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कैराना में वोटरों ने बदलाव के लिए की वोटिंग
Muzaffar nagar
Updated Mon, 20 Oct 2014 05:31 AM IST
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शामली। पिछले चार चुनाव छोड़ दें तो कैराना विधानसभा सीट का इतिहास है कि यहां के मतदाता किसी भी पार्टी को लगातार मौका नहीं देते। इस बार भी वोटरों ने ऐसा ही किया। मतदाताओं ने बदलाव के लिए वोट कर यह सीट सपा की झोली में डाल दी।
कैराना विधानसभा सीट का इतिहास देखा जाए तो 1952 से 1996 तक यहां के मतदाताओं ने किसी भी पार्टी को लगातार कई बार मौका नहीं दिया। 1952 ,1957 में दो बार लगातार कांग्रेस चुनाव जीती, लेकिन 1962 में यहां के वोटरों ने कांग्रेस को नकार निर्दलीय चंदन सिंह पर भरोसा जताया। 1967 के चुनाव में मतदाताओं का मन फिर बदला। कांग्रेस के शफाकत जंग को मौका दिया। हालांकि 1969 के अगले ही चुनाव में वोटरों ने बीकेडी पर भरोसा जता चंद्रभान को जीत दिलाई। इसके बाद 1974 में कांग्रेस को हुकुम सिंह लोकल नेता के रूप में मिले और चुनाव लड़ाया। हुकुम सिंह कांग्रेस के टिकट पर लड़कर चुनाव जीते, लेकिन 1977 में चुनाव हार गए। इस बार मतदाताओं ने जनता पार्टी पर भरोसा जताया। हालांकि 1980 में मतदाताओं ने चौधरी चरणसिंह के जनता दल पर विश्वास किया और कांग्रेस छोड़ जनता दल में गए हुकुम सिंह को जीत दिलाई। 1985 में मतदाताओं का मन फिर बदला ओर उन्होंने फिर से कांग्रेस को जीत दिलाई। हालांकि 1989 में फिर से वोटरों ने बदलाव किया और निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में राजेश्वर बंसल यहां से चुनाव जीते। सन् 1991 में जनता दल को जीत मिली। सन् 1996 में भाजपा में शामिल हुए हुकुम सिंह। इसके बाद हुकुम सिंह ने 1996, 2002 ,2007 और फिर 2012 में लगातार चार बार चुनाव जीते, जो इस सीट पर किसी भी पार्टी प्रत्याशी के चुनाव जीतने का इतिहास है। हुकुम सिंह के सांसद बनने के बाद पार्टी ने पहली बार हुकुुम सिंह से अलग किसी नए चेहरे केा चुनाव मैदान में उतारा था। कैराना के मतदाताओं ने अपनी पुरानी परंपरा का निर्वाह करते हुए इस बार बदलाव के लिए मतदान किया और इस सीट का इतिहास बदल दिया।
कैराना विधानसभा सीट का अब तक का सफर
सन विजेता पार्टी
1952 केशव गुप्ता कांग्रेस
1957 विरेंद्र वर्मा कांग्रेस
1962 चंदन सिंह निर्दलीय
1967 शफाकत जंग कांग्रेस
1969 मध्यावधि चंद्रभान बीकेडी
1974 हुकुम सिंह कंाग्रेस
1977 बशीर अहमद जनता पार्टी
1980 हुकुम सिंह कांग्रेस
1985 हुकुम सिंह कांग्रेस
1989 राजेश्वर बंसल निर्दलीय
1991 मुन्नवर हसन जनता दल
1996 हुकुम सिंह भाजपा
2002 हुकुम सिंह भाजपा
2007 हुकुम सिंह भाजपा
2012 हुकुम सिंह भाजपा
2014 उपचुनाव नाहिद हसन सपा
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कैराना विधानसभा सीट का इतिहास देखा जाए तो 1952 से 1996 तक यहां के मतदाताओं ने किसी भी पार्टी को लगातार कई बार मौका नहीं दिया। 1952 ,1957 में दो बार लगातार कांग्रेस चुनाव जीती, लेकिन 1962 में यहां के वोटरों ने कांग्रेस को नकार निर्दलीय चंदन सिंह पर भरोसा जताया। 1967 के चुनाव में मतदाताओं का मन फिर बदला। कांग्रेस के शफाकत जंग को मौका दिया। हालांकि 1969 के अगले ही चुनाव में वोटरों ने बीकेडी पर भरोसा जता चंद्रभान को जीत दिलाई। इसके बाद 1974 में कांग्रेस को हुकुम सिंह लोकल नेता के रूप में मिले और चुनाव लड़ाया। हुकुम सिंह कांग्रेस के टिकट पर लड़कर चुनाव जीते, लेकिन 1977 में चुनाव हार गए। इस बार मतदाताओं ने जनता पार्टी पर भरोसा जताया। हालांकि 1980 में मतदाताओं ने चौधरी चरणसिंह के जनता दल पर विश्वास किया और कांग्रेस छोड़ जनता दल में गए हुकुम सिंह को जीत दिलाई। 1985 में मतदाताओं का मन फिर बदला ओर उन्होंने फिर से कांग्रेस को जीत दिलाई। हालांकि 1989 में फिर से वोटरों ने बदलाव किया और निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में राजेश्वर बंसल यहां से चुनाव जीते। सन् 1991 में जनता दल को जीत मिली। सन् 1996 में भाजपा में शामिल हुए हुकुम सिंह। इसके बाद हुकुम सिंह ने 1996, 2002 ,2007 और फिर 2012 में लगातार चार बार चुनाव जीते, जो इस सीट पर किसी भी पार्टी प्रत्याशी के चुनाव जीतने का इतिहास है। हुकुम सिंह के सांसद बनने के बाद पार्टी ने पहली बार हुकुुम सिंह से अलग किसी नए चेहरे केा चुनाव मैदान में उतारा था। कैराना के मतदाताओं ने अपनी पुरानी परंपरा का निर्वाह करते हुए इस बार बदलाव के लिए मतदान किया और इस सीट का इतिहास बदल दिया।
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कैराना विधानसभा सीट का अब तक का सफर
सन विजेता पार्टी
1952 केशव गुप्ता कांग्रेस
1957 विरेंद्र वर्मा कांग्रेस
1962 चंदन सिंह निर्दलीय
1967 शफाकत जंग कांग्रेस
1969 मध्यावधि चंद्रभान बीकेडी
1974 हुकुम सिंह कंाग्रेस
1977 बशीर अहमद जनता पार्टी
1980 हुकुम सिंह कांग्रेस
1985 हुकुम सिंह कांग्रेस
1989 राजेश्वर बंसल निर्दलीय
1991 मुन्नवर हसन जनता दल
1996 हुकुम सिंह भाजपा
2002 हुकुम सिंह भाजपा
2007 हुकुम सिंह भाजपा
2012 हुकुम सिंह भाजपा
2014 उपचुनाव नाहिद हसन सपा