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Muzaffarnagar News: रजिस्ट्रेशन विभाग की नीतियों केे विरोध में हाई कोर्ट तक जाने का एलान
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- रजिस्ट्रेशन विभाग की नीतियों केे विरोध में आंदोलन किया तेज
संवाद न्यूज एजेंसी
मुजजफ्फरनगर। रजिस्ट्रेशन विभाग की नीतियों केे विरोध में तहसील मुख्यालयों पर किया जा रहा आंदोलन तेज कर दिया गया हैं। धरना देने वाले सभी दस्तावेज लेखकों, स्टांप विक्रेताओं ने मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग की हैं। कहा गया कि उनकी संयुक्त संघर्ष समिति हाई कोर्ट तक इस मामले को उठाएंगी।
संयुक्त संघर्ष समिति के अध्यक्ष योगेंद्र कांबोज ने कहा कि सरकार प्रदेश में बीस हजार निबंधक मित्र बना रही हैं। ऐसा करने से पूर्व सदर तहसील में रजिस्ट्री करने के कार्य में लगे पांच सौ से अधिक लोग बेरोजगार हो जाएंगे। इस नियम को आस्ट्रेलिया में लागू किया गया था लेकिन वहां यह निगम सही नहीं रहा था। अब इस नियम को प्रदेश में लागू करने का प्रयास किया जा रहा हैं।
उन्होंने कहा कि वह लोग 16 जून से तहसील में धरना देकर बैठे हुए हैं। अब यह आंदोलन दस्तावेज लेखकों और स्टांप विक्रेताओं तक सीमित नहीं रहा है। बल्कि प्रदेश के लगभग 70 प्रतिशत आम, मध्यम वर्गीय, ग्रामीण व मजदूर वर्ग के लोगों को भी आंदोलन बन गया है।
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कहा गया कि इस बारे में कैबिनेट मंत्री अनिल कुमार व राज्य मंत्री कपिल देव अग्रवाल को भी ज्ञापन दिया गया है। उन्हें आश्वासन दिया कि इस बारे में विभागीय मंत्री से वार्ता की जाएगी। दस दिन से रजिस्ट्री का काम बंद हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी एक ज्ञापन भेजा गया हैं। इसमें दस्तावेज लेखन एवं पंजीकरण की नई नीति से इस व्यवसाय से जुड़े हजारों लोगों के सामने रोजगार का संकट बन गया हैं।खतौनी की पुरानी प्रणाली की तुलना में नई रियल टाइम खतौनी व्यवस्था से आम जनता का खर्च और परेशानी दोनों बढ़ गए है। इसकेे अलावा पांच मांगों को ज्ञापन में शामिल किया गया।
संयुक्त संघर्ष समिति के अध्यक्ष ने कहा कि निबंधन मित्र न बनाए जाएं और रजिस्ट्री का निजीकरण न किया जाए। कहा गया कि वह अपनी मांगों को लेकर हाई कोर्ट तक भी जाएंगे। इस दौरान हाजी कमरूज्जमा एडवोकेट, हेमंत अरोरा, संजय शिवम, किशनचंद कांबोज, रंजीत त्यागी व अन्य मौजूद रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
मुजजफ्फरनगर। रजिस्ट्रेशन विभाग की नीतियों केे विरोध में तहसील मुख्यालयों पर किया जा रहा आंदोलन तेज कर दिया गया हैं। धरना देने वाले सभी दस्तावेज लेखकों, स्टांप विक्रेताओं ने मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग की हैं। कहा गया कि उनकी संयुक्त संघर्ष समिति हाई कोर्ट तक इस मामले को उठाएंगी।
संयुक्त संघर्ष समिति के अध्यक्ष योगेंद्र कांबोज ने कहा कि सरकार प्रदेश में बीस हजार निबंधक मित्र बना रही हैं। ऐसा करने से पूर्व सदर तहसील में रजिस्ट्री करने के कार्य में लगे पांच सौ से अधिक लोग बेरोजगार हो जाएंगे। इस नियम को आस्ट्रेलिया में लागू किया गया था लेकिन वहां यह निगम सही नहीं रहा था। अब इस नियम को प्रदेश में लागू करने का प्रयास किया जा रहा हैं।
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उन्होंने कहा कि वह लोग 16 जून से तहसील में धरना देकर बैठे हुए हैं। अब यह आंदोलन दस्तावेज लेखकों और स्टांप विक्रेताओं तक सीमित नहीं रहा है। बल्कि प्रदेश के लगभग 70 प्रतिशत आम, मध्यम वर्गीय, ग्रामीण व मजदूर वर्ग के लोगों को भी आंदोलन बन गया है।
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कहा गया कि इस बारे में कैबिनेट मंत्री अनिल कुमार व राज्य मंत्री कपिल देव अग्रवाल को भी ज्ञापन दिया गया है। उन्हें आश्वासन दिया कि इस बारे में विभागीय मंत्री से वार्ता की जाएगी। दस दिन से रजिस्ट्री का काम बंद हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी एक ज्ञापन भेजा गया हैं। इसमें दस्तावेज लेखन एवं पंजीकरण की नई नीति से इस व्यवसाय से जुड़े हजारों लोगों के सामने रोजगार का संकट बन गया हैं।खतौनी की पुरानी प्रणाली की तुलना में नई रियल टाइम खतौनी व्यवस्था से आम जनता का खर्च और परेशानी दोनों बढ़ गए है। इसकेे अलावा पांच मांगों को ज्ञापन में शामिल किया गया।
संयुक्त संघर्ष समिति के अध्यक्ष ने कहा कि निबंधन मित्र न बनाए जाएं और रजिस्ट्री का निजीकरण न किया जाए। कहा गया कि वह अपनी मांगों को लेकर हाई कोर्ट तक भी जाएंगे। इस दौरान हाजी कमरूज्जमा एडवोकेट, हेमंत अरोरा, संजय शिवम, किशनचंद कांबोज, रंजीत त्यागी व अन्य मौजूद रहे।