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ऊंचाइयां छूने के लिए जमीनी सोच होना बेहद जरूरी : करिश्मा अरोरा
Sat, 04 May 2019 12:28 AM IST
Deepak Kausik
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Published by: Deepak Kausik
Updated Sat, 04 May 2019 12:28 AM IST
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अमर उजाला के अपराजिता अभियान का पोस्टर लांच करतीं करिश्मा अरोरा।
- फोटो : अमर उजाला
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जमीन पर पैर रखकर भी आसमानों में परवाज की जा सकती है। ऊंचाइयां छूने के लिए जमीनी होना बेहद जरूरी है। शहर की बेटी करिश्मा यूं ही सीबीएसई इंटर की ऑल इंडिया टॉपर नहीं बनी। वह बताती हैं कि करिश्मा अरोरा को ‘करिश्मा’ बनाने वाले उसके माता-पिता हैं। वह भी एक सामान्य लड़की है, लेकिन सोच उसे अन्य से अलग करती है। डॉक्टर, इंजीनियर बनने की होड़ के इतर उसे नृत्य का शौक है और वह दिव्यांग लड़कियों को कत्थक सिखाना चाहती हैं। वृद्धाश्रमों में रहने वाले बुजुर्गों के जीवन में खुशी के पल देना चाहती है।
सीबीएसई इंटर में 500 में से 499 अंक हासिल कर सेलिब्रेटी बनी करिश्मा अरोरा शुक्रवार शाम करीब साढ़े तीन बजे जानसठ रोड स्थित तिरुपति होम आवास पर सहेलियों के साथ घूमने जाने को उतावली थीं। इसी दौरान उन्होंने अमर उजाला से बातचीत की। सवालों का जवाब देते हुए करिश्मा ने बताया कि वह बचपन से ही सेंसेटिव हैं।
मानव व्यवहार को समझती है, इसलिए डॉक्टर, इंजीनियर के बजाए साइकोलॉजी चुना। साइकोलॉजी में करियर बनाना चाहती हैं। डांस का बचपन से ही शौक है और इसे माता-पिता के सहयोग ने परवान चढ़ाया। हर सप्ताह पिता मनोज कुमार अरोरा उसे प्रसिद्ध कत्थक नृत्यांगना गीतांजलि लाल से नृत्य सिखाने दिल्ली खेल गांव लेकर जाते हैं।
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वह दिव्यांग बच्चों को कत्थक सिखाना चाहती हैं। इसके लिए विशेष प्रशिक्षण भी ले रही हैं। कहती हैं कि यह समाज का वह तबका है जिस पर कोई ध्यान नहीं देता। साइकोलॉजिस्ट बनकर वृद्धाश्रमों में रहने वाले बुजुर्गों की सेवा कर उनके जीवन में खुशी लानी है। असाधारण उपलब्धि हासिल करने वाली करिश्मा की पसंद भी अलग हैं। खेलों में बैडमिंटन पसंद है, लेकिन खिलाड़ियों में धोनी। कार्तिक आर्यन को पसंदीदा फिल्म अभिनेता बताती हैं और आलिया भट्ट को अभिनेत्री। कॉमेडी फिल्म पसंद हैं। पसंदीदा राजनेता के नाम पर तपाक से मोदी का नाम लेती हैं। कहती हैं कि उन्होंने जो किया वह कोई नहीं कर पाया।
महिलाओं को लेकर बदलनी होगी सोच
मुजफ्फरनगर। अमर उजाला के अभियान अपराजिता-100 मिलियन इस्माईल्स का पोस्टर लांच करते हुए करिश्मा अरोरा ने कहा कि सरकार महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए बढ़िया काम कर रही है। सरकार और सामाजिक संस्थाओं के साथ ही आम जन को भी अपनी सोच बदलनी होगी। बेटियों को लेकर हमें वृहद स्तर पर सोचना होगा। अपने माता-पिता की वे दो बेटियां हैं। बड़ी बहन भूमिका अरोरा दिल्ली विश्वविद्यालय से बीकॉम ऑनर्स कर रही हैं। मां मोनिका अरोरा कहती हैं कि उन्हें यह सब सपना सा लग रहा है। बेटी की सफलता ने उनके जीवन में खुशियां बिखेर दी हैं।
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सीबीएसई इंटर में 500 में से 499 अंक हासिल कर सेलिब्रेटी बनी करिश्मा अरोरा शुक्रवार शाम करीब साढ़े तीन बजे जानसठ रोड स्थित तिरुपति होम आवास पर सहेलियों के साथ घूमने जाने को उतावली थीं। इसी दौरान उन्होंने अमर उजाला से बातचीत की। सवालों का जवाब देते हुए करिश्मा ने बताया कि वह बचपन से ही सेंसेटिव हैं।
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मानव व्यवहार को समझती है, इसलिए डॉक्टर, इंजीनियर के बजाए साइकोलॉजी चुना। साइकोलॉजी में करियर बनाना चाहती हैं। डांस का बचपन से ही शौक है और इसे माता-पिता के सहयोग ने परवान चढ़ाया। हर सप्ताह पिता मनोज कुमार अरोरा उसे प्रसिद्ध कत्थक नृत्यांगना गीतांजलि लाल से नृत्य सिखाने दिल्ली खेल गांव लेकर जाते हैं।
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वह दिव्यांग बच्चों को कत्थक सिखाना चाहती हैं। इसके लिए विशेष प्रशिक्षण भी ले रही हैं। कहती हैं कि यह समाज का वह तबका है जिस पर कोई ध्यान नहीं देता। साइकोलॉजिस्ट बनकर वृद्धाश्रमों में रहने वाले बुजुर्गों की सेवा कर उनके जीवन में खुशी लानी है। असाधारण उपलब्धि हासिल करने वाली करिश्मा की पसंद भी अलग हैं। खेलों में बैडमिंटन पसंद है, लेकिन खिलाड़ियों में धोनी। कार्तिक आर्यन को पसंदीदा फिल्म अभिनेता बताती हैं और आलिया भट्ट को अभिनेत्री। कॉमेडी फिल्म पसंद हैं। पसंदीदा राजनेता के नाम पर तपाक से मोदी का नाम लेती हैं। कहती हैं कि उन्होंने जो किया वह कोई नहीं कर पाया।
महिलाओं को लेकर बदलनी होगी सोच
मुजफ्फरनगर। अमर उजाला के अभियान अपराजिता-100 मिलियन इस्माईल्स का पोस्टर लांच करते हुए करिश्मा अरोरा ने कहा कि सरकार महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए बढ़िया काम कर रही है। सरकार और सामाजिक संस्थाओं के साथ ही आम जन को भी अपनी सोच बदलनी होगी। बेटियों को लेकर हमें वृहद स्तर पर सोचना होगा। अपने माता-पिता की वे दो बेटियां हैं। बड़ी बहन भूमिका अरोरा दिल्ली विश्वविद्यालय से बीकॉम ऑनर्स कर रही हैं। मां मोनिका अरोरा कहती हैं कि उन्हें यह सब सपना सा लग रहा है। बेटी की सफलता ने उनके जीवन में खुशियां बिखेर दी हैं।