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पालिकाध्यक्ष, ईओ पर संपत्ति हड़पने के आरोप में मामला दर्ज
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देवबंद (सहारनपुर)। अदालत के आदेश पर पुलिस ने नगरपालिका अध्यक्ष, अधिशासी अधिकारी तथा दो पालिकाकर्मियों के विरुद्ध सरकारी दस्तावेजों को फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से बदलकर संपत्ति हड़पने के आरोप में मामला दर्ज किया है।
मोहल्ला खानकाह निवासी मौलवी मुजम्मिल ने वर्ष 2005 में एक संपत्ति खरीदी थी। आरोप है कि उक्त जमीन को हड़पने की नीयत से पालिकाध्यक्ष, ईओ तथा नगरपालिका के रिकार्ड कीपर एवं बिल कलेक्टर ने आपसी साठ गांठ कर फर्जी दस्तावेज तैयार कर लिए। यह मामला एसडीएम देवबंद और सीजेएम सहारनपुर की कोर्ट में चला। जिसके बाद मौलवी मुजम्मिल ने नगर पालिका द्वारा एसडीएम न्यायालय एवं सीजेएम कोर्ट में अलग-अलग प्रमाणित दस्तावेजों को चुनौती दी। न्यायालय ने मो. अकबर, ईओ डॉ. धीरेंद्र कुमार राय, नीरज गोस्वामी और पालिकाध्यक्ष जियाउद्दीन अंसारी के खिलाफ आए साक्ष्यों को स्वीकार करते हुए पुलिस को न्यायिक जांच के लिए निर्देशित किया। आरोप है कि पालिका ने अधिनियम 1972 के तहत मौलवी मुजम्मिल को उनकी बैनामा खरीद संपत्ति से बेदखल का वाद दायर करते हुए अलग दस्तावेज पेश किए। न्यायालय ने पालिका द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों का संज्ञान लेते हुए उन्हें अलग-अलग न्यायालयों में अलग-अलग पाया। जिसे न्यायालय ने विपक्षीगणों द्वारा अपने पद का दुरुपयोग करार देते हुए आपराधिक षड्यंत्र करार दिया। पुलिस ने बुधवार को न्यायालय के आदेश पर सभी आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 420, 466, 467,471 एवं 120बी के तहत मामला दर्ज कर लिया।
दबाव बनाने के मकसद से झूठा मुकदमा दर्ज कराया
मोहल्ला खानकाह निवासी मौलवी मुजम्मिल जिस जमीन को अपनी बता रहा है वह नगरपालिका की है। उस पर शौचालय बना हुआ है। असम के रहने वाले इस मौलवी ने करीब 25 साल पहले उस जगह पर कब्जा पर लिया था। जिसका मुकदमा नगरपालिका की तरफ से अदालत में चल रहा है। मुजम्मिल ने नगरपालिका पर दबाव बनाने के लिए झूठा मुकदमा दर्ज कराया है। आरोप लगाया कि मौलवी मुजम्मिल भू-माफिया किस्म का व्यक्ति है। -जियाउद्दीन अंसारी, पालिकाध्यक्ष देवबंद
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मोहल्ला खानकाह निवासी मौलवी मुजम्मिल ने वर्ष 2005 में एक संपत्ति खरीदी थी। आरोप है कि उक्त जमीन को हड़पने की नीयत से पालिकाध्यक्ष, ईओ तथा नगरपालिका के रिकार्ड कीपर एवं बिल कलेक्टर ने आपसी साठ गांठ कर फर्जी दस्तावेज तैयार कर लिए। यह मामला एसडीएम देवबंद और सीजेएम सहारनपुर की कोर्ट में चला। जिसके बाद मौलवी मुजम्मिल ने नगर पालिका द्वारा एसडीएम न्यायालय एवं सीजेएम कोर्ट में अलग-अलग प्रमाणित दस्तावेजों को चुनौती दी। न्यायालय ने मो. अकबर, ईओ डॉ. धीरेंद्र कुमार राय, नीरज गोस्वामी और पालिकाध्यक्ष जियाउद्दीन अंसारी के खिलाफ आए साक्ष्यों को स्वीकार करते हुए पुलिस को न्यायिक जांच के लिए निर्देशित किया। आरोप है कि पालिका ने अधिनियम 1972 के तहत मौलवी मुजम्मिल को उनकी बैनामा खरीद संपत्ति से बेदखल का वाद दायर करते हुए अलग दस्तावेज पेश किए। न्यायालय ने पालिका द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों का संज्ञान लेते हुए उन्हें अलग-अलग न्यायालयों में अलग-अलग पाया। जिसे न्यायालय ने विपक्षीगणों द्वारा अपने पद का दुरुपयोग करार देते हुए आपराधिक षड्यंत्र करार दिया। पुलिस ने बुधवार को न्यायालय के आदेश पर सभी आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 420, 466, 467,471 एवं 120बी के तहत मामला दर्ज कर लिया।
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दबाव बनाने के मकसद से झूठा मुकदमा दर्ज कराया
मोहल्ला खानकाह निवासी मौलवी मुजम्मिल जिस जमीन को अपनी बता रहा है वह नगरपालिका की है। उस पर शौचालय बना हुआ है। असम के रहने वाले इस मौलवी ने करीब 25 साल पहले उस जगह पर कब्जा पर लिया था। जिसका मुकदमा नगरपालिका की तरफ से अदालत में चल रहा है। मुजम्मिल ने नगरपालिका पर दबाव बनाने के लिए झूठा मुकदमा दर्ज कराया है। आरोप लगाया कि मौलवी मुजम्मिल भू-माफिया किस्म का व्यक्ति है। -जियाउद्दीन अंसारी, पालिकाध्यक्ष देवबंद
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