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दंपति से क्या थी कातिल को खुन्नस?
Muzaffar nagar
Updated Sat, 19 Apr 2014 05:31 AM IST
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मुजफ्फरनगर। रिटायर बैंक कैशियर की पत्नी ऊषा किरण मर्डर मिस्ट्री उलझती जा रही है। हत्या का मोटिव और कातिल का कोई सुराग नहीं। पुलिस तमाम छानबीन कर चुकी है, लेकिन कोई लाइन नहीं मिली। सीसीटीवी फुटेज रिकार्डिंग की उम्मीद भी बेकार गई। मौका-ए वारदात पर मिली नुकीली रॉड भी पुलिस को कोई क्लू नहीं दे पाई।
अपराध की एक थ्योरी यह भी है कि जैसे-जैसे वक्त गुजरता है कातिल पुलिस से दूर होता जाता है। शहर के पटेलनगर में रहने वाले रिटायर्ड बैंक कैशियर जयभगवान बंसल के घर हुई वारदात पुलिस के लिए चुनौती बनी हुई है। घर में जयभगवान और उनकी बीवी ऊषा किरण रात में सही सलामत सोए थे। सुबह नौकरानी पहुंची तो घर का हाल देख रौंगटे खड़े हो गए। बेड पर खून से लथपथ ऊषा किरण दम तोड़ चुकी थीं। जयभगवान सांसें गिन रहे थे। मेरठ के हॉस्पिटल में जयभगवान जिंदगी मौत से जूझ रहे हैं। इस वारदात का अहम पहलू यह भी है कि घर में कोई सामान तक नहीं छेड़ा गया। ऊषा की गले की चेन भी पास में पड़ी मिली। घटनास्थल पर अस्त-व्यस्त कपड़े और अन्य सामान इशारा करते हैं कि कातिल एक से ज्यादा थे। ऊषा ने भी मरने से पहले कड़ा संघर्ष किया, जितनी क्रूरता से हत्या की गई, उससे यह भी जाहिर होता है कि कातिल को दंपति से कोई विशेष ‘खुन्नस’ थी। लाश के पास तीन जोड़ी चप्पलें भी मिली हैं, जिनमें से एक के कातिलों की होने की संभावना है। बेड पर टाई भी मिली, जिससे हो सकता है कि हत्यारों ने गला घोंटने की कोशिश की हो।
सुरक्षा को लेकर गंभीर थे बंसल
जयभगवान सुरक्षा को लेकर बेहद गंभीर थे। घर में लगे सीसीटीवी कैमरे यह बताने के लिए काफी हैं। आखिर ऐसी क्या वजह थी कि जयभगवान को अपने घर में तीन-तीन सीसीटीवी कैमरे लगवाने पड़े। पुलिस के कानों तक यह भी जानकारी पहुंची है कि जयभगवान पैसों का लेनदेन भी किया करते थे, जबकि ऊषा अपने बुटीक के काम में व्यस्त रहती थीं। बेटा आस्ट्रेलिया में सीए है और बेटी दिल्ली ब्याही है। पूछताछ में अभी तक कोई ऐसी रंजिश भी सामने नहीं आई है। दंपति मकान में अकेले रहते थे, ऐसे में इनकी जान का दुश्मन कौन और क्यों बना। पटेलनगर का यह व्यस्त इलाका है, जहां आबादी के साथ बाजार है और हर समय आवाजाही रहती है। पुलिस की यह उम्मीद भी टूट गई, जिसमें फुटेज का रिकार्ड मिलने की संभावना थी। पासवर्ड तोड़कर देखा गया, लेकिन कैमरे में फुटेज नहीं है।
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कहां से आई लोहे की रॉड?
पुलिस की जांच मौका ए वारदात पर मिली रॉड पर टिकी है। इसी रॉड से दंपति पर वार किए गए। परिजनों ने यह बताया कि इस रॉड को उन्होंने पहले घर में कभी नहीं देखा। रॉड कुछ इस तरह की है कि जो टेंट वगैरह गाड़ने में इस्तेमाल की जाती है। शुक्रवार को पुलिस ने आसपास के टेंट वालों की दुकानें भी खंगाली और वहां कार्यरत नौकरों के बारे में तहकीकात की। फिलहाल ऐसा कोई सुबूत पुलिस के हाथ नहीं लगा, जिससे जांच की दिशा आगे बढ़ सके।
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अपराध की एक थ्योरी यह भी है कि जैसे-जैसे वक्त गुजरता है कातिल पुलिस से दूर होता जाता है। शहर के पटेलनगर में रहने वाले रिटायर्ड बैंक कैशियर जयभगवान बंसल के घर हुई वारदात पुलिस के लिए चुनौती बनी हुई है। घर में जयभगवान और उनकी बीवी ऊषा किरण रात में सही सलामत सोए थे। सुबह नौकरानी पहुंची तो घर का हाल देख रौंगटे खड़े हो गए। बेड पर खून से लथपथ ऊषा किरण दम तोड़ चुकी थीं। जयभगवान सांसें गिन रहे थे। मेरठ के हॉस्पिटल में जयभगवान जिंदगी मौत से जूझ रहे हैं। इस वारदात का अहम पहलू यह भी है कि घर में कोई सामान तक नहीं छेड़ा गया। ऊषा की गले की चेन भी पास में पड़ी मिली। घटनास्थल पर अस्त-व्यस्त कपड़े और अन्य सामान इशारा करते हैं कि कातिल एक से ज्यादा थे। ऊषा ने भी मरने से पहले कड़ा संघर्ष किया, जितनी क्रूरता से हत्या की गई, उससे यह भी जाहिर होता है कि कातिल को दंपति से कोई विशेष ‘खुन्नस’ थी। लाश के पास तीन जोड़ी चप्पलें भी मिली हैं, जिनमें से एक के कातिलों की होने की संभावना है। बेड पर टाई भी मिली, जिससे हो सकता है कि हत्यारों ने गला घोंटने की कोशिश की हो।
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सुरक्षा को लेकर गंभीर थे बंसल
जयभगवान सुरक्षा को लेकर बेहद गंभीर थे। घर में लगे सीसीटीवी कैमरे यह बताने के लिए काफी हैं। आखिर ऐसी क्या वजह थी कि जयभगवान को अपने घर में तीन-तीन सीसीटीवी कैमरे लगवाने पड़े। पुलिस के कानों तक यह भी जानकारी पहुंची है कि जयभगवान पैसों का लेनदेन भी किया करते थे, जबकि ऊषा अपने बुटीक के काम में व्यस्त रहती थीं। बेटा आस्ट्रेलिया में सीए है और बेटी दिल्ली ब्याही है। पूछताछ में अभी तक कोई ऐसी रंजिश भी सामने नहीं आई है। दंपति मकान में अकेले रहते थे, ऐसे में इनकी जान का दुश्मन कौन और क्यों बना। पटेलनगर का यह व्यस्त इलाका है, जहां आबादी के साथ बाजार है और हर समय आवाजाही रहती है। पुलिस की यह उम्मीद भी टूट गई, जिसमें फुटेज का रिकार्ड मिलने की संभावना थी। पासवर्ड तोड़कर देखा गया, लेकिन कैमरे में फुटेज नहीं है।
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कहां से आई लोहे की रॉड?
पुलिस की जांच मौका ए वारदात पर मिली रॉड पर टिकी है। इसी रॉड से दंपति पर वार किए गए। परिजनों ने यह बताया कि इस रॉड को उन्होंने पहले घर में कभी नहीं देखा। रॉड कुछ इस तरह की है कि जो टेंट वगैरह गाड़ने में इस्तेमाल की जाती है। शुक्रवार को पुलिस ने आसपास के टेंट वालों की दुकानें भी खंगाली और वहां कार्यरत नौकरों के बारे में तहकीकात की। फिलहाल ऐसा कोई सुबूत पुलिस के हाथ नहीं लगा, जिससे जांच की दिशा आगे बढ़ सके।