{"_id":"6015a6e78ebc3e543c286cfe","slug":"bku-became-the-head-of-the-country-s-farmers-movement-muzaffarnagar-news-mrt5229900156","type":"story","status":"publish","title_hn":"देश के किसान आंदोलन का सिरमौर बनी भाकियू","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
देश के किसान आंदोलन का सिरमौर बनी भाकियू
विज्ञापन
देश के किसान आंदोलन का सिरमौर बनी भाकियू
मुजफ्फरनगर। किसान मसीहा चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत के बाद पहली बार भाकियू की राजधानी सिसौली ने भाकियू सुप्रीमो नरेश टिकैत के नेतृत्व में शक्ति प्रदर्शन किया है। राकेश टिकैत के रोने का वीडियो वायरल होने के बाद बृहस्पतिवार की रात में सिसौली में किसानों की भीड़ जुट गई। खुफिया एजेंसियों के माध्यम से लखनऊ पहुंची सूचना के बाद गाजियाबाद पुलिस को बैकफुट पर आना पड़ा। भाकियू एक बार फिर पूरे किसान आंदोलन की सिरमौर बन गई है।
देश में किसानों की लड़ाई लड़ने वाली भारतीय किसान यूनियन पर किसानों ने एक बार फिर अपना भरोसा जताया है। स्वर्गीय चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत के बाद पहली बार ऐसा हुआ कि किसान एकतरफा उनके बेटों भाकियू सुप्रीमो नरेश टिकैत और राकेश टिकैत के साथ खड़ा दिखाई दिया। नरेश टिकैत की एक हुंकार पर राजकीय इंटर कॉलेज के मैदान में किसानों का सैलाब उमड़ पड़ा। खुफिया एजेंसियों के माध्यम से सूचना लखनऊ में योगी सरकार तक पहुंची तो गाजियाबाद पुलिस को पीछे कदम खींचना पड़ा। लोगों में भाकियू के प्रति इतना स्नेह दिखाई दिया कि गाजीपुर बार्डर की घटना को अपने मान-सम्मान से जोड़ लिया। सिसौली में महापंचायत के दिन बाजार तक बंद रहे। इस घटना से देश की किसान राजनीति के परिदृश्य में भाकियू एक बार फिर सिरमौर होकर सामने आई है। देश में चल रहे किसान आंदोलन को अब भाकियू ही लीड करती दिखाई दे रही है।
विज्ञापन
मुजफ्फरनगर। किसान मसीहा चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत के बाद पहली बार भाकियू की राजधानी सिसौली ने भाकियू सुप्रीमो नरेश टिकैत के नेतृत्व में शक्ति प्रदर्शन किया है। राकेश टिकैत के रोने का वीडियो वायरल होने के बाद बृहस्पतिवार की रात में सिसौली में किसानों की भीड़ जुट गई। खुफिया एजेंसियों के माध्यम से लखनऊ पहुंची सूचना के बाद गाजियाबाद पुलिस को बैकफुट पर आना पड़ा। भाकियू एक बार फिर पूरे किसान आंदोलन की सिरमौर बन गई है।
देश में किसानों की लड़ाई लड़ने वाली भारतीय किसान यूनियन पर किसानों ने एक बार फिर अपना भरोसा जताया है। स्वर्गीय चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत के बाद पहली बार ऐसा हुआ कि किसान एकतरफा उनके बेटों भाकियू सुप्रीमो नरेश टिकैत और राकेश टिकैत के साथ खड़ा दिखाई दिया। नरेश टिकैत की एक हुंकार पर राजकीय इंटर कॉलेज के मैदान में किसानों का सैलाब उमड़ पड़ा। खुफिया एजेंसियों के माध्यम से सूचना लखनऊ में योगी सरकार तक पहुंची तो गाजियाबाद पुलिस को पीछे कदम खींचना पड़ा। लोगों में भाकियू के प्रति इतना स्नेह दिखाई दिया कि गाजीपुर बार्डर की घटना को अपने मान-सम्मान से जोड़ लिया। सिसौली में महापंचायत के दिन बाजार तक बंद रहे। इस घटना से देश की किसान राजनीति के परिदृश्य में भाकियू एक बार फिर सिरमौर होकर सामने आई है। देश में चल रहे किसान आंदोलन को अब भाकियू ही लीड करती दिखाई दे रही है।
विज्ञापन