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मिलेगा इंसाफ, बाल कल्याण समिति सुनेंगी बेटियों की पीड़ा
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मुजफ्फरनगर। पुरकाजी क्षेत्र के स्कूल में रात के समय छात्राओं को रोकने और उनके साथ छेड़छाड़ की घटना का बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष बीना शर्मा ने स्वत: संज्ञान लिया है। उन्होंने थाना पुरकाजी पुलिस को समिति के समक्ष बयान दर्ज कराने के लिए कहा है।
बीना शर्मा ने बताया कि पूरे मामले में 17 दिन तक कार्रवाई नहीं करना पुलिस की लापरवाही को दर्शा रहा है। पुलिस मामले को गलत दिशा देना चाहती है। उन्होंने सवालिया लहजे में कहा कि छात्राओं को रात में किस आधार पर स्कूल में रोका गया। पुलिस और प्रशासन को कोई सूचना नहीं दी गई। छात्राएं किसी परिवार में रुक सकती थी, जहां महिलाएं हो। ऐसे स्थान पर जहां महिला शिक्षक तक नहीं है, वहां छात्राओं को रोकना ही अपराध है। रात में क्या हुआ यह तो जांच का विषय है, लेकिन छात्राओं को रात में नहीं रोका जा सकता। उन्होंने बताया कि बाल कल्याण समिति इस पूरे मामले की जांच करेगी। छात्राओं को न्याय दिलाया जाएगा।
तूल पकड़ रहा प्रकरण, ग्रामीणों में गुस्सा
मुजफ्फरनगर। स्कूली छात्राओं को रात में स्कूल में रोकने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। ग्रामीणों में दोनों स्कूल संचालकों के प्रति गुस्सा है। इसी के चलते भोपा का सूर्यदेव पब्लिक स्कूल सोमवार को बंद रहा।
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बाल आयोग, महिला और मानवाधिकार आयोग तक भी यह मामला पहुंच सकता है। पूर्व में खतौली के कस्तूरबा गांधी विद्यालय के प्रकरण में भी मानवाधिकार आयोग स्वत: संज्ञान लिया था और छात्राओं को तीन-तीन लाख रुपये मुआवजा दिलवाया था। छात्राओं की शिकायत पर बाल कल्याण समिति ने भी मामले को गंभीरता से लिया था। संवाद
बाल संरक्षण अधिकारी ने दिलाया था न्याय
शुकतीर्थ में बच्चों के साथ कुकर्म के मामले को भी बाल संरक्षण अधिकारी ने गंभीरता से लिया था। मामले में बच्चों ने मठ के महाराज पर कुकर्म का आरोप लगाया था। बच्चों के साथ कुकर्म की पुष्टि हो गई थी।
दिनभर दौड़ती रही 17 दिन तक खामोश रही पुलिस
मुजफ्फरनगर। छात्राओं को रात में रोकने का मामला ही गंभीर, ऊपर से छेड़छाड़ का भी आरोप था, इसके बावजूद पुलिस 17 दिन तक चुप्पी साधे रही। एक स्कूल संचालक क ो तो थाने में बुलाकर पूछताछ भी की। इसके बाद भी रिपोर्ट दर्ज नहीं की। पीड़ित छात्राओं से बात करने की कोशिश नहीं की गई। एसओ के लाइन हाजिर होने के बाद पुलिस सोमवार को दिनभर दौड़ती रही।
बड़ा सवाल यही है कि आखिर थाना पुलिस 17 दिन तक क्यों चुप्पी साधे रही। मामला जानकारी में आने के बावजूद मुकदमा दर्ज नहीं किया। प्रकरण ने तूल पकड़ा तो पुलिस दिनभर दौड़ती रही। टीमें गठित हुई और एक आरोपी पुलिस ने पकड़ भी लिया।
पुलिस से सबसे बड़ी चूक यह हुई कि मामला जानकारी में आने के बावजूद ढीला रवैया अपनाया गया। अधिकारियों को जानकारी दिए बगैर स्कूल संचालक को थाने से ही वापस भेज दिया। पुलिस ने जांच की जहमत तक नहीं उठाई। मामला स्कूल की 17 छात्राओं का था, ऐसे में पुलिस को गंभीरता दिखानी चाहिए थी। विधायक की शिकायत और एसएसपी अभिषेक यादव की सख्ती के बाद पुलिस ने दौड़ धूप शुरू की।
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बीना शर्मा ने बताया कि पूरे मामले में 17 दिन तक कार्रवाई नहीं करना पुलिस की लापरवाही को दर्शा रहा है। पुलिस मामले को गलत दिशा देना चाहती है। उन्होंने सवालिया लहजे में कहा कि छात्राओं को रात में किस आधार पर स्कूल में रोका गया। पुलिस और प्रशासन को कोई सूचना नहीं दी गई। छात्राएं किसी परिवार में रुक सकती थी, जहां महिलाएं हो। ऐसे स्थान पर जहां महिला शिक्षक तक नहीं है, वहां छात्राओं को रोकना ही अपराध है। रात में क्या हुआ यह तो जांच का विषय है, लेकिन छात्राओं को रात में नहीं रोका जा सकता। उन्होंने बताया कि बाल कल्याण समिति इस पूरे मामले की जांच करेगी। छात्राओं को न्याय दिलाया जाएगा।
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तूल पकड़ रहा प्रकरण, ग्रामीणों में गुस्सा
मुजफ्फरनगर। स्कूली छात्राओं को रात में स्कूल में रोकने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। ग्रामीणों में दोनों स्कूल संचालकों के प्रति गुस्सा है। इसी के चलते भोपा का सूर्यदेव पब्लिक स्कूल सोमवार को बंद रहा।
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बाल आयोग, महिला और मानवाधिकार आयोग तक भी यह मामला पहुंच सकता है। पूर्व में खतौली के कस्तूरबा गांधी विद्यालय के प्रकरण में भी मानवाधिकार आयोग स्वत: संज्ञान लिया था और छात्राओं को तीन-तीन लाख रुपये मुआवजा दिलवाया था। छात्राओं की शिकायत पर बाल कल्याण समिति ने भी मामले को गंभीरता से लिया था। संवाद
बाल संरक्षण अधिकारी ने दिलाया था न्याय
शुकतीर्थ में बच्चों के साथ कुकर्म के मामले को भी बाल संरक्षण अधिकारी ने गंभीरता से लिया था। मामले में बच्चों ने मठ के महाराज पर कुकर्म का आरोप लगाया था। बच्चों के साथ कुकर्म की पुष्टि हो गई थी।
दिनभर दौड़ती रही 17 दिन तक खामोश रही पुलिस
मुजफ्फरनगर। छात्राओं को रात में रोकने का मामला ही गंभीर, ऊपर से छेड़छाड़ का भी आरोप था, इसके बावजूद पुलिस 17 दिन तक चुप्पी साधे रही। एक स्कूल संचालक क ो तो थाने में बुलाकर पूछताछ भी की। इसके बाद भी रिपोर्ट दर्ज नहीं की। पीड़ित छात्राओं से बात करने की कोशिश नहीं की गई। एसओ के लाइन हाजिर होने के बाद पुलिस सोमवार को दिनभर दौड़ती रही।
बड़ा सवाल यही है कि आखिर थाना पुलिस 17 दिन तक क्यों चुप्पी साधे रही। मामला जानकारी में आने के बावजूद मुकदमा दर्ज नहीं किया। प्रकरण ने तूल पकड़ा तो पुलिस दिनभर दौड़ती रही। टीमें गठित हुई और एक आरोपी पुलिस ने पकड़ भी लिया।
पुलिस से सबसे बड़ी चूक यह हुई कि मामला जानकारी में आने के बावजूद ढीला रवैया अपनाया गया। अधिकारियों को जानकारी दिए बगैर स्कूल संचालक को थाने से ही वापस भेज दिया। पुलिस ने जांच की जहमत तक नहीं उठाई। मामला स्कूल की 17 छात्राओं का था, ऐसे में पुलिस को गंभीरता दिखानी चाहिए थी। विधायक की शिकायत और एसएसपी अभिषेक यादव की सख्ती के बाद पुलिस ने दौड़ धूप शुरू की।