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बाबा पर मुकदमे से प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

Mon, 23 Sep 2013 05:37 AM IST
Muzaffar nagar
Muzaffar nagar Updated Mon, 23 Sep 2013 05:37 AM IST
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मुजफ्फरनगर। सांप्रदायिक हिंसा के बाद गठवाला खाप के वयोवृद्ध चौधरी हरिकिशन मलिक पर दर्ज किए गए रिपोर्ट से प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। मंच और माइक पर खामोश रहने वाले चौधरी पिछले लगभग एक साल से घुटनों की बीमारी से जूझ रहे हैं। आवाजाही में उन्हें सहारे की जरूरत पड़ती है। बाबा के प्रतिनिधि उमेश मलिक ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से इस नामजदगी की जांच कराने की मांग की है।
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कवाल में 27 अगस्त को तिहरे हत्याकांड में फर्जी नामजदगी से जिला हिंसा की भेंट चढ़ गया। बेकसूर मौत की बलि चढ़ गए। झिंझाना थाने में गठवाला खाप के बाबा चौधरी हरिकिशन मलिक पर संगीन धाराओं में दर्ज किए गए मुकदमों से प्रशासन की नीतियों पर सवाल खड़े हो रहे हैं। चौंकाने वाली बात यह कि पिछले एक वर्ष से वह सार्वजनिक मंचों पर कम ही दिखते हैं। नंगला मंदौड़ की पंचायत में भी उन्हें सहारा देकर ले जाया गया। घुटनों की कमजोरी उनकी सबसे बड़ी परेशानी है। गंभीर धाराओं में बाबा की नामजदगी से सूबे की सरकार की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है। बाबा के प्रतिनिधि ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से इस मामले की जांच कराने की मांग की है।
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