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शिक्षा ऋषि की देन कृषि विज्ञान केंद्र

Wed, 04 Mar 2020 12:27 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 04 Mar 2020 12:27 AM IST
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Agricultural Science Center Baghra Muzaffarnagar
वीतराग स्वामी कल्याण देव। (फाइल फोटो) - फोटो : MUZAFFARNAGAR
शिक्षा ऋषि की देन है कृषि विज्ञान केंद्र
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वर्ष 1990 में बघरा , हस्तिनापुर में की थी स्थापना
राज्यपाल आनंदी बेन पटेल आज किसानों को करेंगी प्रेरित
(फोटो)
अमर उजाला ब्यूरो
मुजफ्फरनगर। शिक्षा ऋषि वीतराग स्वामी कल्याणदेव की दूरदृष्टि से जिले में कृषि विज्ञान केंद्र की नींव पड़ी थी। राज्यपाल आनंदी बेन पटेल बघरा भ्रमण के दौरान बुधवार को खेती-किसानी की नई तकनीकों का अवलोकन करेगी, वहीं कृषि आधारित उत्पादों को रोजगार से जोड़ने के लिए ग्रामीणों को प्रेरित भी करेंगी।

बघरा को शिक्षा का केंद्र बना गए स्वामी कल्याणदेव ने तीन दशक पहले ही किसानों को खेती की नई तकनीक, उत्तम बीज की उपलब्धता कराने को कृषि विज्ञान केंद्र की स्थापना की। कल्याणकारी इंटर कालेज बघरा के वार्षिकोत्सव में तत्कालीन लोकसभा अध्यक्ष एवं पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री बलराम जाखड़ पधारे थे। शिक्षा ऋषि की इच्छा को भांप कर जाखड़ ने जिले में कृषि विज्ञान केंद्र की स्थापना में मदद की घोषणा की। स्वामी ने अपने कॉलेज के कृषि फार्म की भूमि में यह विज्ञान केंद्र प्रारंभ किया। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, पूसा दिल्ली के महानिदेशक डॉ राजेंद्र सिंह परोदा ने दो बार बघरा का निरीक्षण कर किसानों का मार्गदर्शन किया था। वर्ष 1992 में कृषि विज्ञान केंद्र का विधिवत संचालन हो गया, उस समय जीबी पंत यूनिवर्सिटी पंतनगर से यह संस्था संबद्ध हुई। उत्तराखंड सृजन के बाद मेरठ के सरदार वल्लभ भाई पटेल विश्वविद्यालय मोदीपुरम से बघरा स्थित स्वामी कल्याणदेव कृषि विज्ञान केंद्र जुड़ गया। शिक्षा ऋषि के परम शिष्य स्वामी ओमानंद बताते हैं कि बघरा और हस्तिनापुर में गुरुदेव ने कृषि विज्ञान केंद्रों की स्थापना कर खेती-किसानी को उन्नति का मार्ग दिखाया। बघरा कृषि केंद्र को बनत जलालपुर गांव में वीतराग संत ने मदन मोहन मालवीय इंटर कालेज की अपनी संस्था की करीब 100 भूमि दान दी, जहां अब शामली जिले का अलग कृषि विज्ञान केंद्र बन रहा है। कल्याणकारी इंटर कालेज के पूर्व प्रवक्ता गजेंद्र पाल सिंह बताते हैं कि प्रारंभ में कृषि विज्ञान केंद्र बघरा का मार्ग 20 फीट चौड़ा था। पूसा महानिदेशक डॉ परोदा कहने लगे, स्वामीजी ने रास्ते की भूमि कम दी है। उसके बाद शिक्षा ऋषि ने कॉलेज भूमि से 40 फीट का रास्ता दिया। गवर्नर आनंदी बेन पटेल का मुख्य कार्यक्रम बघरा में ही रखा गया है।
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