{"_id":"61f8272f3f5e4b546e1c2a90","slug":"anganwadi-will-identify-children-with-special-needs-in-the-district-muzaffarnagar-news-mrt575349324","type":"story","status":"publish","title_hn":"विशिष्ट आवश्यकता वाले बच्चों को चिन्हित करेगी आंगनबाडी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
विशिष्ट आवश्यकता वाले बच्चों को चिन्हित करेगी आंगनबाडी
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मुजफ्फरनगर। बेसिक शिक्षा विभाग ने आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के एक दिवसीय प्रशिक्षण का आयोजन किया। इस प्रशिक्षण शिविर में दिव्यांग बच्चों को चिन्हित करने के लिए आंगनबाड़ी को प्रशिक्षण दिया गया। बच्चों की स्क्रीनिंग का तरीका बताया गया।
बीएसएस ऑफिस के सभागार में आयोजित प्रशिक्षण शिविर में बीएसए मायाराम ने कहा कि अब से पहले छह से 14 वर्ष तक के बच्चों का डाटा रहता था। अब तीन से पांच वर्ष तक के बच्चों का डाटा भी एकत्र करना होगा। दिव्यांग बच्चों को शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए सरकार यह अभियान चला रही है। आंगनबाड़ी के माध्यम से दिव्यांग बच्चों की पहचान कर उनके लिए आगे की कार्रवाई की जा सकेगी। दिव्यांगता का पता लगने पर उसके बचाव एवं व्यवस्थापन का कार्य किया जा सकता है, इसीलिए यह प्रशिक्षण महत्वपूर्ण है। जिला समन्वयक सुशील कुमार ने कहा कि प्रत्येक ब्लाक पर प्रशिक्षण देने के लिए जिला स्तर पर एक ब्लाक से तीन मास्टर ट्रेनर को प्रशिक्षण दिया गया है। आंगनबाड़ी केंद्रों पर पंजीकृत बच्चों में शारीरिक बाधाओं वाले बच्चों का अधिक से अधिक चिन्हांकन किया जाएगा। प्रशिक्षण में एआरपी एवं स्पेशल एजूकेटर उपस्थित रहे।
विज्ञापन
बीएसएस ऑफिस के सभागार में आयोजित प्रशिक्षण शिविर में बीएसए मायाराम ने कहा कि अब से पहले छह से 14 वर्ष तक के बच्चों का डाटा रहता था। अब तीन से पांच वर्ष तक के बच्चों का डाटा भी एकत्र करना होगा। दिव्यांग बच्चों को शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए सरकार यह अभियान चला रही है। आंगनबाड़ी के माध्यम से दिव्यांग बच्चों की पहचान कर उनके लिए आगे की कार्रवाई की जा सकेगी। दिव्यांगता का पता लगने पर उसके बचाव एवं व्यवस्थापन का कार्य किया जा सकता है, इसीलिए यह प्रशिक्षण महत्वपूर्ण है। जिला समन्वयक सुशील कुमार ने कहा कि प्रत्येक ब्लाक पर प्रशिक्षण देने के लिए जिला स्तर पर एक ब्लाक से तीन मास्टर ट्रेनर को प्रशिक्षण दिया गया है। आंगनबाड़ी केंद्रों पर पंजीकृत बच्चों में शारीरिक बाधाओं वाले बच्चों का अधिक से अधिक चिन्हांकन किया जाएगा। प्रशिक्षण में एआरपी एवं स्पेशल एजूकेटर उपस्थित रहे।
विज्ञापन