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बेटों ने घर से निकाला, मां ने वृद्ध आश्रम में ही रखा उनके लिए उपवास

Fri, 13 Oct 2017 12:06 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर Updated Fri, 13 Oct 2017 12:06 AM IST
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Ahoi Ashtami fast
वृद्ध आश्रम में बेटों की सलामती के लिए उपवास रखने वाली माताएं। - फोटो : अमर उजाला

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खुद जिन्हें अपने हाथों से पाल कर बड़ा किया। खुद गीले में सोई, लेकिन जिगर के टुकड़े को सूखे में सुलाया। वही मां अब जीवन के अंतिम पड़ाव पर आई तो पराई हो गई। बेटों के घर में मां के लिए भले ही जगह न रही हो, लेकिन ममता के सागर से भरी मां उन्हीं के लिए दिनभर प्यासी भी रही और भूख भी सही। वृद्धा आश्रम में भी अहोई अष्टमी पर वृद्ध मां ने बेटों की लंबी आयु, कामयाबी के लिए व्रत रखा और दुआएं मांगी।  

अहोई अष्टमी पर्व पर मां बच्चों के लिए व्रत रखती है। यह व्रत सुबह से शाम दिन ढलने तक रहता है। इस बीच मां अन्न तो दूर जल का एक कतरा भी ग्रहण नहीं करती है। शहर में पर्व भले ही हर्षोल्लास से मनाया गया हो, लेकिन वृद्धा आश्रम के भीतर सिसकियां दूरियों की गवाही देती नजर आईं। श्री मदनानंद वैदिक वानप्रस्थ वृद्धाश्रम में भोकरहेड़ी निवासी वृद्धा बाला कहतीं हैं कि उसकी दो लड़की और एक लड़का है। बेटा एक कंपनी में कार्य करता है, लेकिन वह वृद्धाश्रम में रहकर जीवनयापन कर रही है।
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घर की रार से अकेलापन भला है। बेटे के लिए अहोई का व्रत रखा है। उसकी लंबी उम्र और कामयाबी की दुआएं मांगी हैं। वृद्धा भगवती ने बताया कि भरा-पूरा परिवार है। चार बेटे और तीन बेटियां हैं, लेकिन किसी के घर में एक मां के लिए जगह नहीं है। पिछले कई साल से वृद्धाश्रम में भगवती अपना समय बीता रही हैं। बेटे के लिए अहोई का व्रत रखना नहीं भूलती हैं।
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बृहस्पतिवार को भी व्रत रखकर भगवान से बच्चों की लंबी उम्र, कामयाबी के लिए मन्नतें मांगी हैं। रुद्रपुर निवासी वृद्धा राजधानी कहती हैं कि एक बेटा, एक बेटी हैं। सब पंजाब में रहते हैं, लेकिन उसके लिए कहीं जगह नहीं है। वह अपनी बाकी की जिंदगी को वृद्धाआश्रम में गुजार रही है। कहती हैं मां हूं, ममता के आगे हारी हूं। बेटा बड़ी नौकरी करता है, लेकिन उसके लिए घर में मामूली सी भी जगह नहीं है। बृहस्पतिवार को तीनों ने अहोई का व्रत रखकर मन्नतें मांगी हैं।  

रोजाना एक गिलास दूध, भर पेट भोजन 
मुजफ्फरनगर। वृद्धाश्रम में सभी वृद्ध महिलाओं को शाम के समय एक गिलास दूध दिया जाता है, जबकि भरपेट भोजन की व्यवस्था है। दूध गऊशाला से आता है, जबकि अनाज आदि समाज के अनेक वर्गों से मिलता है। जिसके चलते प्रतिदिन भोजन बनाया जाता है। ताकि वृद्धाओं को कोई परेशानी न हो सके।  


आश्रम में डॉक्टर रहते हैं तैनात 
मुजफ्फरनगर। वृद्धाश्रम में डॉ आरएम जिंदल तैनात हैं, जो वृद्धाओं की देखरेख में लगे रहते हैं। चिकित्सक जिंदल कहते हैं कि वृद्धाओं की सेवा कर मन को शांति मिलती है। दवाईयों के साथ उनके इलाज की जिम्मेदारी उन्हीं के कंधों पर है।  
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