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दूसरों के लिए किया कार्य ही है धर्म : सच्चिदानंद
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खतौली। आचार्य सच्चिदानंद महाराज ने कहा कि मनन करके ही कार्य करने वाला मनुष्य कहा जा सकता है। दूसरे जीवों को जन्म से ही स्वाभाविक ज्ञान होता है, जबकि मानव को ज्ञान सीखना पड़ता है। वहीं, दूसरों के लिए किया गया कार्य ही धर्म बन जाता है।
कस्बे के मोहल्ला शिवपुरी में आयोजित धार्मिक कार्यक्रम में स्वामी सच्चिदानंद महराज ने कहा कि अपने लिए किया गया कार्य कर्म होता है, लेकिन वही कार्य दूसरों के लिए किया जाए तो धर्म बन जाता है। मोहित शास्त्री ने भगवान राम और भरत का उदाहरण देकर भाइयों के साथ प्यार से रहने का आह्वान किया।
आर्य भजनोपदेशिका सुकीर्ति व हरिश्चंद आर्य ने सुंदर भजन गाकर श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध किया। इससे पहले होली का यज्ञ किया गया, जिसमें पंडित रामदेव पुरोहित, विकास व पिंकी आर्य यज्ञमान रहे। मौके पर विक्रम सिंह, सत्येंद्र आर्य, जगदीश सिंह, अजेश आर्य, सुशील आर्य, जयपाल सिंह, रामशरण आर्य, भगवान सिंह और पवन कौशिक आदि मौजूद रहे।
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कस्बे के मोहल्ला शिवपुरी में आयोजित धार्मिक कार्यक्रम में स्वामी सच्चिदानंद महराज ने कहा कि अपने लिए किया गया कार्य कर्म होता है, लेकिन वही कार्य दूसरों के लिए किया जाए तो धर्म बन जाता है। मोहित शास्त्री ने भगवान राम और भरत का उदाहरण देकर भाइयों के साथ प्यार से रहने का आह्वान किया।
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आर्य भजनोपदेशिका सुकीर्ति व हरिश्चंद आर्य ने सुंदर भजन गाकर श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध किया। इससे पहले होली का यज्ञ किया गया, जिसमें पंडित रामदेव पुरोहित, विकास व पिंकी आर्य यज्ञमान रहे। मौके पर विक्रम सिंह, सत्येंद्र आर्य, जगदीश सिंह, अजेश आर्य, सुशील आर्य, जयपाल सिंह, रामशरण आर्य, भगवान सिंह और पवन कौशिक आदि मौजूद रहे।
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