्था नहीं है। बीमारियां फैलने का खतरा रहता है।