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एक सदस्य से 22 का गणित साधना भाकियू के लिए चुनौती
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एक सदस्य से 22 का गणित साधना भाकियू के लिए चुनौती
मुजफ्फरनगर। भारतीय किसान यूनियन के लिए अपने एक सदस्य से जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए 22 सदस्यों का गणित साधना एक बड़ी चुनौती है। जिले की राजनीति में भाकियू और भाजपा में पहली बार सीधा टकराव होगा। किसान आंदोलन के माध्यम से पूरे देश में अपनी अलग छवि बनाने वाली भाकियू के लिए यह चुनाव प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है।
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में भारतीय किसान यूनियन के सदर तहसील अध्यक्ष विकास शर्मा ही चुनाव जीत पाए थे। जिलाध्यक्ष धीरज लाटियान सहित सभी पदाधिकारी जिपं में चुनाव हार गए थे। एक जिपं सदस्य वाली भाकियू ने जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर अपना समर्थक बैठाने का बड़ा निर्णय लिया है। निर्दलीय चुनाव जीते केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ संजीव बालियान के तहेरे भाई सतेंद्र बालियान को भाकियू अध्यक्ष नरेश टिकैत ने हरी टोपी पहनाकर भाकियू की सदस्यता दिलाई है। संगठन के अब दो सदस्य हो चुके हैं। सतेंद्र बालियान को ही प्रत्याशी बनाया गया है। चौधरी नरेश टिकैत ने पूरे विपक्ष को एक साथ जोड़कर इस चुनाव की कमान अपने हाथ में ले ली है। अपने एक सदस्य से शुरूआत करते हुए 22 का गणित तैयार करने में लगे हैं। सत्ताधारी भाजपा के सामने भाकियू पहली बार किसी चुनाव को लेकर मैदान में आई है। ऐसे में भाकियू के सामने मुजफ्फरनगर में दम दिखाने की परीक्षा है। भाकियू के सामने जिले की राजनीति के बड़े खिलाड़ी संजीव बालियान हैं, जो कि भाजपा प्रत्याशी वीरपाल निर्वाल को जिताने के लिए दिन-रात एक किए हुए हैं।
रालोद ने चली बड़ी चाल
मुजफ्फरनगर। जिला पंचायत की राजनीति में रालोद ने सबसे सेफ गेम खेला है। रालोद इस बात को जानती है कि भाकियू और केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. संजीव बालियान के बीच संबंध अच्छे रहे हैं। रालोद ने अपनी रणनीति के तहत दोनों को आमने-सामने कर दिया है। संजीव बालियान के परिवार में ही बंटवारा करा दिया है। इसे वह अपनी भावी राजनीति के लिए शुभ मान रही है। इस चुनाव में रालोद पूरी तरह सधा हुआ खेल खेला है।
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मुजफ्फरनगर। भारतीय किसान यूनियन के लिए अपने एक सदस्य से जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए 22 सदस्यों का गणित साधना एक बड़ी चुनौती है। जिले की राजनीति में भाकियू और भाजपा में पहली बार सीधा टकराव होगा। किसान आंदोलन के माध्यम से पूरे देश में अपनी अलग छवि बनाने वाली भाकियू के लिए यह चुनाव प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है।
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में भारतीय किसान यूनियन के सदर तहसील अध्यक्ष विकास शर्मा ही चुनाव जीत पाए थे। जिलाध्यक्ष धीरज लाटियान सहित सभी पदाधिकारी जिपं में चुनाव हार गए थे। एक जिपं सदस्य वाली भाकियू ने जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर अपना समर्थक बैठाने का बड़ा निर्णय लिया है। निर्दलीय चुनाव जीते केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ संजीव बालियान के तहेरे भाई सतेंद्र बालियान को भाकियू अध्यक्ष नरेश टिकैत ने हरी टोपी पहनाकर भाकियू की सदस्यता दिलाई है। संगठन के अब दो सदस्य हो चुके हैं। सतेंद्र बालियान को ही प्रत्याशी बनाया गया है। चौधरी नरेश टिकैत ने पूरे विपक्ष को एक साथ जोड़कर इस चुनाव की कमान अपने हाथ में ले ली है। अपने एक सदस्य से शुरूआत करते हुए 22 का गणित तैयार करने में लगे हैं। सत्ताधारी भाजपा के सामने भाकियू पहली बार किसी चुनाव को लेकर मैदान में आई है। ऐसे में भाकियू के सामने मुजफ्फरनगर में दम दिखाने की परीक्षा है। भाकियू के सामने जिले की राजनीति के बड़े खिलाड़ी संजीव बालियान हैं, जो कि भाजपा प्रत्याशी वीरपाल निर्वाल को जिताने के लिए दिन-रात एक किए हुए हैं।
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रालोद ने चली बड़ी चाल
मुजफ्फरनगर। जिला पंचायत की राजनीति में रालोद ने सबसे सेफ गेम खेला है। रालोद इस बात को जानती है कि भाकियू और केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. संजीव बालियान के बीच संबंध अच्छे रहे हैं। रालोद ने अपनी रणनीति के तहत दोनों को आमने-सामने कर दिया है। संजीव बालियान के परिवार में ही बंटवारा करा दिया है। इसे वह अपनी भावी राजनीति के लिए शुभ मान रही है। इस चुनाव में रालोद पूरी तरह सधा हुआ खेल खेला है।
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