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सीएचसी में फर्श पर जन्मा बच्चा
Muzaffar nagar
Updated Mon, 20 Oct 2014 05:32 AM IST
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कांधला। सुविधाओं का अभाव, पैसों का लालच या फिर अस्पताल कर्मियों और डाक्टरों में खत्म होती मानवीय संवेदनाएं, जिससे कि दर्द से बिलखती एक महिला को सीएचसी के बाहर खुले में फर्श पर बच्चे को जन्म देना पड़ा। इस घटना ने अस्पताल में मौजूद लोगों को भले ही झकझोर दिया हो, लेकिन अस्पताल कर्मचारी और डॉक्टरों को इससे कोई फर्क नहीं पड़ा। बाद में जब परिजनों ने हंगामा किया तो उसे भर्ती कर लिया गया। अच्छी बात यह है कि मां और नवजात दोनों स्वस्थ हैं।
क्षेत्र के गांव डुढार निवासी आबिद पिछले वर्ष सितंबर माह में हुए दंगों के दौरान अपने परिवार समेत कस्बे के घसौली रोड पर आकर रहने लगा था। शुक्रवार सुबह वह अपनी गर्भवती पत्नी जुबैदा को प्रसव पीड़ा होने पर स्थानीय सीएचसी पर लेकर पहुंचा था। महिला के परिजन यामीन, आबिद, राशिद, हाशिम आदि का आरोप है कि सीएचसी पर पहुंचते ही डाक्टरों ने महिला को भर्ती करने से इंकार करते हुए मुजफ्फरनगर रेफर कर दिया। गर्भवती की प्रसव पीड़ा को देखते हुए उन्होंने स्टाफ से बार-बार आग्रह किया, लेकिन डाक्टरों ने सुविधाओं का अभाव बताते हुए अस्पताल में डिलीवरी कराने से साफ इंकार कर दिया। आरोप है कि गर्भवती सीएचसी के बाहर प्रसव पीड़ा से तड़पती रही, लेकिन वहां मौजूद कर्मचारी और डाक्टरों का दिल नहीं पसीजा। इस दौरान एक डॉक्टर ने उपचार देने की एवज में उनसे सुविधा शुल्क की मांग की। इन सबके बीच महिला ने सीएचसी के बाहर ही नवजात को जन्म दिया। इससे नाराज परिजनों ने डाक्टरों पर लापरवाही और सुविधा शुल्क मांगने का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया। हंगामे की सूचना पर पहुंचे चिकित्साधीक्षक से आक्रोशित परिजनों की तीखी नोकझोंक भी हुई। इसके बाद डाक्टरों ने महिला और बच्चे को अस्पताल में भर्ती कर लिया। महिला और नवजात दोनों स्वस्थ बताए जा रहे हैं।
सीएचसी पर उपचार के लिए सुविधा शुल्क मांगे जाने का आरोप निराधार है। महिला सुबह नौ बजे सीएचसी पर प्रसव के लिए पहुंची थी। जांच के बाद महिला में खून की कमी पाए जाने पर उसे 10 बजे रेफर कर दिया गया था, लेकिन उसे सीएचसी से नहीं ले गए। उन्होंने बताया कि परिजनों की रजामंदी से ही गर्भवती को रेफर किया गया था।
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-डाक्टर रमेश चंद्रा, चिकित्साधीक्षक कांधला
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क्षेत्र के गांव डुढार निवासी आबिद पिछले वर्ष सितंबर माह में हुए दंगों के दौरान अपने परिवार समेत कस्बे के घसौली रोड पर आकर रहने लगा था। शुक्रवार सुबह वह अपनी गर्भवती पत्नी जुबैदा को प्रसव पीड़ा होने पर स्थानीय सीएचसी पर लेकर पहुंचा था। महिला के परिजन यामीन, आबिद, राशिद, हाशिम आदि का आरोप है कि सीएचसी पर पहुंचते ही डाक्टरों ने महिला को भर्ती करने से इंकार करते हुए मुजफ्फरनगर रेफर कर दिया। गर्भवती की प्रसव पीड़ा को देखते हुए उन्होंने स्टाफ से बार-बार आग्रह किया, लेकिन डाक्टरों ने सुविधाओं का अभाव बताते हुए अस्पताल में डिलीवरी कराने से साफ इंकार कर दिया। आरोप है कि गर्भवती सीएचसी के बाहर प्रसव पीड़ा से तड़पती रही, लेकिन वहां मौजूद कर्मचारी और डाक्टरों का दिल नहीं पसीजा। इस दौरान एक डॉक्टर ने उपचार देने की एवज में उनसे सुविधा शुल्क की मांग की। इन सबके बीच महिला ने सीएचसी के बाहर ही नवजात को जन्म दिया। इससे नाराज परिजनों ने डाक्टरों पर लापरवाही और सुविधा शुल्क मांगने का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया। हंगामे की सूचना पर पहुंचे चिकित्साधीक्षक से आक्रोशित परिजनों की तीखी नोकझोंक भी हुई। इसके बाद डाक्टरों ने महिला और बच्चे को अस्पताल में भर्ती कर लिया। महिला और नवजात दोनों स्वस्थ बताए जा रहे हैं।
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सीएचसी पर उपचार के लिए सुविधा शुल्क मांगे जाने का आरोप निराधार है। महिला सुबह नौ बजे सीएचसी पर प्रसव के लिए पहुंची थी। जांच के बाद महिला में खून की कमी पाए जाने पर उसे 10 बजे रेफर कर दिया गया था, लेकिन उसे सीएचसी से नहीं ले गए। उन्होंने बताया कि परिजनों की रजामंदी से ही गर्भवती को रेफर किया गया था।
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-डाक्टर रमेश चंद्रा, चिकित्साधीक्षक कांधला