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दोगुनी आय का सपना दिखाकर छला
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दोगुनी आय का सपना दिखाकर छला
मुजफ्फरनगर। आम बजट से किसान नाखुश है। किसान का कहना है कि सरकार ने दोगुनी आय का सपना दिखाया था। आय दोगुनी कैसे होगी उस फार्मूले का किसान इंतजार कर रहे हैं। किसान को बजट में ऐसा कुछ दिखाई नहीं दे रहा जिससे उसकी आय में बढ़ोत्तरी होगी। किसान को कर्ज से मुक्ति मिले, इसका भी कोई उपाय दिखाई नहीं दिया है।
खरपौड गांव के किसान यशपाल नागर कहते हैं कि बजट में ऐसा कुछ नहीं दिखाई दिया जिससे किसान की आय दोगुनी हो सके। किसान आर्थिक संकट के जूझ रहा है, उसे इससे बाहर निकालने का रास्ता सरकार के पास दिखाई नहीं देता है। क्रेडिट कार्ड की लिमिट भी नहीं बढ़ाई गई है।
किसान मनोज कुमार का कहना है कि बजट में ऐसी कोई घोषणा नहीं हुई है, जिसका किसान पर सीधा असर होता हो। किसान की फसलों पर लागत लगातार बढ़ती जा रहा है। फसल का दाम निश्चित नहीं है। जिस फसल के दाम तय है उसकी खरीद की व्यवस्था नहीं है।
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मोघपुर के किसान अंकुश मलिक कहते हैं कि किसान की फसलों की लागत हर साल बढ़ जाती है। किसान के लिए सरकार की ऐसी कोई ठोस नीति नहीं है, जिससे उसकी आर्थिक उन्नति हो सके। अधिकतम किसान कर्जदार है। इनकी सरकार को कोई चिंता नहीं है।
कूकड़ा के किसान कृष्णपाल राठी का कहना है कि बजट से किसानों को बड़ी उम्मीद थी। बजट ने किसानों को निराश ही किया है। बिजली, खाद के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। फसल की लागत बढ़ रही है। आय घट रही है। ऐसे हालात में किसान को कैसे उबारा जाए इस पर सरकार की कोई नीति नहीं है।
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मुजफ्फरनगर। आम बजट से किसान नाखुश है। किसान का कहना है कि सरकार ने दोगुनी आय का सपना दिखाया था। आय दोगुनी कैसे होगी उस फार्मूले का किसान इंतजार कर रहे हैं। किसान को बजट में ऐसा कुछ दिखाई नहीं दे रहा जिससे उसकी आय में बढ़ोत्तरी होगी। किसान को कर्ज से मुक्ति मिले, इसका भी कोई उपाय दिखाई नहीं दिया है।
खरपौड गांव के किसान यशपाल नागर कहते हैं कि बजट में ऐसा कुछ नहीं दिखाई दिया जिससे किसान की आय दोगुनी हो सके। किसान आर्थिक संकट के जूझ रहा है, उसे इससे बाहर निकालने का रास्ता सरकार के पास दिखाई नहीं देता है। क्रेडिट कार्ड की लिमिट भी नहीं बढ़ाई गई है।
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किसान मनोज कुमार का कहना है कि बजट में ऐसी कोई घोषणा नहीं हुई है, जिसका किसान पर सीधा असर होता हो। किसान की फसलों पर लागत लगातार बढ़ती जा रहा है। फसल का दाम निश्चित नहीं है। जिस फसल के दाम तय है उसकी खरीद की व्यवस्था नहीं है।
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मोघपुर के किसान अंकुश मलिक कहते हैं कि किसान की फसलों की लागत हर साल बढ़ जाती है। किसान के लिए सरकार की ऐसी कोई ठोस नीति नहीं है, जिससे उसकी आर्थिक उन्नति हो सके। अधिकतम किसान कर्जदार है। इनकी सरकार को कोई चिंता नहीं है।
कूकड़ा के किसान कृष्णपाल राठी का कहना है कि बजट से किसानों को बड़ी उम्मीद थी। बजट ने किसानों को निराश ही किया है। बिजली, खाद के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। फसल की लागत बढ़ रही है। आय घट रही है। ऐसे हालात में किसान को कैसे उबारा जाए इस पर सरकार की कोई नीति नहीं है।