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मुजफ्फरनगर: कोर्ट संख्या सात में सुने जाएंगे रामपुर तिराहा कांड़ के गंभीर धाराओं वाले मुकदमे

Sat, 18 Feb 2023 11:58 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 18 Feb 2023 11:58 PM IST
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Cases involving serious sections of the Rampur Tiraha incident will be heard in court number seven.
- विशेष न्यायाधीश पॉक्सो में विचाराधीन थी तीन मुकदमों की फाइल
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- मजिस्ट्रेट ट्रायल के मुकदमों की सुनवाई कर रहे हैं सिविल जज सीनियर डिवीजन
- गंभीर अपराध के मुकदमों के लिए कोर्ट संख्या सात को किया गया अधिकृत


अमर उजाला ब्यूरो
मुजफ्फरनगर। रामपुर तिराहा कांड के गंभीर धाराओं (सेशन ट्रायल) के मुकदमों की सुनवाई अब जिले में ही होगी। फिलहाल यहीं के पॉक्सो कोर्ट में चल रहे तीन मुकदमों की फाइल स्थानांतरित कर दी गई है। सुनवाई के लिए अपर जिला एवं सत्र न्यायालय संख्या-सात को अधिकृत किया गया है। मजिस्ट्रेट ट्रायल के मुकदमे सिविल जज सीनियर डिवीजन फास्ट ट्रैक में चल रहे है।
सहायक शासकीय अधिवकता परमेंद्र ने बताया रामपुर तिराहा कांड से संबंधित सेशन कोर्ट के मुकदमे की सीबीआई से संबंधित तीन फाइल जिले की विशेष अपर सत्र न्यायाधीश पॉक्सो कोर्ट में अदालत में चल रही थीं। हाईकोर्ट ने अब गंभीर धाराओं के मुकदमों की सुनवाई के लिए अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट नंबर सात के पीठासीन अधिकारी शक्ति सिंह को अधिकृत किया है। रामपुर तिराहा कांड से संबंधित उत्तराखंड़ समिति के पीड़ित लोगों की आग्रह पर उच्च न्यायालय ने मुकदमों को त्वरित निस्तारण करने के लिए इस अदालत में भेजा गया है। सिविल जज सीनियर डिवीजन (फास्ट ट्रैक) कोर्ट में मजिस्ट्रेट ट्रायल की फाइल चल रही है। गंभीर मुकदमों की सुनवाई में तेजी आने की उम्मीद जगी है। एडीजीसी ने बताया कि रामपुर तिराहा कांड से संबंधित गंभीर मुकदमे मसलन लूट, हत्या और बलात्कार की फाइल भी गाजियाबाद से इसी न्यायालय में स्थानांतरित होंगी।
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यह था मामला
एक अक्तूबर, 1994 को अलग राज्य की मांग के लिए देहरादून से बसों से बड़ी तादाद में आंदोलनकारी दिल्ली के लिए निकले थे। देर रात रामपुर तिराहा पर पुलिस ने आंदोलनकारियों पर फायरिंग से सात आंदोलनकारियों की मौत हो गई थी। जिसकी गूंज पूरे देश में गूंजी थी। सीबीआई ने मामले की जांच की और पुलिस पार्टी और अधिकारियों पर मुकदमे दर्ज कराए थे। फिलहाल चार मुकदमों जिले में लंबित हैं। पहले ये मुकदमे एसीजेएम द्वितीय की कोर्ट में विचाराधीन रहें। लंबे समय तक सुनवाई नहीं होने पर पिछले वर्ष नवंबर 2021 में सिविल जज सीनियर डिवीजन फास्ट ट्रैक को अधिकृत करते हुए वहां भेजे गए थे।
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इनकी हुई थी मौत



देहरादून की नेहरु कालोनी निवासी रविंद्र रावत उर्फ गोलू, भाला वाला निवासी सतेंद्र चौहान, बदरीपुर निवासी गिरीश भदरी, अजबपुर निवासी राजेश लखेड़ा, ऋषिकेश निवासी सूर्यप्रकाश थपलियाल, ऊखीमठ निवासी अशोक कुमार और भानियावाला निवासी राजेश नेगी की पुलिस फायरिंग में मौत हो गई थी।




दुनियाभर में हुई थी लाठियों की गूंज



एक अक्तूबर वर्ष 1994 की रात को उत्तराखंड़ की मांग के लिए आंदोलनकारी देहरादून से दिल्ली के लिए निकले थे। रात के समय रामपुर तिराहे पर पुलिस ने उन्हें आगे नहीं बढ़ने दिया। पुलिस ने लाठीचार्ज और फायरिंग की। सात आंदोलनकारियों की मौत हो गई थी। महिलाओं के साथ अभद्रता की गई थी। मुजफ्फरनगर के लोगों ने आंदोलनकारियों की मदद की थी। प्रकरण की सीबीआई जांच के आदेश 1995 में हुए थे।



अदालत में चार मुकदमे लंबित



केस-एक : सीबीआई बनाम मिलाप सिंह



केस-दो : सीबीआई बनाम राधा मोहन द्विवेदी



केस-तीन : सीबीआई बनाम एसपी मिश्रा



केस-चार : सीबीआई बनाम ब्रजकिशोर सिंह
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