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हार पर भाजपा को करना होगा मंथन
Muzaffar nagar
Updated Tue, 21 Oct 2014 05:32 AM IST
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शामली। छह महीने पहले हुए लोकसभा चुनाव के दौरान कैराना विधानसभा क्षेत्र में और उपचुनाव की वोटिंग के बूथवार आंकडे़ बता रहे हैं कि हर जगह भाजपा को मिले मतों में कमी आई है। कई स्थानों पर तो भाजपा के वोट में 30-40 फीसदी तक कमी आई है। सबसे हैरानी की बात है कि ये सभी बूथ हिंदू बहुल हैं, जिनमें गुर्जर बहुल गांव भी शामिल हैं। इसके मुकाबले सपा के वोट में प्रत्येक बूथ पर बढ़ोतरी हुई है। लोस चुनाव के दौरान कई बूथ पर जहां सपा का खाता ही नहीं खुला था, इस बार वहां सपा प्रत्याशी को सैकड़ों वोट मिली हैं। आखिर इन छह महीनों में मतदाताओं का मन क्यों बदला इस पर मंथन करने की उसे जरूरत है।
लोकसभा चुनाव के दौरान कैराना विधानसभा क्षेत्र में हिंदू मतों का भाजपा के पक्ष में ध्रुवीकरण हुआ था। गुर्जर,जाट, सैनी, कश्यप, सभी बिरादरियों ने लगभग एकतरफा मतदान किया था, लेकिन छह महीने बाद हुए चुनाव में कैराना विधानसभा क्षेत्र के मतदाताओं का मन ही बदल गया। उपचुनाव के मतगणना आंकड़ों के अनुसार विधानसभा क्षेत्र के हिंदू बहुल करीब प्रत्येक बूथ पर भाजपा का वोट बैंक घटा है, जबकि सपा ने हिंदू मतों में सेंधमारी की।
भाजपा प्रत्याशी अनिल गुर्जर हैं। उनके गुर्जर बहुल जगनपुरा गांव के बूथ 264 पर लोकसभा चुनाव में भाजपा को 745 मत मिले थे, जो कि उपचुनाव में घटकर केवल 396 रह गए। सपा को यहां लोस में केवल दो मत मिले थे, जबकि उपचुनाव में सपा ने यहां से 150 वोट बटोरे। इसी तरह जाट बहुल ऊन में बूथ 116 पर लोस चुनाव में भाजपा को 455वोट मिले थे, जबकि उपचुनाव में भाजपा को केवल 307 मत मिले। लोस में यहां सपा को केवल नौ मत मिले थे, जबकि इस बार वह 101 मत लेने में सफल रही। इसी तरह गुर्जर बहुल बुच्चाखेड़ी, सैनी बहुल झाड़खेडी, कश्यप बहुल गांवों में भी भाजपा को लोकसभा चुनाव मेें मिली वोटों की तुलना में उपचुनाव में मतों में कमी आई और यही उसकी हार की वजह बनी। आखिर इन छह महीनों में मतदाताओं का मन क्यों बदला इस पर भाजपा को चिंतन करने की जरूरत होगी।
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गांव बूथ मिली वोट लोकसभा मिली वोट उपचुनाव
भाजपा सपा भाजपा सपा
ऊ न 116 455 09 307 101
शेखपुरा 146 1221 00 569 50
खोड़समा 19 461 61 407 144
बुच्चाखेड़ी 187 882 02 472 172
शीतलगढ़ी 40 634 22 451 145
जगनपुरा 264 745 02 396 150
बीनड़ा 253 720 02 549 136
हार के बाद उठेे सवाल
क्या हुकुम सिंह का प्रभाव कम हुआ है?
सांसद बनने के बाद हुकुुम सिंह ने क्षेत्र में क्या काम नहीं किए?
क्या सपा के दिग्गज मंत्री हिंदू मत बांटने में सफल रहे?
अजित का बंगला छिनने से जाटों की नाराजगी भारी पड़ी ?
मतदान के दिन हुकुम सिंह क्षेत्र में नहीं निकले?
गुर्जर वोटर पूर्व मंत्री विरेंद्र सिंह के कहने पर बदले?
चुनाव प्रचार में भाजपा के दिग्गज नेता क्यों नहीं आए?
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लोकसभा चुनाव के दौरान कैराना विधानसभा क्षेत्र में हिंदू मतों का भाजपा के पक्ष में ध्रुवीकरण हुआ था। गुर्जर,जाट, सैनी, कश्यप, सभी बिरादरियों ने लगभग एकतरफा मतदान किया था, लेकिन छह महीने बाद हुए चुनाव में कैराना विधानसभा क्षेत्र के मतदाताओं का मन ही बदल गया। उपचुनाव के मतगणना आंकड़ों के अनुसार विधानसभा क्षेत्र के हिंदू बहुल करीब प्रत्येक बूथ पर भाजपा का वोट बैंक घटा है, जबकि सपा ने हिंदू मतों में सेंधमारी की।
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भाजपा प्रत्याशी अनिल गुर्जर हैं। उनके गुर्जर बहुल जगनपुरा गांव के बूथ 264 पर लोकसभा चुनाव में भाजपा को 745 मत मिले थे, जो कि उपचुनाव में घटकर केवल 396 रह गए। सपा को यहां लोस में केवल दो मत मिले थे, जबकि उपचुनाव में सपा ने यहां से 150 वोट बटोरे। इसी तरह जाट बहुल ऊन में बूथ 116 पर लोस चुनाव में भाजपा को 455वोट मिले थे, जबकि उपचुनाव में भाजपा को केवल 307 मत मिले। लोस में यहां सपा को केवल नौ मत मिले थे, जबकि इस बार वह 101 मत लेने में सफल रही। इसी तरह गुर्जर बहुल बुच्चाखेड़ी, सैनी बहुल झाड़खेडी, कश्यप बहुल गांवों में भी भाजपा को लोकसभा चुनाव मेें मिली वोटों की तुलना में उपचुनाव में मतों में कमी आई और यही उसकी हार की वजह बनी। आखिर इन छह महीनों में मतदाताओं का मन क्यों बदला इस पर भाजपा को चिंतन करने की जरूरत होगी।
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गांव बूथ मिली वोट लोकसभा मिली वोट उपचुनाव
भाजपा सपा भाजपा सपा
ऊ न 116 455 09 307 101
शेखपुरा 146 1221 00 569 50
खोड़समा 19 461 61 407 144
बुच्चाखेड़ी 187 882 02 472 172
शीतलगढ़ी 40 634 22 451 145
जगनपुरा 264 745 02 396 150
बीनड़ा 253 720 02 549 136
हार के बाद उठेे सवाल
क्या हुकुम सिंह का प्रभाव कम हुआ है?
सांसद बनने के बाद हुकुुम सिंह ने क्षेत्र में क्या काम नहीं किए?
क्या सपा के दिग्गज मंत्री हिंदू मत बांटने में सफल रहे?
अजित का बंगला छिनने से जाटों की नाराजगी भारी पड़ी ?
मतदान के दिन हुकुम सिंह क्षेत्र में नहीं निकले?
गुर्जर वोटर पूर्व मंत्री विरेंद्र सिंह के कहने पर बदले?
चुनाव प्रचार में भाजपा के दिग्गज नेता क्यों नहीं आए?