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Muzaffarnagar News: किसानों ने खिलाए फूल...मंडी में बन गए धूल
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मोरना। करहेड़ा गांव के किसान गौरव चौधरी की चार बीघा जमीन पर गेंदा लहलहा रहा है। फूल की खुशबू दिल को छू रही है लेकिन किसान मायूस है। वजह अब तक 60 रुपये प्रति किलो में बिक रहे फूल की कीमत 10 से 15 पर सिमट आई है। अच्छे वक्त का इंतजार कर रहे किसानों की फसल खेतों में चौपट होने का खतरा बन रहा है।
यह कहानी सिर्फ एक किसान की नहीं, बल्कि आठ गांव की 115 बीघा जमीन पर फूल खिलाने वाले परिवारों की है। करहेड़ा के ही रविंद्र बताते हैं कि तीन बीघा जमीन पर फूल खिले हैं। अक्तूबर में मांग बढ़ने से दाम बढ़ते हैं लेकिन इस बार उलटा हुआ। भाव 10 से 15 रुपये प्रति किलो है। फूल तुड़वाने का खर्च भी पूरा नहीं हो पाया।
किसान सोनू, लाला और बालिंद्र की एक जैसी कहानी है। कहते हैं कि अब फसल को जोतने की नौबत आ गई है। फूलों की खेती करने वाले किसानों के लिए सरकार को सुरक्षा योजना तैयार करनी चाहिए। लागत भी पूरी नहीं हो पाई।
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किसान शहरी राठी ने बताया कि पश्चिम बंगाल से पौध मंगाकर गेंदा तैयार किया था। प्रति बीघा पांच हजार रुपये से ज्यादा का नकद खर्च हो चुका है। हालत यह है कि आढ़ती खेत पर आकर फूल देखने को भी तैयार नहीं है।
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यहां सप्लाई...ढूंढें नहीं मिल रहे खरीदार
किसान दीपक बताते हैं कि मेरठ, दिल्ली, मीरापुर, फलावदा और देहरादून जैसी मंडियों में गेंदा का भाव मात्र 10 से 15 रुपये प्रति किलोग्राम चल रहा है। इस बेहद सस्ते भाव के बाद भी मंडियों में फूलों का कोई खरीदार नहीं मिल रहा है।
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इन गांव के किसानों ने खिलाए फूल
किसानों ने बताया कि गेंदा की पौध पश्चिम बंगाल से मंगवाई गई थी। एक बीघा खेत में करीब 1500 पौधे रोपित किए गए। एक पौधे की कीमत 80 पैसे से रही लेकिन एक बीघा पर खर्च पांच हजार रुपये से ज्यादा आया। करहेड़ा, ककराला, तिस्सा, बेहड़ा सादात, खाइखेड़ा, टंडेढ़ा, भोपा और ककरौली में किसानों ने फूलों की खेती की है।
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ये बोले आढ़ती
मीरापुर मंडी के आढ़ती जोनी कहते हैं कि यकायक मांग कम हुई है। पिछले साल के मुकाबले त्योहारी सीजन भी आगे बढ़ा है। अक्तूबर के बजाए इस बार दिवाली भी नवंबर में है। शादियों के मुहूर्त से लेकर अन्य शुभ कार्य फिलहाल बंद है, इसी वजह से भाव में पांच गुणा कमी आई है।
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यह कहानी सिर्फ एक किसान की नहीं, बल्कि आठ गांव की 115 बीघा जमीन पर फूल खिलाने वाले परिवारों की है। करहेड़ा के ही रविंद्र बताते हैं कि तीन बीघा जमीन पर फूल खिले हैं। अक्तूबर में मांग बढ़ने से दाम बढ़ते हैं लेकिन इस बार उलटा हुआ। भाव 10 से 15 रुपये प्रति किलो है। फूल तुड़वाने का खर्च भी पूरा नहीं हो पाया।
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किसान सोनू, लाला और बालिंद्र की एक जैसी कहानी है। कहते हैं कि अब फसल को जोतने की नौबत आ गई है। फूलों की खेती करने वाले किसानों के लिए सरकार को सुरक्षा योजना तैयार करनी चाहिए। लागत भी पूरी नहीं हो पाई।
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किसान शहरी राठी ने बताया कि पश्चिम बंगाल से पौध मंगाकर गेंदा तैयार किया था। प्रति बीघा पांच हजार रुपये से ज्यादा का नकद खर्च हो चुका है। हालत यह है कि आढ़ती खेत पर आकर फूल देखने को भी तैयार नहीं है।
यहां सप्लाई...ढूंढें नहीं मिल रहे खरीदार
किसान दीपक बताते हैं कि मेरठ, दिल्ली, मीरापुर, फलावदा और देहरादून जैसी मंडियों में गेंदा का भाव मात्र 10 से 15 रुपये प्रति किलोग्राम चल रहा है। इस बेहद सस्ते भाव के बाद भी मंडियों में फूलों का कोई खरीदार नहीं मिल रहा है।
इन गांव के किसानों ने खिलाए फूल
किसानों ने बताया कि गेंदा की पौध पश्चिम बंगाल से मंगवाई गई थी। एक बीघा खेत में करीब 1500 पौधे रोपित किए गए। एक पौधे की कीमत 80 पैसे से रही लेकिन एक बीघा पर खर्च पांच हजार रुपये से ज्यादा आया। करहेड़ा, ककराला, तिस्सा, बेहड़ा सादात, खाइखेड़ा, टंडेढ़ा, भोपा और ककरौली में किसानों ने फूलों की खेती की है।
ये बोले आढ़ती
मीरापुर मंडी के आढ़ती जोनी कहते हैं कि यकायक मांग कम हुई है। पिछले साल के मुकाबले त्योहारी सीजन भी आगे बढ़ा है। अक्तूबर के बजाए इस बार दिवाली भी नवंबर में है। शादियों के मुहूर्त से लेकर अन्य शुभ कार्य फिलहाल बंद है, इसी वजह से भाव में पांच गुणा कमी आई है।