{"_id":"5d8fa8118ebc3e016e02858b","slug":"careful-drinking-adulterated-milk-can-affect-health-muzaffarnagar-news-mrt4457852181","type":"story","status":"publish","title_hn":"मिलावटी दूध पी रहे है नागरिक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मिलावटी दूध पी रहे है नागरिक
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सावधान ! मिलावटी दूध पीने से सेहत हो सकता है प्रभावित
मुजफ्फरनगर। सावधान हो जाइए। आपके जिले में बिकने वाला दूध मिलावटी है। मिलावटी दूध के पीने से लोगों का सेहत प्रभावित हो सकता है। मांग और उत्पादन में काफी अंतर होने के कारण लोगों को मिलावटी दूध पीने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से कराई गई जांच में आधे से ज्यादा दूध के नमूने फेल हो गए। दूध निर्धारित मानकों पर खरा नहीं पाया गया, जबकि एक नमूने में वनस्पति तेल की मिलावट होने की पुष्टि हुई।
मुजफ्फरनगर समेत जिले के अन्य सभी शहरों में बड़ी तादाद में दूधिया ग्रामीण क्षेत्रों से दूध सप्लाई करते हैं। जिले की बड़ी आबादी इन्हीं से दूध लेती है। इसके अलावा अन्य कई ब्रांडेड कंपनियों के दूध की भी अच्छी खासी खपत है। जनपद की आबादी के हिसाब से प्रतिदिन अनुमानित साढ़े छह लाख लीटर दूध की आवश्यकता होती है। हालांकि उत्पादन करीब पांच से साढ़े पांच लाख लीटर प्रतिदिन के बीच है। उत्पादन एवं आपूर्ति के इस अंतर को मिलावट से पूरा किया जा रहा है। लालच में दूधिया पानी व अन्य कई तरह की मिलावट कर दूध की सप्लाई करते हैं। खाद्य सुरक्षा विभाग के आंकड़े भी इसकी गवाही देते हैं। विभाग के अनुसार अप्रैल से अब तक दूध के 51 नमूनों की जांच रिपोर्ट प्राप्त हुई है। इनमें से 30 नमूनों में मिलावट पाई गई। दूध में फैट या प्रोटीन की मात्रा मानक से कम मिली है। एक नमूने में हानिकारक मिलावट होने की पुष्टि हुई। इसमें वनस्पति तेल की मिलावट पाई गई है।
कम हो रही दुधारू पशुओं की संख्या
मुजफ्फरनगर। जनपद में दुधारू पशुओं की संख्या में भी गिरावट आ रही है। 2012 में हुई पशु गणना में जनपद में 207966 गाय तथा 552906 भैंस थी। इससे पहले 2007 में हुई पशु गणना में जिले में 229872 गाय एवं 824260 भैंसें थी। हालांकि 2007 में शामली भी मुजफ्फरनगर जनपद में था। वर्तमान में पशु गणना का कार्य चल रहा है। यह अपने अंतिम दौर में है। माना जा रहा है कि दुधारू पशुओं की संख्या में और कमी सामने आ रही है।
विज्ञापन
गाय और भैंस के दूध के निर्धारित मानक
मुख्य खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों के मुताबिक गाय का दूध थोड़ा पतला होता है। गाय के दूध में चार प्रतिशत वसा और साढ़े आठ प्रतिशत सॉलिड नॉट फैट होना चाहिए। भैंस के दूध में छह प्रतिशत वसा और नौ प्रतिशत सॉलिड नॉट फैट का मानक निर्धारित होता है। नमूनों की जांच में इस मानक में अंतर आता है तो नमूना फेल हो जाता है।
घर पर पता कर सकते हैं दूध की शुद्धता
मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी विवेक कुमार बताते हैं कि दूध की शुद्धता घर पर ही पता की जा सकती है। दूध को चिकने फर्श पर डालें तो वह लाइन छोड़ता हुआ बहता है। यदि लाइन नहीं बनी तो मिलावट है। मिलावटी दूध में अजीब सी दुर्गंध भी आती है।
पाउडर और वनस्पति तेल से तैयार हो रहा दूध
मुजफ्फरनगर। खाद्य सुरक्षा विभाग मिलावट के खिलाफ केवल त्योहारी सीजन में ही अभियान चलाता है। इसके बाद यह अभियान ठंडा पड़ जाता है। एक अनुमान के मुताबिक मुजफ्फरनगर शहर में करीब 300 दूधिया दूध की सप्लाई करते हैं। त्योहारी सीजन में दूध की मांग पूरी करने के लिए ये उसमें पानी और दुग्ध पाउडर की मिलावट करते हैं। फैट बढ़ाने के लिए इसमें वनस्पति तेल मिलाते हैं। मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी विवेक कुमार ने बताया कि बीते छह माह में एक नमूने में वनस्पति तेल की मिलावट पाई है। इसे हानिकारक श्रेणी में रखा गया है।
कृत्रिम दूध होता है नुकसानदायक
मुजफ्फरनगर। वरिष्ठ फिजिशियन डा. लोकेश गुप्ता बताते हैं कि पाउडर और वनस्पति तेल मिलाकर बनाया गया दूध प्राकृतिक नहीं है। प्राकृतिक दूध में पाए जाने वाले कंटेंट नुकसानदायक नहीं होते, जबकि वनस्पति तेल का गलत प्रभाव शरीर पर पड़ेगा। इससे पेट, हृदय एवं हार्ट से संबंधित रोग हो सकते हैं।
विज्ञापन
मुजफ्फरनगर। सावधान हो जाइए। आपके जिले में बिकने वाला दूध मिलावटी है। मिलावटी दूध के पीने से लोगों का सेहत प्रभावित हो सकता है। मांग और उत्पादन में काफी अंतर होने के कारण लोगों को मिलावटी दूध पीने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से कराई गई जांच में आधे से ज्यादा दूध के नमूने फेल हो गए। दूध निर्धारित मानकों पर खरा नहीं पाया गया, जबकि एक नमूने में वनस्पति तेल की मिलावट होने की पुष्टि हुई।
मुजफ्फरनगर समेत जिले के अन्य सभी शहरों में बड़ी तादाद में दूधिया ग्रामीण क्षेत्रों से दूध सप्लाई करते हैं। जिले की बड़ी आबादी इन्हीं से दूध लेती है। इसके अलावा अन्य कई ब्रांडेड कंपनियों के दूध की भी अच्छी खासी खपत है। जनपद की आबादी के हिसाब से प्रतिदिन अनुमानित साढ़े छह लाख लीटर दूध की आवश्यकता होती है। हालांकि उत्पादन करीब पांच से साढ़े पांच लाख लीटर प्रतिदिन के बीच है। उत्पादन एवं आपूर्ति के इस अंतर को मिलावट से पूरा किया जा रहा है। लालच में दूधिया पानी व अन्य कई तरह की मिलावट कर दूध की सप्लाई करते हैं। खाद्य सुरक्षा विभाग के आंकड़े भी इसकी गवाही देते हैं। विभाग के अनुसार अप्रैल से अब तक दूध के 51 नमूनों की जांच रिपोर्ट प्राप्त हुई है। इनमें से 30 नमूनों में मिलावट पाई गई। दूध में फैट या प्रोटीन की मात्रा मानक से कम मिली है। एक नमूने में हानिकारक मिलावट होने की पुष्टि हुई। इसमें वनस्पति तेल की मिलावट पाई गई है।
विज्ञापन
कम हो रही दुधारू पशुओं की संख्या
मुजफ्फरनगर। जनपद में दुधारू पशुओं की संख्या में भी गिरावट आ रही है। 2012 में हुई पशु गणना में जनपद में 207966 गाय तथा 552906 भैंस थी। इससे पहले 2007 में हुई पशु गणना में जिले में 229872 गाय एवं 824260 भैंसें थी। हालांकि 2007 में शामली भी मुजफ्फरनगर जनपद में था। वर्तमान में पशु गणना का कार्य चल रहा है। यह अपने अंतिम दौर में है। माना जा रहा है कि दुधारू पशुओं की संख्या में और कमी सामने आ रही है।
विज्ञापन
गाय और भैंस के दूध के निर्धारित मानक
मुख्य खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों के मुताबिक गाय का दूध थोड़ा पतला होता है। गाय के दूध में चार प्रतिशत वसा और साढ़े आठ प्रतिशत सॉलिड नॉट फैट होना चाहिए। भैंस के दूध में छह प्रतिशत वसा और नौ प्रतिशत सॉलिड नॉट फैट का मानक निर्धारित होता है। नमूनों की जांच में इस मानक में अंतर आता है तो नमूना फेल हो जाता है।
घर पर पता कर सकते हैं दूध की शुद्धता
मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी विवेक कुमार बताते हैं कि दूध की शुद्धता घर पर ही पता की जा सकती है। दूध को चिकने फर्श पर डालें तो वह लाइन छोड़ता हुआ बहता है। यदि लाइन नहीं बनी तो मिलावट है। मिलावटी दूध में अजीब सी दुर्गंध भी आती है।
पाउडर और वनस्पति तेल से तैयार हो रहा दूध
मुजफ्फरनगर। खाद्य सुरक्षा विभाग मिलावट के खिलाफ केवल त्योहारी सीजन में ही अभियान चलाता है। इसके बाद यह अभियान ठंडा पड़ जाता है। एक अनुमान के मुताबिक मुजफ्फरनगर शहर में करीब 300 दूधिया दूध की सप्लाई करते हैं। त्योहारी सीजन में दूध की मांग पूरी करने के लिए ये उसमें पानी और दुग्ध पाउडर की मिलावट करते हैं। फैट बढ़ाने के लिए इसमें वनस्पति तेल मिलाते हैं। मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी विवेक कुमार ने बताया कि बीते छह माह में एक नमूने में वनस्पति तेल की मिलावट पाई है। इसे हानिकारक श्रेणी में रखा गया है।
कृत्रिम दूध होता है नुकसानदायक
मुजफ्फरनगर। वरिष्ठ फिजिशियन डा. लोकेश गुप्ता बताते हैं कि पाउडर और वनस्पति तेल मिलाकर बनाया गया दूध प्राकृतिक नहीं है। प्राकृतिक दूध में पाए जाने वाले कंटेंट नुकसानदायक नहीं होते, जबकि वनस्पति तेल का गलत प्रभाव शरीर पर पड़ेगा। इससे पेट, हृदय एवं हार्ट से संबंधित रोग हो सकते हैं।